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फूलों के पराग कण से बढ़ी सांस की बीमारी, मौसम से स्वास्थ्य प्रभावित
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तीखी धूप से सर्दी, खांसी व निमोनिया की चपेट में बच्चे
बस्ती। मौसम के तीखे तेवर से बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा है। तीखी धूप के चलते जहां निमोनिया व सर्दी, खांसी से बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। वहीं, डायरिया व सांस की बीमारी ने भी पांव पसार लिया है। इसके चलते अस्पताल में हर दिन बाल रोग विभाग में 25 बच्चों में से 20 बच्चे इसी रोग से ग्रसित आ रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय यादव के मुताबिक सांस की बीमारी का कारण फूलों के पराग कण हैं, जो हवा में घुलकर सांस में समा जाते हैं, जिससे सांस फूलने लगती है। ऐसे में बच्चों व बड़ों सभी को इससे बचने की जरूरत है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में इन दिनों मौसम से प्रभावित बीमारों की लाइन है। यही हाल वार्ड का भी है। यहां भर्ती करीब तीस में से 22 बच्चे निमोनिया, सर्दी खांसी से ग्रसित हैं। इनका इलाज किया जा रहा है। यहां सांस फूलने की शिकायत के भी तीन बच्चे भर्ती हैं, जिनकी स्थिति सामान्य बताई गई है।
बोले, अस्पताल के चिकित्सक
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय यादव ने कहा कि सांस की बीमारी बढ़ने का कारण इन दिनों आम में बौर लगना है। इनका हवाओं के माध्यम से परागण होता है। परागण के दौरान यह सांस में चले जाते हैं तो सांस फूलने लगती है। इससे बचाव का मात्र एक ही उपाय है। ऐसे इलाकों में जाने से तब बचें, जहां बाग बगीचा हो और तेज हवा चल रही हो। कहा कि मौसम का प्रभाव बच्चों की सेहत पर है। इस नाते निमोनिया, सर्दी खांसी व बुखार से बच्चे प्रभावित हैं।
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तेज धूप में न निकलें, पानी खूब पीएं
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि पराग कण के चलते सांस ही नहीं बल्कि शरीर में चकत्ते व जुलपुत्ती भी निकल जाती है। ऐसे में तेज हवा के साथ पराग कण उड़ते हैं। उस दौरान यह सांस में चलते जाते हैं, जिससे यह स्थिति पैदा होती है। प्रयास करें जब तेज हवा चले तो घर से न निकलें। कहा कि बच्चों के लिए यह मौसम बेहद संवेदनशील है। ऐसे में तेज धूप से बचाकर बच्चों को रखें। यदि जरूरत हो तभी घर से निकलें वह भी पूरा शरीर ढककर और सिर को भी धूप से बचाने का उपाय करें। बाहर का पानी भी न पीएं, मगर पानी का खूब सेवन करें। बासी खाना कतई न खाएं, कटे फल अथवा सड़क किनारे बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से भी बचे।
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बस्ती। मौसम के तीखे तेवर से बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा है। तीखी धूप के चलते जहां निमोनिया व सर्दी, खांसी से बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। वहीं, डायरिया व सांस की बीमारी ने भी पांव पसार लिया है। इसके चलते अस्पताल में हर दिन बाल रोग विभाग में 25 बच्चों में से 20 बच्चे इसी रोग से ग्रसित आ रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय यादव के मुताबिक सांस की बीमारी का कारण फूलों के पराग कण हैं, जो हवा में घुलकर सांस में समा जाते हैं, जिससे सांस फूलने लगती है। ऐसे में बच्चों व बड़ों सभी को इससे बचने की जरूरत है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में इन दिनों मौसम से प्रभावित बीमारों की लाइन है। यही हाल वार्ड का भी है। यहां भर्ती करीब तीस में से 22 बच्चे निमोनिया, सर्दी खांसी से ग्रसित हैं। इनका इलाज किया जा रहा है। यहां सांस फूलने की शिकायत के भी तीन बच्चे भर्ती हैं, जिनकी स्थिति सामान्य बताई गई है।
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बोले, अस्पताल के चिकित्सक
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय यादव ने कहा कि सांस की बीमारी बढ़ने का कारण इन दिनों आम में बौर लगना है। इनका हवाओं के माध्यम से परागण होता है। परागण के दौरान यह सांस में चले जाते हैं तो सांस फूलने लगती है। इससे बचाव का मात्र एक ही उपाय है। ऐसे इलाकों में जाने से तब बचें, जहां बाग बगीचा हो और तेज हवा चल रही हो। कहा कि मौसम का प्रभाव बच्चों की सेहत पर है। इस नाते निमोनिया, सर्दी खांसी व बुखार से बच्चे प्रभावित हैं।
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तेज धूप में न निकलें, पानी खूब पीएं
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि पराग कण के चलते सांस ही नहीं बल्कि शरीर में चकत्ते व जुलपुत्ती भी निकल जाती है। ऐसे में तेज हवा के साथ पराग कण उड़ते हैं। उस दौरान यह सांस में चलते जाते हैं, जिससे यह स्थिति पैदा होती है। प्रयास करें जब तेज हवा चले तो घर से न निकलें। कहा कि बच्चों के लिए यह मौसम बेहद संवेदनशील है। ऐसे में तेज धूप से बचाकर बच्चों को रखें। यदि जरूरत हो तभी घर से निकलें वह भी पूरा शरीर ढककर और सिर को भी धूप से बचाने का उपाय करें। बाहर का पानी भी न पीएं, मगर पानी का खूब सेवन करें। बासी खाना कतई न खाएं, कटे फल अथवा सड़क किनारे बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से भी बचे।