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Basti News: मेडिकल कॉलेज में नहीं भरेगा पानी...बन रही राह
Sat, 08 Nov 2025 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 08 Nov 2025 01:21 AM IST
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सोनूपार चौराहे के पास मेडिकल कॉलेज के नाला निर्माण के लिए की गई खोदाई।
बस्ती। मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में जलभराव की समस्या का समाधान अब बहुत जल्द होने वाला है। जिला पंचायत से पारित नाला निर्माण का प्रस्ताव पर कार्य शुरू हो गया है। सोनूपार की तरफ से खोदाई भी आरंभ कर दी गई है। लगभग दो किमी लंबाई में आधुनिक सीसी नाले पर 2.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मिली पीजीआई की तर्ज पर बस्ती शहर से पांच किमी दूर गैर चिरागी कैली गांव में 500 शैय्या के बनाए गए अस्पताल भवन, आवासीय भवन और परिसर से जलनिकासी की व्यवस्था पिछले तीन दशक से नहीं बन पाई थी। कुल 34 एकड़ भू-भाग वाले इस अस्पताल भवन परिसर में 12 महीने जलभराव की समस्या बनी रहती है। अस्पताल भवन और आवासीय भवनों से निकलने वाले गंदे पानी कुछ सालों तक सोख्ता गड्ढों में एकत्र हुए।
इधर चार-पांच साल से ओवरफ्लों होकर इधर-उधर सड़क और परिसर में पसरे रहते हैं। अभी आठ साल पहले यह अस्पताल भवन महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के अधीन चिकित्सा इकाई के रूप में हो गया। इसके बाद उपयोगिता और बढ़ गई।
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जलनिकासी की व्यवस्था न होने से बारिश के समय तो यहां परिसर से लेकर आवासीय क्षेत्र तक पानी भरा रहता है। जलभराव के चलते मरीज, तीमारदार, चिकित्सक, स्टॉफ सभी परेशान होते हैं। आवासीय क्षेत्र में तो बारिश के दौरान घरों के अंदर तक पानी भर जाता है।
तत्कालीन डीएम रवीश गुप्ता की पहल पर जिला पंचायत से नाला निर्माण का रास्ता साफ हुआ है। जिला पंचायत से प्रस्ताव पारित होने के बाद 2.80 करोड़ रुपये के एस्टीमेट पर दिवाली से पहले ही निविदा आवंटित कर दी गई थी।
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मिली पीजीआई की तर्ज पर बस्ती शहर से पांच किमी दूर गैर चिरागी कैली गांव में 500 शैय्या के बनाए गए अस्पताल भवन, आवासीय भवन और परिसर से जलनिकासी की व्यवस्था पिछले तीन दशक से नहीं बन पाई थी। कुल 34 एकड़ भू-भाग वाले इस अस्पताल भवन परिसर में 12 महीने जलभराव की समस्या बनी रहती है। अस्पताल भवन और आवासीय भवनों से निकलने वाले गंदे पानी कुछ सालों तक सोख्ता गड्ढों में एकत्र हुए।
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इधर चार-पांच साल से ओवरफ्लों होकर इधर-उधर सड़क और परिसर में पसरे रहते हैं। अभी आठ साल पहले यह अस्पताल भवन महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के अधीन चिकित्सा इकाई के रूप में हो गया। इसके बाद उपयोगिता और बढ़ गई।
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जलनिकासी की व्यवस्था न होने से बारिश के समय तो यहां परिसर से लेकर आवासीय क्षेत्र तक पानी भरा रहता है। जलभराव के चलते मरीज, तीमारदार, चिकित्सक, स्टॉफ सभी परेशान होते हैं। आवासीय क्षेत्र में तो बारिश के दौरान घरों के अंदर तक पानी भर जाता है।
तत्कालीन डीएम रवीश गुप्ता की पहल पर जिला पंचायत से नाला निर्माण का रास्ता साफ हुआ है। जिला पंचायत से प्रस्ताव पारित होने के बाद 2.80 करोड़ रुपये के एस्टीमेट पर दिवाली से पहले ही निविदा आवंटित कर दी गई थी।