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Basti News: कागज में चल रहीं अधिकतकर ग्राम सुरक्षा समितियां, सूचनाओं का अकाल

Tue, 02 Jan 2024 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 02 Jan 2024 11:21 PM IST
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Village security committees are mostly running on paper, famine of information
बस्ती। चोरी की घटनाओं और डाका की धमकी के बीच सक्रिय ग्राम सुरक्षा समितियों की बेहद कमी महसूस की जा रही है। पुलिस को रुधौली के विशुनपुरवा में सबसे पहले धमकी भरा पोस्टर देखे जाने के बाद से ही ग्राम सुरक्षा समितियों की याद आने लगी। वरना, इन समितियों की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। इसलिए अधिकतर गांवों की सुरक्षा समितियां सिर्फ कागजों में चल रही हैं। शायद ही कोई थाना हो, जहां इन ग्राम सुरक्षा समिति के सदस्यों की बैठक की जाती हो।
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शासन के आदेश पर गांवों में करीब 12 वर्ष पहले ग्राम सुरक्षा समितियों का गठन किया गया था। इसके पीछे शासन की मंशा यह थी कि गांवों में सुरक्षा समितियों के होने से अपराधों पर अंकुश लगाने में पुलिस को मदद मिलेगी। गांवों में होने वाली हरेक गतिविधियों की जानकारी पुलिस को मिलेगी। इससे जहां एक तरफ पुलिस का गांव-गांव में अपना नेटवर्क रहेगा, वहीं पुलिस अपराधियों पर समय रहते हुए कार्रवाई कर सकेगी। इसके अलावा प्रतिमाह सुरक्षा समितियों की थाना स्तर पर बैठकें करने और बाकायदा इसका एक रजिस्टर बनाने और समितियों द्वारा दिए जाने वाले सुझावों को उसमें दर्ज कर उस पर अमल करना था।
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शासन के आदेश पर गांवों में पांच सदस्यीय टीम गठित हुई। शुरुआती दौर में थाना स्तरों पर बैठकें हुईं, लेकिन ज्यों-ज्यो समय गुजरता गया पुलिस ने सुरक्षा समितियों की सुधि लेनी बंद कर दी। इससे सदस्यों का समिति से मोह भंग होने लगा। ऐसा नहीं है कि समितियों के सक्रिय होने की जानकारी एसपी से लेकर थानेदारों तक नहीं है। फिर भी आला अफसर जिले में समितियों के सुधार और सक्रिय करने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए।
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रजिस्टर के पन्ने भी जस के तस
जिले में 16 थाने हैं। इन थानों पर कागज में सुरक्षा समितियां अब भी बदस्तूर संचालित हैं, लेकिन अगर थानों पर रखे समितियों के रजिस्टर को देखें तो अधिकतर थानों के रजिस्टर के चार-छह पन्नों को छोड़ दें तो शेष पन्ने खाली मिलेंगे। वजह कि समितियों की कभी गांव में बैठक नहीं की जाती है। उनसे सूचनाएं और शिकायतें भी शायद ही कभी ली जाती हों।

इस तरह होता है स्वरूप
इसमें ग्राम स्तर पर सभी वर्तमान सरकारी कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी सदस्य होते हैं। ग्राम चौकीदार, लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, शिक्षा मित्र, आंगनबाड़ी, आशा, एएनएम, बीट आरक्षीगण आदि भी शामिल रहेंगे। निर्वाचित एवं नामित जनप्रतिनिधिगण में ग्राम सभा के सभी निर्वाचित वर्तमान एवं भूतपूर्व प्रतिनिधि होंगे, जिनमें ग्राम प्रधान, बीडीसी, पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य शामिल है। इसके अलावा ग्राम स्तर पर सक्रिय सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और एनजीओ के पदाधिकारी और पत्रकार आदि भी रखे जाने का प्राविधान है। ऐच्छिक सदस्यों में सभी जातियों और धर्मों के गणमान्य लोगों को शामिल किया जाता है।

फिर से सक्रिय की जाएंगी निष्क्रिय समितियां
आईजी आरके भारद्वाज ने बताया कि परिक्षेत्र के सभी थानाक्षेत्र में निष्क्रय हुई समितियों को फिर से सक्रिय व नई समितियों का गठन किया जाएगा। थानों के रजिस्टर नं आठ में इसे इंद्राज कराया जाएगा और बीट दरोगा, सिपाही समिति के लोगों से लगातार सम्पर्क में रहेंगे और बैठक करेंगे।
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