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Basti News: कोटेदारी के लिए ग्राम प्रधान ने किया गुमराह, पोल खुली तो एफआईआर

Tue, 26 Dec 2023 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 26 Dec 2023 12:04 AM IST
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Village head misled for Kotdari, FIR was filed when the matter was exposed
बस्ती। लालगंज थाने के कचनी गांव के प्रधान ने दूसरे गांव के पिछड़ी जाति के व्यक्ति को अपने गांव का अनुसूचित जाति का निवासी बना दिया। अभिलेख में हेरफेर और संबंधित विभाग के अधिकारियों को गुमराह करके निवास प्रमाणपत्र भी जारी करवा लिया। उसी व्यक्ति को ग्राम पंचायत का कोटेदार बनवाने के बाद गांव के लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। इस संबंध में उसी गांव के एक व्यक्ति की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने ग्राम प्रधान, उसकी पत्नी और पिछड़ी से अनुसूचित बने कोटेदार पर केस दर्ज किया है। एसएचओ चंदन कुमार ने बताया कि तफ्तीश की जा रही है।
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जानकारी के अनुसार, कचनी गांव के राजेश कुमार 2021 में प्रधान चुने गए। उसने दैजी गांव के पंकज को अपने गांव का निवासी बताते हुए जुलाई 2021 में परिवार रजिस्टर में उसका नाम दर्ज करवा दिया। उसी के जरिये उसने आधार कार्ड और निवास प्रमाणपत्र भी बनवा दिया। आरोप है कि इसी दौरान जाति छिपाकर तीन एयर जमीन भी प्रधान ने बैनामा कर दिया। वह जाति प्रमाणपत्र भी जारी करवाने के प्रयास में था, लेकिन लेखपाल रिपोर्ट लगाने को तैयार नहीं हुए।
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इसके बाद गांव की निलंबित कोटे की दुकान का भी आवंटन करने का प्रस्ताव पास करा लिया। इसके बाद दुकान उसके नाम आवंटित हो गई। गांव के लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव के धर्मवीर शुक्ल का उसने 10 लाख रुपये लेकर हड़प लिए थे। इससे खार खाए धर्मवीर शुक्ल ने सबक सिखाने के लिए शासन प्रशासन को शिकायती पत्र देना शुरू किया। उन शिकायतों की जांच में मामला पकड़ में आया। इसमें जाति छिपाकर जमीन बैनामा करने वाली बात भी सामने आई जिसके आधार पर कोतवाली में तहरीर दी गई। कोतवाली पुलिस ने प्रधान, उसकी पत्नी और पंकज के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, अमानत में खयानत सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया।
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600 शिकायती रजिस्ट्री के बाद हुई कार्रवाई
केस दर्ज कराने वाले धर्मवीर शुक्ल के अनुसार, प्रधान चुना गया राजेश कभी उनका करीबी था। गांव में एक जमीन खरीदने के लिए उसने साढ़े सात लाख रुपये ले रखे थे। चुनाव के दौरान भी उसके रुपये लिए। कुल मिलाकर उसके ऊपर 10 लाख रुपये बकाया हो गया। मांगने पर वह रुपये देने में आनाकानी करने लगा। उसने चार चेक दिया जाे बैंक में डिसऑनर हो गया। इधर, धर्मवीर शुक्ल ने जाति बदलने के खेल का विरोध करना शुरू किया तो उसने उनके रुपये वापस करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद शिकायतों का सिलसिला तेज हुआ। इस पर्दाफाश के लिए पंजीकृत डाक से शिकायतों की झड़ी लग गई थी। 11 अक्तूबर 2022 से लेकर अब तक के 14 महीने के भीतर शिकायतकर्ता ने 600 रजिस्ट्री कर डाला।
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