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Basti News: शव जलाने पर दो पक्ष आमने-सामने, प्रशासन ने कराया पटाक्षेप
Mon, 01 May 2023 12:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 01 May 2023 12:52 AM IST
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करैली गांव में शवदाह के लिए समझाते प्रभारी निरीक्षक रवींद्र सिंह, हलका लेखपाल मंयक अभिषेक व अन्
भानपुर (बस्ती)। रामनगर ब्लाक के करैली गांव के सिवान में हरियाली की जमीन के नाम पर छोड़ी गई भूमि में शव जलाने को लेकर दो समुदायों में तनाव उत्पन्न हो गया। जानकारी होने पर प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे। काफी मशक्कत के बाद प्रशासन सहमति बनाने में कामयाब हुआ और शव का अंतिम संस्कार किया गया। एसडीएम अतुल आनंद ने बताया कि हलका लेखपाल और पुलिस को मौके पर भेज कर मामले का पटाक्षेप करा दिया गया है।
घटनाक्रम के मुताबिक, करैली गांव निवासी 75 वर्षीय शांति देवी पत्नी बुद्धू यादव का शनिवार सायं निधन हो गया था। वह काफी समय से बीमार थीं। रविवार को उनका शव लेकर परिवार व गांव के लोग गांव के सिवान में स्थित खाली जमीन में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। उस जमीन से कुछ दूरी पर बेइली निवासी मुबारक अली ने मकान बना रखा है। जहां वह परिवार के साथ रहते हैं। मुबारक अली ने वहां पर शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। जबकि दूसरे पक्ष के लोग वहीं पर अंतिम संस्कार करने पर अड़ गए। दोनों पक्षों के काफी लोग मौके पर पहुंच गए। इसकी सूचना किसी ने पुलिस को दे दी। प्रभारी निरीक्षक सोनहा ने तहसील प्रशासन को इसकी जानकारी दी। प्रभारी निरीक्षक रवींद्र सिंह और हलका लेखपाल मयंक, अभिषेक व संतोष कुमार, प्रधान प्रतिनिधि करैली दिनेश कुमार भी मौके पर पहुंचे। अभिलेखों का परीक्षण और मौके की नवैयत को देखते हुए दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर उसी स्थान पर शव का अंतिम संस्कार कराया।
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पूर्वजों का वहीं होता रहा अंतिम संस्कार
- राजस्व अभिलेखों के अनुसार, वहां के गाटा संख्या 417 में 122 एयर जमीन हरियाली के लिए छोड़ी गई है। बुद्धू यादव ने बताया कि इसी भूमि में उनके पूर्वजों का अंतिम संस्कार होता आ रहा है। इसके चलते वह भी शव को लेकर वहां गए थे। उनके पूर्वजों का इस भूमि में लगाया गया पेड़ आज भी मौजूद है।
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शवदाह रोकना नहीं था उद्देश्य
- दूसरे पक्ष के मुबारक अली ने बताया कि हमारा उद्देश्य किसी के शव का दाह करने से रोकने का नहीं था, बल्कि इतनी गुजारिश थी कि जिस काम के लिए जो स्थान जहां निर्धारित है, वहीं पर शवदाह किया जाए। पहले कोई घर नहीं बना था। सब भूमि खाली थी तो किसी को कोई परेशानी नहीं थी। चूंकि अब घर बन गया है तो लोगों को इसका भी ख्याल रखना चाहिए।
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गांव में श्मशान की तीन भूमि
- हल्का लेखपाल मयंक अभिषेक ने बताया कि करैली गांव में श्मशान के लिए तीन जगह भूमि गाटा संख्या 223, 224, 426 छोड़ी गई। उसमें हर बिरादरी के लोग शव रखते और जलाते है। वह खाली भी है।
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घटनाक्रम के मुताबिक, करैली गांव निवासी 75 वर्षीय शांति देवी पत्नी बुद्धू यादव का शनिवार सायं निधन हो गया था। वह काफी समय से बीमार थीं। रविवार को उनका शव लेकर परिवार व गांव के लोग गांव के सिवान में स्थित खाली जमीन में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। उस जमीन से कुछ दूरी पर बेइली निवासी मुबारक अली ने मकान बना रखा है। जहां वह परिवार के साथ रहते हैं। मुबारक अली ने वहां पर शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। जबकि दूसरे पक्ष के लोग वहीं पर अंतिम संस्कार करने पर अड़ गए। दोनों पक्षों के काफी लोग मौके पर पहुंच गए। इसकी सूचना किसी ने पुलिस को दे दी। प्रभारी निरीक्षक सोनहा ने तहसील प्रशासन को इसकी जानकारी दी। प्रभारी निरीक्षक रवींद्र सिंह और हलका लेखपाल मयंक, अभिषेक व संतोष कुमार, प्रधान प्रतिनिधि करैली दिनेश कुमार भी मौके पर पहुंचे। अभिलेखों का परीक्षण और मौके की नवैयत को देखते हुए दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर उसी स्थान पर शव का अंतिम संस्कार कराया।
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पूर्वजों का वहीं होता रहा अंतिम संस्कार
- राजस्व अभिलेखों के अनुसार, वहां के गाटा संख्या 417 में 122 एयर जमीन हरियाली के लिए छोड़ी गई है। बुद्धू यादव ने बताया कि इसी भूमि में उनके पूर्वजों का अंतिम संस्कार होता आ रहा है। इसके चलते वह भी शव को लेकर वहां गए थे। उनके पूर्वजों का इस भूमि में लगाया गया पेड़ आज भी मौजूद है।
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शवदाह रोकना नहीं था उद्देश्य
- दूसरे पक्ष के मुबारक अली ने बताया कि हमारा उद्देश्य किसी के शव का दाह करने से रोकने का नहीं था, बल्कि इतनी गुजारिश थी कि जिस काम के लिए जो स्थान जहां निर्धारित है, वहीं पर शवदाह किया जाए। पहले कोई घर नहीं बना था। सब भूमि खाली थी तो किसी को कोई परेशानी नहीं थी। चूंकि अब घर बन गया है तो लोगों को इसका भी ख्याल रखना चाहिए।
गांव में श्मशान की तीन भूमि
- हल्का लेखपाल मयंक अभिषेक ने बताया कि करैली गांव में श्मशान के लिए तीन जगह भूमि गाटा संख्या 223, 224, 426 छोड़ी गई। उसमें हर बिरादरी के लोग शव रखते और जलाते है। वह खाली भी है।