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जिंदा जल गईं दो बच्चियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2016 11:27 PM IST
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छावनी। घाघरा नदी के कछार क्षेत्र में बसे सहजौरा पाठक गांव में सोमवार की
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रात ढिबरी से झोपड़ी में लगी आग में दो बच्चियां जिंदा जल गईं, जबकि झोपड़ी
में सो रहे पांच बच्चों को उनकी मां ने बचा लिया। घटना की सूचना मिलने के
बाद रात में ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव में पहुंच गए और पीड़ित
परिवार को ढांढस बंधाया और उनकी मदद का आश्वासन दिया।
सहजौरा पाठक गांव में झोपड़ी में अपने सात बच्चों के साथ जीवन बिता रही राधादेवी पत्नी स्व. दिलीप निषाद सोमवार की रात बच्चों के साथ भोजन करने के बाद झोपड़ी में जमीन पर पुआल के बिस्तर पर सो गई। झोपड़ी के अंदर प्रतिदिन की तरह ढिबरी जल रही थी।
राधा ने बताया कि रात में न जाने कैसे ढिबरी गिर गई और आग लग गई। गर्मी के अहसास से कुछ देर बाद उसकी नींद खुली तो देखा कि चारों तरफ आग की लपटें उठ रही हैं। पुआल के बिस्तर में भी आग पकड़ ली। बदहवासी की हालत में उसने बचों को झोपड़ी से निकालना शुरू किया।
पांच बच्चे राजू (13), नेहा (11) मुन्ना (04) दुर्गा (02) सोनू (2माह) को तो वह बचाने में कामयाब हो गई, मगर निक्की (05) और गुड़िया (06) को झोपड़ी से नहीं निकाल पाई। दोनों आग की लपटों में घिर गए थे। उसकी आंखों के सामने ही दोनों की तड़पकर मौत हो गई। घर में रखा सारा समान जलकर राख हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज विक्रमजोत उमेश यादव, प्रभारी निरीक्षक आरके गौतम मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दोनों बच्चों के शव को कब्जे में ले लिया। रात में ही एएसपी वीरेंद्र कुमार यादव, सीओ हर्रैया कृष्णमुरारी, तहसीलदार राजेश वर्मा ने गांव पहुंच कर घटना के संबंध में पीड़ित महिला से जानकारी ली और आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
सहजौरा पाठक गांव में झोपड़ी में अपने सात बच्चों के साथ जीवन बिता रही राधादेवी पत्नी स्व. दिलीप निषाद सोमवार की रात बच्चों के साथ भोजन करने के बाद झोपड़ी में जमीन पर पुआल के बिस्तर पर सो गई। झोपड़ी के अंदर प्रतिदिन की तरह ढिबरी जल रही थी।
राधा ने बताया कि रात में न जाने कैसे ढिबरी गिर गई और आग लग गई। गर्मी के अहसास से कुछ देर बाद उसकी नींद खुली तो देखा कि चारों तरफ आग की लपटें उठ रही हैं। पुआल के बिस्तर में भी आग पकड़ ली। बदहवासी की हालत में उसने बचों को झोपड़ी से निकालना शुरू किया।
पांच बच्चे राजू (13), नेहा (11) मुन्ना (04) दुर्गा (02) सोनू (2माह) को तो वह बचाने में कामयाब हो गई, मगर निक्की (05) और गुड़िया (06) को झोपड़ी से नहीं निकाल पाई। दोनों आग की लपटों में घिर गए थे। उसकी आंखों के सामने ही दोनों की तड़पकर मौत हो गई। घर में रखा सारा समान जलकर राख हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज विक्रमजोत उमेश यादव, प्रभारी निरीक्षक आरके गौतम मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दोनों बच्चों के शव को कब्जे में ले लिया। रात में ही एएसपी वीरेंद्र कुमार यादव, सीओ हर्रैया कृष्णमुरारी, तहसीलदार राजेश वर्मा ने गांव पहुंच कर घटना के संबंध में पीड़ित महिला से जानकारी ली और आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया।