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Basti News: 22 साल में अब तक कोर्ट में ट्रायल नहीं शुरू सका

Tue, 17 Oct 2023 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 17 Oct 2023 12:42 AM IST
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Trial could not be started in court
पुलिस अमरमणि त्रिपाठी सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण छह दिसंबर 2001 को किया गया था। कोतवाली थाने में केस दर्ज कराया गया था। 22 साल से चल रहे इस केस में तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में ट्रायल तक शुरू नहीं हो सका है। इनमें से एक अमरमणि त्रिपाठी भी है। वह आज तक कोर्ट में पेश नहीं हुआ है। इसी तरह नैनीश शर्मा और शिवम को भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
राहुल के अपहरण मामले में पुलिस ने पहले सात आरोपी बनाए थे। इनमें मुख्य आरोपी संदीप त्रिपाठी मर चुका है। हनुमान शुक्ला उर्फ काका, अजय मिश्रा, आनंद सिंह, रामविलास, जग प्रताप वर्मा, नैनीश शर्मा, शिवम को आरोपी बनाया गया। इन्हीं आरोपियों के साथ पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का नाम जोड़ा गया था।
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केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने संदीप, हनुमान, अजय, आनंद राम विलास, जग प्रताप को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद बदमाशों को कोर्ट में पेश कर सभी पर आरोप तय दिए गए। सभी का ट्रायल शुरू हो गया, लेकिन नैनीश और शिवम के साथ अमरमणि इस मामले में कोर्ट में पेश नहीं हुआ। न ही तीनों की गिरफ्तारी हो सकी। संदीप की मौत के बाद अन्य आरोपियों ने अपनी फाइल अलग करवा ली। जबकि अमरमणि, नैनीश शर्मा और शिवम जमानत लेने के 22 वर्ष बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुए।
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बता दें कि छह दिसंबर 2001 को राहुल के अपहरण के मामले में कोतवाली थाने में केस दर्ज
किया गया था। राहुल के पिता धर्मराज ने पुलिस को दी गई तहरीर में लिखा था कि उनका बेटा राहुल बस्ती के एक निजी विद्यालय का संस्थागत छात्र है। घर से स्कूल जाने के लिए निकला था। सुबह करीब 7.45 बजे बेटा जब एक गुप्ता परिवार के घर के सामने से गुजर रहा था, उसी समय सफेद रंग की मारुति कार से आए बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया। गुप्ता परिवार के अलावा इस घटना के कुछ और चश्मदीद थे। एक सप्ताह के बाद 13 दिसंबर को लखनऊ के एक घर से बच्चे की बरामदगी होने के साथ ही पुलिस ने संदीप त्रिपाठी नाम के बदमाश को गिरफ्तार किया था।


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इस तरह सामने आया था अमरमणि का नाम
न्यायालय में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, आरोपी बनाए गए संदीप त्रिपाठी ने अपने साथियों के नाम बताए थे। इसके अलावा पुलिस के सामने दिए इकबालिया बयान में कहा था कि बच्चे के अपहरण के समय साथियों के साथ कई बार गाड़ी को बदलते हुए वह लखनऊ पहुंचा था। इसी दौरान पूछताछ में अमरमणि का नाम पुलिस के सामने आया था। तीन महीने में ही अमरमणि का मंत्री पद चला गया था। पुलिस का दबाव बढ़ने पर अमरमणि ने उच्च न्यायालय से एक फरवरी 2002 में जमानत ले ली थी। एक साल बाद 2003 में लखनऊ में ही मधुमिता शुक्ला हत्याकांड हो गया। इसमें भी अमरमणि आरोपी बनाया गया। 2007 में आजीवन कारावास की सजा हो गई। तब से अब तक इस मामले में अमरमणि बस्ती की कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ।
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