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हिट एंड रन: प्रचार-प्रसार बिना दम तोड़ रही जख्म पर मरहम की योजना
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बस्ती। लखनऊ-गोरखपुर और लुंबिनी-दुद्धी हाईवे होने की वजह से यहां हिट एंड रन के मामले अक्सर सामने आते हैं, जिसमें तेज रफ्तार वाहन दुर्घटना करके भाग जाता है, और उसका पता नहीं चलता, जबकि इसके कारण कई लोगों की मृत्यु हो जाती है, और कई घायल हो जाते हैं, लेकिन हैरत की बात है कि परिवहन विभाग इस योजना के तहत एक तिहाई लोगों को भी मुआवजा नहीं दे सका है। इसक कारण यह कि लोग जानकारी के अभाव में आवेदन ही नहीं कर रहे हैं।
इस योजना में हिट एंड रन के केस में मारे जाने वाले व्यक्ति के परिजनों को सड़क सुरक्षा फंड से दो लाख रुपये, जबकि घायल को पचास हजार रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है। जिला स्तर पर इसकी निगरानी के लिए समिति बनाई गई है। मगर लोगों को जानकारी और जागरूकता के अभाव में योजना कागजों में सिमट कर रह गई है। स्थिति यह है कि अफसरों ने इसके प्रचार-प्रसार में कभी रुचि ही नहीं ली। यहां तक कि योजना के बारे में कहीं कोई पोस्टर या सूचना तक नहीं लगाई गई है।
जबकि सरकारी आकड़ों के मुताबिक तीन वर्षों में ही 177 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 2023 में ही सड़क दुर्घटना के 38 मामले सामने आ चुके हैं। मगर अब तक सिर्फ 21 लोगाें को ही मुआवजे की रकम जारी हो सकी। इनमें 13 लोगों को रकम मिल चुकी है।
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मगर दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के लिए सरकार ने भले ही एक अच्छी योजना आरंभ की, लेकिन अफसरों ने इसके प्रचार-प्रसार पर जोर नहीं दिया। अलबत्ता सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इसे लेकर चर्चा तो होती है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की कोशिश नहीं की जाती है।
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यह है योजना
सामान्य तौर पर किसी ज्ञात वाहन से दुर्घटना होने पर बीमा कंपनी मुआवजा देती है, लेकिन जिनमें दुर्घटना करने वाले वाहन का पता नहीं चलता, उसमें मरने वाले के परिजन या घायल होने वाले को मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने यह योजना वर्ष 2000 में आरंभ की थी। पहले मुआवजे की राशि कम थी, लेकिन एक अप्रैल 2022 से इसमें इजाफा कर दिया गया। इसके तहत अगर अज्ञात वाहन की चपेट में आने से किसी की मृत्यु होती है, तो उसके परिजन को दो लाख रुपये और घायल होने वाले को पचास हजार रुपये मुआवजा दिया जाता है।
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इस तरह करना होता है आवेदन
अगर किसी व्यक्ति की अज्ञात वाहन की टक्कर में मौत हो जाती है, अथवा वह घायल हो जाता है, तब उसे या उसके परिजनों को तहसील में आर्थिक मदद के लिए आवेदन करना होता है। यह आवेदन ऑनलाइन करने की सुविधा है। इसमें एफआईआर की कॉपी, मेडिकल प्रमाणपत्र अथवा पोस्टमार्टम रिपोर्ट लगानी होती है। विभिन्न स्तर पर जांच के बाद यह रकम आवेदक के खाते में चली जाती है।
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अस्पतालों, पोस्टमार्टम हाउस, थानों पर लगने चाहिए पोस्टर
आमतौर पर दुर्घटना के मामलों के शिकार अस्पताल, थाने या पोस्टमार्टम हाउस पर जरूर पहुंचते हैं। वहां अगर योजना के संबंध में पोस्टर-होर्डिंग लगाई जाए तो लोगों को इसके बारे में जानकारी हो पाएगी, लेकिन कहीं भी ऐसे पोस्टर या होर्डिंग दिखाई नहीं देते।
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तीन साल में हिट एंड रन के मामले
- वर्ष दर्ज मामले मौत
2021 57 32
2022 82 45
2023 38 21
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कराया जा रहा प्रचार-प्रसार
हिट एंड रन में मुआवजे की योजना का लाभ आवेदन करने वालों को दिया जाता है। 2023 की शुरुआत में 21 लोगों का पैसा आया था। इनमें से 13 आवेदकों को मुआवजे की रकम मिल चुकी है। बाकी सात का चेक बनाकर उनके पास भेजा जा रहा है। योजना का प्रचार-प्रसार भी कराया जा रहा है।
-पंकज कुमार सिंह, एआरटीओ
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इस योजना में हिट एंड रन के केस में मारे जाने वाले व्यक्ति के परिजनों को सड़क सुरक्षा फंड से दो लाख रुपये, जबकि घायल को पचास हजार रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है। जिला स्तर पर इसकी निगरानी के लिए समिति बनाई गई है। मगर लोगों को जानकारी और जागरूकता के अभाव में योजना कागजों में सिमट कर रह गई है। स्थिति यह है कि अफसरों ने इसके प्रचार-प्रसार में कभी रुचि ही नहीं ली। यहां तक कि योजना के बारे में कहीं कोई पोस्टर या सूचना तक नहीं लगाई गई है।
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जबकि सरकारी आकड़ों के मुताबिक तीन वर्षों में ही 177 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 2023 में ही सड़क दुर्घटना के 38 मामले सामने आ चुके हैं। मगर अब तक सिर्फ 21 लोगाें को ही मुआवजे की रकम जारी हो सकी। इनमें 13 लोगों को रकम मिल चुकी है।
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मगर दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के लिए सरकार ने भले ही एक अच्छी योजना आरंभ की, लेकिन अफसरों ने इसके प्रचार-प्रसार पर जोर नहीं दिया। अलबत्ता सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इसे लेकर चर्चा तो होती है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने की कोशिश नहीं की जाती है।
यह है योजना
सामान्य तौर पर किसी ज्ञात वाहन से दुर्घटना होने पर बीमा कंपनी मुआवजा देती है, लेकिन जिनमें दुर्घटना करने वाले वाहन का पता नहीं चलता, उसमें मरने वाले के परिजन या घायल होने वाले को मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने यह योजना वर्ष 2000 में आरंभ की थी। पहले मुआवजे की राशि कम थी, लेकिन एक अप्रैल 2022 से इसमें इजाफा कर दिया गया। इसके तहत अगर अज्ञात वाहन की चपेट में आने से किसी की मृत्यु होती है, तो उसके परिजन को दो लाख रुपये और घायल होने वाले को पचास हजार रुपये मुआवजा दिया जाता है।
इस तरह करना होता है आवेदन
अगर किसी व्यक्ति की अज्ञात वाहन की टक्कर में मौत हो जाती है, अथवा वह घायल हो जाता है, तब उसे या उसके परिजनों को तहसील में आर्थिक मदद के लिए आवेदन करना होता है। यह आवेदन ऑनलाइन करने की सुविधा है। इसमें एफआईआर की कॉपी, मेडिकल प्रमाणपत्र अथवा पोस्टमार्टम रिपोर्ट लगानी होती है। विभिन्न स्तर पर जांच के बाद यह रकम आवेदक के खाते में चली जाती है।
अस्पतालों, पोस्टमार्टम हाउस, थानों पर लगने चाहिए पोस्टर
आमतौर पर दुर्घटना के मामलों के शिकार अस्पताल, थाने या पोस्टमार्टम हाउस पर जरूर पहुंचते हैं। वहां अगर योजना के संबंध में पोस्टर-होर्डिंग लगाई जाए तो लोगों को इसके बारे में जानकारी हो पाएगी, लेकिन कहीं भी ऐसे पोस्टर या होर्डिंग दिखाई नहीं देते।
तीन साल में हिट एंड रन के मामले
- वर्ष दर्ज मामले मौत
2021 57 32
2022 82 45
2023 38 21
कराया जा रहा प्रचार-प्रसार
हिट एंड रन में मुआवजे की योजना का लाभ आवेदन करने वालों को दिया जाता है। 2023 की शुरुआत में 21 लोगों का पैसा आया था। इनमें से 13 आवेदकों को मुआवजे की रकम मिल चुकी है। बाकी सात का चेक बनाकर उनके पास भेजा जा रहा है। योजना का प्रचार-प्रसार भी कराया जा रहा है।
-पंकज कुमार सिंह, एआरटीओ