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शहीद किसान मेले के लिए डायवर्ट रहेगा यातायात, जेहन में आज भी ताजा है घटना
Wed, 11 Dec 2019 11:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, बस्ती।
डिजिटल न्यूज डेस्क, बस्ती।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2019 11:15 AM IST
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मुंडेरवा कस्बे में स्थित किसान शहीद स्थल।
- फोटो : BASTI
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वैसे तो नई चीनी मिल चलने के बाद मुंडेरवा के शहीद किसान मेले का मुद्दा हल हो चुका है, लेकिन मिल परिसर में पूर्व के वर्षों की भांति बुधवार को शहीद किसान मेले का आयोजन किया गया है। इसमें देशभर के किसान नेताओं का जमावड़ा होता है। मंगलवार से ही किसान नेताओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि बुधवार को मुंडेरवा होकर चार पहिया वाहन नहीं गुजरेंगे। अहरा और गोदमवा तिराहे से इन वाहनों को परिवर्तित मार्ग से आगे भेजा जाएगा। बुधा, कांटे, महादेवा में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
11 दिसंबर-2002 को शुगर मिल चलाने, बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और गन्ना मूल्य वृद्धि को लेकर भाकियू के सहयोग से किसानों ने वृहद आंदोलन किया था। इस दौरान हुई गोलीबारी में जगदीशपुर मंझरिया निवासी बद्री प्रसाद चौधरी, मेहड़ापुरवा के धर्मराज चौधरी और संतकबीरनगर जिले के चंगेरा-मंगेरा गांव के तिलक राज चौधरी शहीद हो गए थे। तीनों किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए पहली बार वर्ष-2003 में उक्त तिथि पर किसान मेले का आयोजन हुआ। इसके बाद प्रत्येक वर्ष 11 दिसंबर को भाकियू किसानों को बुलाकर पंचायत करती है।
अनुमान है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के अलावा विभिन्न प्रांतों के किसान व किसान नेता पहुंचेंगे। 24 घंटे पहले ही यह नेता कार्यक्रम स्थल पर जुटने लगे हैं। यूं तो हर बार इस मेले में किसान नेता मिल संचालन को लेकर खूब गरजते रहे हैं, मगर इस बार स्थिति दूसरी है। किसान नेताओं के जमावड़े को लेकर प्रशासन कोई भी जोखिम मोल नहीं लेना चाहता है।
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सीओ रुधौली होंगे मेला इंचार्ज
सीओ रुधौली जनार्दन दूबे को मेले का प्रभारी नियुक्त किया गया है। वे मेले के दौरान निर्धारित ड्यूटी प्वाइंट पर मय दंगा नियंत्रण किट टीमों के साथ मुस्तैद रहेंगे। चार सेक्टर में पूरे परिसर को बांटकर प्रत्येक सेक्टर का एसओ/प्रभारी निरीक्षक सेक्टर इंचार्ज हैं।
किसानों के जेहन में आज भी ताजा है घटना
मुंडेरवा की नई शुगर मिल से धुआं निकलने लगा है, लेकिन किसान आंदोलन का वह दृश्य आज भी लोगों के जेहन में है जिसमें पुलिस की गोली से तीन किसान शहीद हो गए थे।
चीनी मिल मुंडेरवा मिल को घाटा दिखाकर 12 नवंबर-1999 को बंद कर दिया गया। इससे 700 अस्थाई व 250 सामायिक कर्मियों की रोजी-रोटी छिन गई। 90 फ़ीसदी कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया। 10 फीसदी न्यायालय चले गए। मिल बंद होने के तीसरे साल भारतीय किसान यूनियन ने इस मुद्दे को उठाया। आठ दिसंबर को कांटे चौराहे पर जाम लगा दिया।
तत्कालीन एएसपी श्रीकांत सिंह से तीखी झड़प हुई, लेकिन एसडीएम एसके पांण्डेय की मध्यस्था से जाम खत्म हुआ। किसानों का आंदोलन जारी रहा तो धारा 144 लागू कर दी गई। गुस्साए किसानों ने रेलमार्ग अवरुद्ध कर दिया। 10 दिसंबर को कई किसान नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसकी जानकारी पर 11 दिसंबर को भारी तादात में भाकियू के वैनर तले विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।
तत्कालीन एएसपी की कार क्षतिग्रस्त कर आग के हवाले कर दिया गया। यूपी एग्रो के गोदाम में भी आग लगा दी गई। रेलवे स्टेशन पर आगजनी व पथराव होने पर पुलिस ने फायरिंग शुरू की, जिससे मंगेरा के तिलक राज चौधरी, मेहड़ा पूर्वा के धर्मराज और जगदीशपुर मझरिया के बद्री चौधरी की मृत्यु हो गई। 15 लोग घायल हो गए। तभी से प्रतिवर्ष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है।
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11 दिसंबर-2002 को शुगर मिल चलाने, बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और गन्ना मूल्य वृद्धि को लेकर भाकियू के सहयोग से किसानों ने वृहद आंदोलन किया था। इस दौरान हुई गोलीबारी में जगदीशपुर मंझरिया निवासी बद्री प्रसाद चौधरी, मेहड़ापुरवा के धर्मराज चौधरी और संतकबीरनगर जिले के चंगेरा-मंगेरा गांव के तिलक राज चौधरी शहीद हो गए थे। तीनों किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए पहली बार वर्ष-2003 में उक्त तिथि पर किसान मेले का आयोजन हुआ। इसके बाद प्रत्येक वर्ष 11 दिसंबर को भाकियू किसानों को बुलाकर पंचायत करती है।
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अनुमान है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के अलावा विभिन्न प्रांतों के किसान व किसान नेता पहुंचेंगे। 24 घंटे पहले ही यह नेता कार्यक्रम स्थल पर जुटने लगे हैं। यूं तो हर बार इस मेले में किसान नेता मिल संचालन को लेकर खूब गरजते रहे हैं, मगर इस बार स्थिति दूसरी है। किसान नेताओं के जमावड़े को लेकर प्रशासन कोई भी जोखिम मोल नहीं लेना चाहता है।
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सीओ रुधौली होंगे मेला इंचार्ज
सीओ रुधौली जनार्दन दूबे को मेले का प्रभारी नियुक्त किया गया है। वे मेले के दौरान निर्धारित ड्यूटी प्वाइंट पर मय दंगा नियंत्रण किट टीमों के साथ मुस्तैद रहेंगे। चार सेक्टर में पूरे परिसर को बांटकर प्रत्येक सेक्टर का एसओ/प्रभारी निरीक्षक सेक्टर इंचार्ज हैं।
किसानों के जेहन में आज भी ताजा है घटना
मुंडेरवा की नई शुगर मिल से धुआं निकलने लगा है, लेकिन किसान आंदोलन का वह दृश्य आज भी लोगों के जेहन में है जिसमें पुलिस की गोली से तीन किसान शहीद हो गए थे।
चीनी मिल मुंडेरवा मिल को घाटा दिखाकर 12 नवंबर-1999 को बंद कर दिया गया। इससे 700 अस्थाई व 250 सामायिक कर्मियों की रोजी-रोटी छिन गई। 90 फ़ीसदी कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया। 10 फीसदी न्यायालय चले गए। मिल बंद होने के तीसरे साल भारतीय किसान यूनियन ने इस मुद्दे को उठाया। आठ दिसंबर को कांटे चौराहे पर जाम लगा दिया।
तत्कालीन एएसपी श्रीकांत सिंह से तीखी झड़प हुई, लेकिन एसडीएम एसके पांण्डेय की मध्यस्था से जाम खत्म हुआ। किसानों का आंदोलन जारी रहा तो धारा 144 लागू कर दी गई। गुस्साए किसानों ने रेलमार्ग अवरुद्ध कर दिया। 10 दिसंबर को कई किसान नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसकी जानकारी पर 11 दिसंबर को भारी तादात में भाकियू के वैनर तले विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।
तत्कालीन एएसपी की कार क्षतिग्रस्त कर आग के हवाले कर दिया गया। यूपी एग्रो के गोदाम में भी आग लगा दी गई। रेलवे स्टेशन पर आगजनी व पथराव होने पर पुलिस ने फायरिंग शुरू की, जिससे मंगेरा के तिलक राज चौधरी, मेहड़ा पूर्वा के धर्मराज और जगदीशपुर मझरिया के बद्री चौधरी की मृत्यु हो गई। 15 लोग घायल हो गए। तभी से प्रतिवर्ष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है।