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महुआ डाबर जन क्रांति स्थल पर रिलीज होगा पोस्टर
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महुआ डाबर जन क्रांति स्थल पर आज जारी होगा पोस्टर
नगर बाजार (बस्ती)। महुआ डाबर जन विद्रोह दिवस समारोह-2022 का पोस्टर बृहस्पतिवार को क्रांति स्थल पर रिलीज किया जाएगा। महुआ डाबर जन विद्रोह समारोह का मुख्य आयोजन 10 जून को दोपहर ढाई बजे से होगा।
आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष में महुआ डाबर की गौरवशाली विरासत की याद में इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए महुआ डाबर जन विद्रोह दिवस समारोह में क्रांति की धरती को नमन किया जाएगा। समारोह का आयोजन कर रहे शहीद शोध संस्थान के निदेशक सूर्यकांत पांडेय बताते हैं कि देश को आजादी दिलाने के लिए क्रांतिवीर पिरई खां के नेतृत्व में उनके गुरिल्ला साथियों ने लाठी-डंडे, तलवार, फरसा, भाला, किर्च आदि लेकर मनोरमा नदी पार कर रहे दमनकारी अंग्रेज अफसरों पर 10 जून, 1857 को धावा बोल दिया था। जिसमें लेफ्टिनेंट लिंडसे, लेफ्टिनेंट थामस, लेफ्टिनेंट इंगलिश, लेफ्टिनेंट रिची, लेफ्टिनेंट काकल और सार्जेंट एडवर्ड की मौके पर मारे गए।
तोपची सार्जेंट बुशर जान बचाकर भागने में सफल रहा। उसने ही घटना की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को दी। इतनी बड़ी क्रांतिकारी घटना से ब्रिटिश सरकार हिल गई थी।
क्रांतिकारियों से डरे कंपनीराज के कारिंदो ने 20 जून, 1857 को पूरे जिले में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया था। 3 जुलाई, 1857 को बस्ती कलेक्टर पेपे विलियम्स ने घुड़सवार फौजों की मदद से महुआ डाबर गांव को घेरवा लिया। घर-बार, खेती-बारी, रोजी-रोजगार सब आग के हवाले कर तहस-नहस कर दिया। महुआ डाबर का नामो निशान मिटवा कर ‘गैरचिरागी’ घोषित कर दिया। यहां पर अंग्रेजों के चंगुल में आए निवासियों के सिर कलम कर दिए गए। इनके शवों के टुकड़े-टुकड़े करके दूर ले जाकर फेंक दिया गया। इतना ही नहीं, अंग्रेज अफसरों की हत्या के अपराध में सेनानायक पिरई खां का भेद जानने के लिए गुलाम खान, गुलजार खान पठान, नेहाल खान पठान, घीसा खान पठान व बदलू खान पठान आदि क्रांतिकारियों को 18 फरवरी, 1858 सरेआम फांसी दे दी गई। समारोह में महान क्रांतिकारी राजा उदय प्रताप सिंह के वंशज लाल वीरेंद्र प्रताप नारायण सिंह, स्थानीय विधायक दूधराम, चंबल घाटी के क्रांतिकारी लेखक शाह आलम राना आदि मौजूद रहेंगे।
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नगर बाजार (बस्ती)। महुआ डाबर जन विद्रोह दिवस समारोह-2022 का पोस्टर बृहस्पतिवार को क्रांति स्थल पर रिलीज किया जाएगा। महुआ डाबर जन विद्रोह समारोह का मुख्य आयोजन 10 जून को दोपहर ढाई बजे से होगा।
आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष में महुआ डाबर की गौरवशाली विरासत की याद में इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए महुआ डाबर जन विद्रोह दिवस समारोह में क्रांति की धरती को नमन किया जाएगा। समारोह का आयोजन कर रहे शहीद शोध संस्थान के निदेशक सूर्यकांत पांडेय बताते हैं कि देश को आजादी दिलाने के लिए क्रांतिवीर पिरई खां के नेतृत्व में उनके गुरिल्ला साथियों ने लाठी-डंडे, तलवार, फरसा, भाला, किर्च आदि लेकर मनोरमा नदी पार कर रहे दमनकारी अंग्रेज अफसरों पर 10 जून, 1857 को धावा बोल दिया था। जिसमें लेफ्टिनेंट लिंडसे, लेफ्टिनेंट थामस, लेफ्टिनेंट इंगलिश, लेफ्टिनेंट रिची, लेफ्टिनेंट काकल और सार्जेंट एडवर्ड की मौके पर मारे गए।
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तोपची सार्जेंट बुशर जान बचाकर भागने में सफल रहा। उसने ही घटना की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को दी। इतनी बड़ी क्रांतिकारी घटना से ब्रिटिश सरकार हिल गई थी।
क्रांतिकारियों से डरे कंपनीराज के कारिंदो ने 20 जून, 1857 को पूरे जिले में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया था। 3 जुलाई, 1857 को बस्ती कलेक्टर पेपे विलियम्स ने घुड़सवार फौजों की मदद से महुआ डाबर गांव को घेरवा लिया। घर-बार, खेती-बारी, रोजी-रोजगार सब आग के हवाले कर तहस-नहस कर दिया। महुआ डाबर का नामो निशान मिटवा कर ‘गैरचिरागी’ घोषित कर दिया। यहां पर अंग्रेजों के चंगुल में आए निवासियों के सिर कलम कर दिए गए। इनके शवों के टुकड़े-टुकड़े करके दूर ले जाकर फेंक दिया गया। इतना ही नहीं, अंग्रेज अफसरों की हत्या के अपराध में सेनानायक पिरई खां का भेद जानने के लिए गुलाम खान, गुलजार खान पठान, नेहाल खान पठान, घीसा खान पठान व बदलू खान पठान आदि क्रांतिकारियों को 18 फरवरी, 1858 सरेआम फांसी दे दी गई। समारोह में महान क्रांतिकारी राजा उदय प्रताप सिंह के वंशज लाल वीरेंद्र प्रताप नारायण सिंह, स्थानीय विधायक दूधराम, चंबल घाटी के क्रांतिकारी लेखक शाह आलम राना आदि मौजूद रहेंगे।
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