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Basti News: नक्सलियों को कारतूस देने के आरोपियों के जमानतदारों को नोटिस
Tue, 07 Nov 2023 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 07 Nov 2023 12:55 AM IST
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न्यायालय में पेशी से लगातार गैर हाजिर रहने पर जारी किया गया आदेश
वर्ष 2010 के केस में छह आरोपियों के खिलाफ जारी है गैर जमानती वारंट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पुलिस लाइंस से नक्सलियों को प्रतिबंधित बोर का कारतूस आपूर्ति करने के बहुचर्चित केस में सोमवार को सुनवाई हुई। इसमें जारी गैर जमानती वारंट के बावजूद पुलिस छह आरोपियों कोर्ट में पेशी नहीं कर पाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश शिवचंद ने आरोपी राजेश शाही, राजेश कुमार, सुशील कुमार मिश्रा, अमर सिंह, जितेंद्र सिंह और आकाश उर्फ गुड्डू के 12 जमानतदारों को नोटिस जारी किया है। साथ ही, इनके पहले से जारी गैर जमानती वारंट की अवधि को बढ़ा दी है। अब सारा दारोमदार जमानतदाराें पर आ गया है। मानतदार या तो वारंटियों को न्यायालय में पेश करवाएं अन्यथा उनसे जमानत की राशि वसूल की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल 2010 को यूपी एसटीएफ के एसआई राज कुमार सिंह की तहरीर पर कोतवाली थाने में तत्कालीन आर्मोरर राम कृपाल सिंह सहित 10 आरोपियों पर नक्सलियों को प्रतिबंधित बोर का कारतूस आपूर्ति करने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। विवेचक तत्कालीन कोतवाल एसएन सिंह ने सात अगस्त 2010 को सभी के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। इस केस के ट्रायल के दौरान न्यायालय में दो फाइल तैयार की गई है, जिसका एक पार्ट सरकार बनाम रामकृपाल सिंह और दूसरा पार्ट सरकार बनाम राज कुमार सिंह ने नाम से न्यायालय में प्रचलित है।
सरकार बनाम राम कृपाल सिंह की फाइल में गवाही चल रही है। इस मामले में न्यायालय ने विवेचक एसएन सिंह को आठ नवंबर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। सरकार बनाम राज कुमार सिंह नाम से चल रही दूसरी फाइल में शामिल राजेश शाही, राजेश कुमार, सुशील कुमार मिश्रा, अमर सिंह, जितेंद्र सिंह और आकाश उर्फ गुड्डू का नाम शामिल है।
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दंतेवाड़ा में 74 जवान हुए थे शहीद
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के जिस हमले में सीआरपीएफ के 74 जवान शहीद हुए थे, उस हमले के लिए कारतूस बस्ती सहित कई पुलिस लाइंस के शस्त्रागार से चोरी करके भेजी गई थी। जांच में मौके से प्रतिबंधित बोर के कारतूस के खोखे मिलने के बाद यूपी एसटीएफ ने प्रयागराज के रिटायर्ड दरोगा यशोदानंदन को गिरफ़्तार किया था। उसके पास मिली डायरी में कई जिलों के पुलिस लाइंस और पीएसी बटालियन में तैनात आर्मोरर के जरिये कारतूस आपूर्ति का लेखाजोखा दर्ज किया गया था। इसके बाद एसटीएफ ने 29 और 30 अप्रैल 2010 काे ताबड़तोड़ छापा मारकर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिसमें बस्ती में तैनात आर्मोरर रामकृपाल सिंह भी शामिल था। बाद में इससे जुड़े अन्य नौ आरोपियों का नाम प्रकाश में आया था।
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सभी अभियुक्तों की हो चुकी है सजा
- जिन अभियुक्तों का नाम यहां न्यायालय में वांछित चल रहा है, उन सभी को 14 अक्तूबर को रामपुर न्यायालय से सजा हो चुकी है। वह सभी जेल भेजे जा चुके हैं। सहायक शासकीय अधिवक्ता राघवेश प्रसाद पांडेय ने बताया कि जब तक पुलिस इस बात की रिपोर्ट नहीं भेजती कि वे सभी जेल भेजे जा चुके हैं, तब तक न्यायालय संज्ञान नहीं लेगा। पुलिस को गैर जमानती वारंट पर रिपोर्ट भेज देनी चाहिए कि वे सभी सजा होने के कारण जेल भेजे जा चुके हैं।
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कल तलब हैं तत्कालीन कोतवाल
इस केस में सरकार बनाम राम कृपाल सिंह नाम से चल रही दूसरी फाइल में गवाही चल रही है। इसमें न्यायालय ने केस के विवेचक एसएन सिंह तत्कालीन कोतवाल को आठ नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए आदेश जारी किया है। 25 अक्तूबर को भी उन्हें पेश होने का नोटिस दिया गया था, मगर वह कतिपय कारणों से उपस्थित नहीं हुए थे। ऐसे में आठ नवंबर को उन्हें बुलाया गया है।
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वर्ष 2010 के केस में छह आरोपियों के खिलाफ जारी है गैर जमानती वारंट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पुलिस लाइंस से नक्सलियों को प्रतिबंधित बोर का कारतूस आपूर्ति करने के बहुचर्चित केस में सोमवार को सुनवाई हुई। इसमें जारी गैर जमानती वारंट के बावजूद पुलिस छह आरोपियों कोर्ट में पेशी नहीं कर पाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश शिवचंद ने आरोपी राजेश शाही, राजेश कुमार, सुशील कुमार मिश्रा, अमर सिंह, जितेंद्र सिंह और आकाश उर्फ गुड्डू के 12 जमानतदारों को नोटिस जारी किया है। साथ ही, इनके पहले से जारी गैर जमानती वारंट की अवधि को बढ़ा दी है। अब सारा दारोमदार जमानतदाराें पर आ गया है। मानतदार या तो वारंटियों को न्यायालय में पेश करवाएं अन्यथा उनसे जमानत की राशि वसूल की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल 2010 को यूपी एसटीएफ के एसआई राज कुमार सिंह की तहरीर पर कोतवाली थाने में तत्कालीन आर्मोरर राम कृपाल सिंह सहित 10 आरोपियों पर नक्सलियों को प्रतिबंधित बोर का कारतूस आपूर्ति करने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। विवेचक तत्कालीन कोतवाल एसएन सिंह ने सात अगस्त 2010 को सभी के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। इस केस के ट्रायल के दौरान न्यायालय में दो फाइल तैयार की गई है, जिसका एक पार्ट सरकार बनाम रामकृपाल सिंह और दूसरा पार्ट सरकार बनाम राज कुमार सिंह ने नाम से न्यायालय में प्रचलित है।
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सरकार बनाम राम कृपाल सिंह की फाइल में गवाही चल रही है। इस मामले में न्यायालय ने विवेचक एसएन सिंह को आठ नवंबर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। सरकार बनाम राज कुमार सिंह नाम से चल रही दूसरी फाइल में शामिल राजेश शाही, राजेश कुमार, सुशील कुमार मिश्रा, अमर सिंह, जितेंद्र सिंह और आकाश उर्फ गुड्डू का नाम शामिल है।
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दंतेवाड़ा में 74 जवान हुए थे शहीद
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के जिस हमले में सीआरपीएफ के 74 जवान शहीद हुए थे, उस हमले के लिए कारतूस बस्ती सहित कई पुलिस लाइंस के शस्त्रागार से चोरी करके भेजी गई थी। जांच में मौके से प्रतिबंधित बोर के कारतूस के खोखे मिलने के बाद यूपी एसटीएफ ने प्रयागराज के रिटायर्ड दरोगा यशोदानंदन को गिरफ़्तार किया था। उसके पास मिली डायरी में कई जिलों के पुलिस लाइंस और पीएसी बटालियन में तैनात आर्मोरर के जरिये कारतूस आपूर्ति का लेखाजोखा दर्ज किया गया था। इसके बाद एसटीएफ ने 29 और 30 अप्रैल 2010 काे ताबड़तोड़ छापा मारकर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिसमें बस्ती में तैनात आर्मोरर रामकृपाल सिंह भी शामिल था। बाद में इससे जुड़े अन्य नौ आरोपियों का नाम प्रकाश में आया था।
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सभी अभियुक्तों की हो चुकी है सजा
- जिन अभियुक्तों का नाम यहां न्यायालय में वांछित चल रहा है, उन सभी को 14 अक्तूबर को रामपुर न्यायालय से सजा हो चुकी है। वह सभी जेल भेजे जा चुके हैं। सहायक शासकीय अधिवक्ता राघवेश प्रसाद पांडेय ने बताया कि जब तक पुलिस इस बात की रिपोर्ट नहीं भेजती कि वे सभी जेल भेजे जा चुके हैं, तब तक न्यायालय संज्ञान नहीं लेगा। पुलिस को गैर जमानती वारंट पर रिपोर्ट भेज देनी चाहिए कि वे सभी सजा होने के कारण जेल भेजे जा चुके हैं।
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कल तलब हैं तत्कालीन कोतवाल
इस केस में सरकार बनाम राम कृपाल सिंह नाम से चल रही दूसरी फाइल में गवाही चल रही है। इसमें न्यायालय ने केस के विवेचक एसएन सिंह तत्कालीन कोतवाल को आठ नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए आदेश जारी किया है। 25 अक्तूबर को भी उन्हें पेश होने का नोटिस दिया गया था, मगर वह कतिपय कारणों से उपस्थित नहीं हुए थे। ऐसे में आठ नवंबर को उन्हें बुलाया गया है।