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Basti News: गुमनामी की कगार पर पहुंची वशिष्ठ मुनि की तपोस्थली
Mon, 26 Feb 2024 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 26 Feb 2024 12:37 AM IST
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त्रेता युग में इसी स्थान पर प्रभु श्रीराम और उनके तीनों भाइयों ने पाई शिक्षा।
यहां गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम को 64 दिन में दी थी 64 योगिनी की शिक्षा
वीरान पड़ी मंदिर परिसर की 15 एकड़ जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बनकटी ब्लॉक के बरंडा में गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली में प्रभु श्रीराम ने 64 दिन में 64 योगिनी की शिक्षा ग्रहण की थी। इस तपोस्थली पर बना पौराणिक मंदिर अब अस्तित्व खोने की कगार पर है। मंदिर के नाम पर आवंटित करीब 15 एकड़ जमीन के अधिकतर हिस्सा में लोगों ने कब्जा कर लिया है। बाकी हिस्सा जंगली पतवारों के कारण वीरान पड़ा है। यहां पुनरुद्धार की कोई किरण नहीं दिखाई दे रही है।
जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर स्थित बनकटी ब्लाॅक के बरंडा गांव में त्रेता युग का यह मंदिर अब लोग भूलने लगे हैं। यहां भगवान श्रीराम व उनके भाइयों ने गुरु वशिष्ठ से शिक्षा ग्रहण की थी। गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली के रूप में पहचाने जाने वाले बरंडा के इस मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण व हनुमान समेत उनके कुल गुरु वशिष्ठ की प्रतिमाएं भी पहचान खो रही हैं।
यहां के मुख्य महंत मधुवन दास व पुजारी मंगलदास ने कहा कि जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर को आक्रांत ध्वस्त कर रहे थे, तब उस समय साधु-संतोें ने इस मंदिर का नाम ही नहीं लिया। क्योंकि त्रेतायुगीन इस मंदिर को सुरक्षित किया जाना जरूरी थी। यहां माह में दो बार भंडारा भी होता है। मगर, इसके जीर्णोद्धार को लेकर अब तक कोई पहल नहीं हुई।
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उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन काल में सिर्फ 64 दिन ही शिक्षा ग्रहण की। बाकी जीवन उन्होंने वन में व संघर्षों में बिताया। ऐसे में उनके शिक्षा स्थान को भी उचित सम्मान मिलना चाहिए। शासन व प्रशासन की उदासीनता पर यह लोग आहत हैं। उनका कहना है कि जहां प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या व मख भूमि मखौड़ा विकास के पहले पायदान पर है, वहीं गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली उपेक्षित हो रही है। ऐसे में इस पौराणिक स्थल का विकास किया जाना बेहद आवश्यक है।
...
कोट
राजस्व कर्मियों को तहसील क्षेत्र के बरंडा स्थित मंदिर की वस्तुस्थिति जानने के लिए भेजा जाएगा। यथासंभव विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
-शत्रुधन पाठक, एसडीएम सदर
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वीरान पड़ी मंदिर परिसर की 15 एकड़ जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बनकटी ब्लॉक के बरंडा में गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली में प्रभु श्रीराम ने 64 दिन में 64 योगिनी की शिक्षा ग्रहण की थी। इस तपोस्थली पर बना पौराणिक मंदिर अब अस्तित्व खोने की कगार पर है। मंदिर के नाम पर आवंटित करीब 15 एकड़ जमीन के अधिकतर हिस्सा में लोगों ने कब्जा कर लिया है। बाकी हिस्सा जंगली पतवारों के कारण वीरान पड़ा है। यहां पुनरुद्धार की कोई किरण नहीं दिखाई दे रही है।
जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर स्थित बनकटी ब्लाॅक के बरंडा गांव में त्रेता युग का यह मंदिर अब लोग भूलने लगे हैं। यहां भगवान श्रीराम व उनके भाइयों ने गुरु वशिष्ठ से शिक्षा ग्रहण की थी। गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली के रूप में पहचाने जाने वाले बरंडा के इस मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण व हनुमान समेत उनके कुल गुरु वशिष्ठ की प्रतिमाएं भी पहचान खो रही हैं।
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यहां के मुख्य महंत मधुवन दास व पुजारी मंगलदास ने कहा कि जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर को आक्रांत ध्वस्त कर रहे थे, तब उस समय साधु-संतोें ने इस मंदिर का नाम ही नहीं लिया। क्योंकि त्रेतायुगीन इस मंदिर को सुरक्षित किया जाना जरूरी थी। यहां माह में दो बार भंडारा भी होता है। मगर, इसके जीर्णोद्धार को लेकर अब तक कोई पहल नहीं हुई।
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उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन काल में सिर्फ 64 दिन ही शिक्षा ग्रहण की। बाकी जीवन उन्होंने वन में व संघर्षों में बिताया। ऐसे में उनके शिक्षा स्थान को भी उचित सम्मान मिलना चाहिए। शासन व प्रशासन की उदासीनता पर यह लोग आहत हैं। उनका कहना है कि जहां प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या व मख भूमि मखौड़ा विकास के पहले पायदान पर है, वहीं गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली उपेक्षित हो रही है। ऐसे में इस पौराणिक स्थल का विकास किया जाना बेहद आवश्यक है।
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कोट
राजस्व कर्मियों को तहसील क्षेत्र के बरंडा स्थित मंदिर की वस्तुस्थिति जानने के लिए भेजा जाएगा। यथासंभव विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
-शत्रुधन पाठक, एसडीएम सदर