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Basti News: शहरी निकाय का नहीं बढ़ सका दायरा, 25 वार्डों में ही सिमटी नगर पालिका

Tue, 12 Sep 2023 02:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 12 Sep 2023 02:18 AM IST
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The scope of urban body could not increase
बस्ती। तस्वीर बदल चुकी है। जनपद को मंडल का दर्जा मिले ढाई दशक से अधिक हो गए। विनियमित क्षेत्र भी परिवर्तित होकर विकास प्राधिकरण में तब्दील हो गया है। प्राधिकरण के मानचित्र में शहरी क्षेत्रफल तीन गुना बढ़कर 51.5 वर्ग किलोमीटर में चुका है। मगर दायरा नहीं बढ़ा तो यहां की सबसे पुरानी 71 वर्ष आयु की निकाय इकाई नगर पालिका परिषद की। 25 वार्ड वाले इस निकाय की सीमा महज 19.4 वर्ग किलोमीटर में ही सिमट कर रह गया है।
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वर्ष 1952 की गठित जिले की जिले की इकलौती और सबसे पुरानी नगर पालिका विकास की दौड़ में पीछे छूट गई है। सीमा विस्तार के लिए कई बार कवायद छिड़ी लेकिन, हर बार मुंह की ही खानी पड़ी। शहरी क्षेत्र का भौगोलिक दायरा तेजी से बढ़कर तीन गुना हो गया। नगर पालिका को अभी भी अपने विस्तार का इंतजार है। वर्ष 2020 में इसके विस्तारीकरण की पहल हुई। नए सिरे से परिसीमन कराया गया।
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नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों के अलावा आसपास के कुल 69 गांव शामिल किए गए। सूची का प्रकाशन कर आपत्तियां सुझाव भी मांगे गए। विस्तारीकरण के लिए अंतिम रूप पत्रावली तैयार कर शासन को वर्ष 2021 में प्रेषित की गई। उम्मीद जगी कि इसके बाद 2024 का निकाय चुनाव नए परिसीमन के हिसाब से होगा और नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा मिलेगा। लेकिन, कुछ ही दिनों के बाद शासन स्तर पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नतीजा निकाय चुनाव पूर्व की तरह पुराने परिसीमन पर ही कराया गया। इधर पालिका के विस्तार की अब कोई सुगबुगाहट भी नहीं है।
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नए परिसीमन में चौतरफा शामिल हुए थे गांव
नगर पालिका के नए परिसीमन में शहर के चारों तरफ के गांव शामिल किए गए थे। उत्तर दिशा में मनौरी, चैनपुरवा, पूरब दिशा में पचौरा बायपोखर, पश्चिम में गनेशपुर नगर पंचायत के सीमा प्रारंभ तक और दक्षिण में रानीपुर तथा सोनूपार तक के 69 गांव चयनित हुए थे। यदि नए परिसीमन के अनुसार सीमा क्षेत्र में वृद्धि हुई होती तो यह निकाय नगर निगम के रूप में 10 किलोमीटर की परिधि में विस्तार ले लेता। मगर यह संभव नहीं हो सका।
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तस्वीर बदलने के साथ शहर से सट गए ये गांव
शहर का विस्तार नगर पालिका क्षेत्र से कहीं आगे हो चुका है। सेंटबेसिल स्कूल, खीरीघाट भटोलवा, मड़वानगर, संतपुर गदहाखोर, मिश्रौलिया, डिड़ौहा, बरगदवा, हरदिया, हवेलिया खास, बड़ार, मूड़घाट, भूअर निरंजनपुर, बेलगड़ी, मुंडेरवा, विशुनपुरवा, चननी, जिगिना, गिदही, सोनबरसा, जामडीह, लबनापार, नाऊडाड़ बड़ेरिया, अमौली, महुड़र, मरवटिया, बरवा, लखनऊरा आदि गांव शहरी क्षेत्र के अहम हिस्सा बन गए हैं। इन गांवों में कंकरीट की नई काॅलोनियों बड़ी स्तर पर बन रही रही है। बावजूद इसके पालिका की सीमा में यह शामिल नहीं हो सके।
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विकास परियोजनाओं से भी बढ़ा शहर का दायरा
शहर के बाहर महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी होने से भी शहरी क्षेत्र का दायरा बढ़ गया है। मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर रामपुर रेवली में महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज की स्थापना तीन साल पहले वर्ष 2020 में हुई। यहां से तीन किलोमीटर पहले ओपेक चिकित्सालय कैली की स्थापना ढाई दशक पहले हो चुकी है। इसके अलावा छबिलहा खोर में राजकीय पॉलिटेक्निक, संभागीय परिवहन कार्यालय, कांशीराम आवास की स्थापना एक दशक पहले हो चुकी है। यह क्षेत्र सोनूपार तक शहर से सट गया है। पूरब बस्ती-मुंडेरवा मार्ग पर जिगिना, करनपुर में दो प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान, इसके आगे प्लास्टिक कांपलेक्स में औद्योगिक इकाइयां, डायट आदि संस्थान भी है। दक्षिण में लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, टू-लेन लुंबिनी-दुद्धी मार्ग होने से भी लगभग आठ किलोमीटर का क्षेत्र विकसित हो चुका है। शहरी गतिविधियां होने के बाद भी यह सब क्षेत्र नगर पालिका की सीमा से बाहर है।
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सीमा क्षेत्र में विस्तार से पालिका की बढ़ेगी नौ गुना आमदनी
नगर पालिका के सीमा क्षेत्र का विस्तार होने के बाद इसकी आमदनी में नौ गुना की वृद्धि होने का अनुमान है। नए परिसीमन के मुताबिक जिन 69 गांवों को शामिल किया गया है उनसे जलकर, गृहकर के रूप में सालाना 10 करोड़ रुपये के आय होने की उम्मीद है। वर्तमान नगर पालिका की यह आय एक करोड़ रुपये सालाना है।
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सीमांकन के मामले में बीडीए बहुत आगे
बीडीए प्रभावी हुए अभी पांच साल भी नहीं हुए कि सीमांकन के क्षेत्र में वह नगर पालिका से कहीं आगे निकल गया। शुरू में नगर पालिका समेत आसपास के 69 गांवों के लिए महायोजना 2021 तैयार की गई थी। वहीं महायोजना 2031 के नए मास्टर प्लान में सीमा क्षेत्र बढ़ाकर 217 गांव शामिल कर लिए गए हैं। इसका कुल क्षेत्रफल 151 वर्ग किलोमीटर है।
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भारत चांद पर पहुंच गया। बस्ती जिले से कटकर सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर जिला बन गया। बस्ती को मंडल मुख्यालय का दर्जा मिल गया है। इसे नगर निगम बनाया जाना समय की मांग है।
-विनोद शुक्ला, शिवाकाॅलोनी
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अब भौगोलिक स्थिति बदल चुकी है। हमारे गांव पास ओपेक कैली, मेडिकल कॉलेज समेत आधा दर्जन बड़ी संस्थाएं हैं। बीडीए भी प्रभावी है। ऐसे में नगर निगम या नगर पालिका में भी यह हिस्सा शामिल होना चाहिए। -मिथिलेश श्रीवास्तव, जखनी।
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शहर का दायरा बढ़ चुका है। पहले जैसी स्थिति नहीं रही। नगर पालिका छोटी लगने लगी है। इसे नगर निगम का दर्जा मिलना चाहिए। तभी आसपास के क्षेत्रों में बनी काॅलोनियों का समुचित विकास संभव हो सकेगा।
-प्रवीण कुमार पांडेय, हवेलिया खास।
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शहर के आसपास के क्षेत्र में सबकुछ शहर जैसा ही है। जमीन का सर्किल रेट भी शहर के हिसाब से लग रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में नगर पालिका सीमा का विस्तार होना चाहिए।

-अरविंद चौधरी, न्यू मड़वानगर, काॅलोनी
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विकास की दृष्टि से नगर पालिका क्षेत्र विस्तारीकरण बेहद जरूरी है। इससे नगर पालिका दायरा बढ़ेगा, आमदनी बढ़ेगी और ग्रांट भी बढ़ेगा। शासन स्तर पर इसकी पैरवी की जाएगी। यदि कोई त्रुटि होगी तो उसे भी ठीक कराई जाएगी।
-नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, बस्ती
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