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Basti News: उफनाई सरयू ने माझा में मचाई तबाही, संपर्क मार्गों पर पानी
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दुबौलिया के सुविका बाबू गांव में पानी के बीच आते-जाते स्कूली बच्चे संवाद
बस्ती। सरयू नदी के उफान से जिले में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। सोमवार को नदी का जलस्तर सात सेंटीमीटर बढ़कर खतरे के निशान से 32 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। इससे दुबौलिया और विक्रमजोत क्षेत्र के कई गांवों में पानी पहुंच गया है। संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन प्रभावित है। तटबंधों और स्परों पर नदी का दबाव बढ़ने से कटान का खतरा भी मंडरा रहा है।
शाम पांच बजे केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार सरयू का जलस्तर 93.05 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। जलस्तर बढ़ने से दुबौलिया क्षेत्र के सुविका बाबू और टेढ़वा गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। दोनों गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। ग्रामीण दैनिक जरूरतों के लिए मोटर बोट का सहारा ले रहे हैं। खेत जलमग्न होने से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।
सतहा, बलुईया, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती, श्रीराम पुरवा, भुवरिया और बरदिया लोहार समेत कई गांवों की ओर बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। दो धाराओं के बीच बसे देवरा गंगबरार और कुर्मियाना क्षेत्र में भी खतरा बढ़ गया है। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में नदी का दबाव बना हुआ है।
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तटबंध और स्परों पर बढ़ा दबाव
विक्रमजोत क्षेत्र में अर्जुनपुर, पकड़ी संग्राम, खेमराजपुर, लकड़ी दूबे, लकड़ी पांडेय, शंभूपुर, कल्याणपुर और भरथापुर समेत कई गांवों में खेतों और आबादी के आसपास पानी भरा है। जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद तटबंधों और स्परों पर भी दबाव बढ़ गया है। घघौवा बाढ़ चौकी पर तैनात जेई गौरव सिंह ने बताया कि लोलपुर-विक्रमजोत तटबंध के चार स्परों पर नदी का दबाव अधिक है। नवनिर्मित डैंपनरों और दो क्षतिग्रस्त नोज की मरम्मत भी कराई जानी है। वर्ष 2019 में घघौवा से आगे तटबंधों का निर्माण होने के बाद बाहर बसे कई गांवों को बाढ़ से राहत मिली है। हालांकि तटबंध के अंदर बसे करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीण हर वर्ष बाढ़ की समस्या झेलते हैं।
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फसलें डूबीं, कई परिवारों की बढ़ी चिंता
पूरे चेतन ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान राजवंत दूबे ने बताया कि गांव में पानी भरने से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की गई है, लेकिन तटबंध के बाहर नदी किनारे खेतों में पानी भरने से प्रभावित ग्रामीणों को अभी राहत नहीं मिली है। नायब तहसीलदार आनंद यादव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लेखपालों के माध्यम से लगातार निगरानी कराई जा रही है। जलस्तर और प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित गांवों का किया निरीक्षण
एसडीएम हर्रैया उमाकांत तिवारी ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित सुविका बाबू और टेढ़वा गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए और तटबंध की स्थिति भी देखी। बाढ़ खंड के अधिकारियों को निगरानी में किसी तरह की कमी न रखने तथा कटान वाले स्थलों पर बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए।
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शाम पांच बजे केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार सरयू का जलस्तर 93.05 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। जलस्तर बढ़ने से दुबौलिया क्षेत्र के सुविका बाबू और टेढ़वा गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। दोनों गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। ग्रामीण दैनिक जरूरतों के लिए मोटर बोट का सहारा ले रहे हैं। खेत जलमग्न होने से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।
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सतहा, बलुईया, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती, श्रीराम पुरवा, भुवरिया और बरदिया लोहार समेत कई गांवों की ओर बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। दो धाराओं के बीच बसे देवरा गंगबरार और कुर्मियाना क्षेत्र में भी खतरा बढ़ गया है। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में नदी का दबाव बना हुआ है।
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तटबंध और स्परों पर बढ़ा दबाव
विक्रमजोत क्षेत्र में अर्जुनपुर, पकड़ी संग्राम, खेमराजपुर, लकड़ी दूबे, लकड़ी पांडेय, शंभूपुर, कल्याणपुर और भरथापुर समेत कई गांवों में खेतों और आबादी के आसपास पानी भरा है। जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद तटबंधों और स्परों पर भी दबाव बढ़ गया है। घघौवा बाढ़ चौकी पर तैनात जेई गौरव सिंह ने बताया कि लोलपुर-विक्रमजोत तटबंध के चार स्परों पर नदी का दबाव अधिक है। नवनिर्मित डैंपनरों और दो क्षतिग्रस्त नोज की मरम्मत भी कराई जानी है। वर्ष 2019 में घघौवा से आगे तटबंधों का निर्माण होने के बाद बाहर बसे कई गांवों को बाढ़ से राहत मिली है। हालांकि तटबंध के अंदर बसे करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीण हर वर्ष बाढ़ की समस्या झेलते हैं।
फसलें डूबीं, कई परिवारों की बढ़ी चिंता
पूरे चेतन ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान राजवंत दूबे ने बताया कि गांव में पानी भरने से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की गई है, लेकिन तटबंध के बाहर नदी किनारे खेतों में पानी भरने से प्रभावित ग्रामीणों को अभी राहत नहीं मिली है। नायब तहसीलदार आनंद यादव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लेखपालों के माध्यम से लगातार निगरानी कराई जा रही है। जलस्तर और प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित गांवों का किया निरीक्षण
एसडीएम हर्रैया उमाकांत तिवारी ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित सुविका बाबू और टेढ़वा गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए और तटबंध की स्थिति भी देखी। बाढ़ खंड के अधिकारियों को निगरानी में किसी तरह की कमी न रखने तथा कटान वाले स्थलों पर बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए।