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Basti News: नगर पालिका कंगाल, इसलिए शहर बदहाल
Mon, 02 Oct 2023 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 02 Oct 2023 01:01 AM IST
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- पांचवें राज्य वित्त आयोग में मिला महज 1.98 करोड़ रुपये
- 2.15 करोड़ रुपये प्रति माह केवल तनख्वाह और पेंशन का खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। नगर पालिका खजाना हर माह खाली हो जा रहा है। शासन से पांचवें राज्य वित्त आयोग के मद में मिलने वाला धन कर्मचारियों के तनख्वाह और पेंशन भर का ही नहीं है। यह कमी बोर्ड फंड से पूरी की जा रही है। प्रतिमाह 35 लाख रुपये ऋण के किस्त का भार अलग से झेलना पड़ रहा है। कुल मिलाकर नगर पालिका हर माह घाटे में जा रही है। सड़क, नाली, पानी एवं सफाई जैसे कार्य धनाभाव में लगभग ठप है।
जानकारी के अनुसार, सितंबर माह के अंत में नगर पालिका को शासन से एक करोड़ 98 लाख 21 हजार रुपये मिले हैं। यह रकम ऊंट के मुंह में जीरा साबित करने जैसा है। क्योंकि पालिका के खर्च इससे कहीं ज्यादा है। केवल कर्मचारियों और पेंशनराें के प्रतिमाह देयक का खर्च 2.15 लाख रुपये है। इसके अलावा प्रतिमाह कूड़ा वाहनों के लिए डीजल खर्च दस लाख रुपये और ऋण अदायगी का 35 लाख रुपये प्रतिमाह अलग से भार है। ऋण अदायगी का किस्त प्रत्येक माह पांचवें राज्य वित्त आयोग के खाते से अपने आप कटौती हो जाती है।
शेष धनराशि में विकास कार्य और तनख्वाह, पेंशन का भुगतान देना होता है। पालिका हर माह राज्य वित्त आयोग के मद में प्राप्त धन से अपना खर्च पूरा करने की उधेड़बुन में रह जाती है। बावजूद इसके खर्च की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। अगस्त महीने में एक करोड़ 47 लाख रुपये का आवंटन हुआ था। इसमें बोर्ड फंड से कुछ धनराशि मिलाकर कर्मचारियों के तनख्वाह और पेंशन की व्यवस्था बन पाई। ऋण किस्त की कटौती भी हुई। इसके बाद पालिका का हाथ खाली हो गया। इस महीने फिर वही स्थिति सामने आ रही है। दो साल से पालिका इसी ढर्रे पर विकास की गाड़ी घसीट रही है। निर्माण कार्य लगभग ठप है। धनाभाव में सफाई कार्य भी बाधित होने लगे हैं।
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60 लाख रुपये डीजल का भी बकाया
शहर के सफाई कार्य में लगाए गए वाहनों को ईंधन की जरूरत रोज पड़ रही है। पालिका के पास तत्काल भुगतान कर डीजल खरीदने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए उधार डीजल खरीदा जा रहा है। यदाकदा थोड़ा बहुत भुगतान किया जा रहा है। वर्तमान में 60 लाख रुपये डीजल का बकाया है।
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शहर में कूड़ा वाहनों की कमी
नगर पालिका के पास कूड़ा वाहनों की कमी है। 25 वार्डों की गलियों और मुहल्लों में कूड़ा ढोने के लिए 17 मैजिक और 10 पुराने टेंपो हैं। इसमें से आधा दर्जन वाहन कबाड़ होने के कगार पर हैं तो कुछ हो चुके हैं। जबकि वार्डों का विस्तार हो जाने से प्रति वार्ड दो कूड़ा ढोने वाले छोटे की वाहन की जरूरत है। तीन साल से नगर पालिका एक भी नए वाहन की खरीदारी नहीं कर सकी है। इससे वार्डों में कई-कई दिनों तक कूड़े का ढेर लगा रहता है। इसके अलावा तीन ट्रक, तीन जेसीबी, एक डंफर और 6 ट्रैक्टर-ट्राॅली हैं। मगर यह भी नाकाफी हैं।
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प्रमुख सड़कों को लावारिस हालत में छोड़ दी पालिका ने
नगर पालिका ने धनाभाव के चलते शहर की प्रमुख सड़कों को लावारिस हालत में छोड़ दी है। चार माह पहले यहां की नौ सड़कों को चिह्नित कर पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित करने की पहल हुई। मगर, पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से इसकी स्वीकृति अब तक नहीं मिल पाई है। वहीं, लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण सभी सड़कों की दशा दयनीय हो गई है। मालवीय मार्ग पर गड्ढे अधिक होने से छोटे-बड़े सभी वाहन हिचकोले खाकर चल रहे हैं। मुख्य सड़कों के किनारे फुटपाथ और डिवाइडर की सुरक्षा भी खतरे में हैं। कमोवेश यही हाल सिविल लाइन रोड, रोडवेज-दक्षिण दरवाजा मार्ग, पांडेय बाजार-बांसी मार्ग और बरदहिया मार्ग का भी है। इन सड़कों की मरम्मत के लिए नगर पालिका के पास फूटी कौड़ी नहीं है।
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सड़क, नाली की समस्या से जूझ रहे वार्ड
वार्डों की सूरत बिगड़ गई है। इंटरलॉकिंग सड़कों के ईंट तक उखड़कर तितर-बितर हो गए हैं। नालियां चोक कर गई हैं। कई जगहों पर पानी सड़क पर बह रहा है। पिकौरा दत्तूराय ब्राह्मण महासभा के पीछे मुख्य सड़क पर ही पानी दो साल से भरा हुआ है। गोड़िया मुहल्ले की मुख्य सड़क चलने लायक नहीं है। मुरलीजोत आंशिक मुहल्ले में दक्षिण दरवाजा से गिधई की ओर जाने वाली सड़क पर आसानी से नहीं चला जा सकता है। सड़क टूट गई है, ऊपर से जलभराव और गंदगी भी है। यहां लोग मुंह पर रूमाल रखकर चल रहे हैं। यह तो बानगी मात्र है। शहर के नरहरिया, बैरियहवा, आवास विकास उत्तरी, सब्जी मंडी, माली टोला, तुरकहिया आदि वार्डों में भी दुश्वारियों का अंबार है।
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बिगड़ती जा रही पार्कों की दशा
शहर में बनाए पार्कों का भी खेवनहार कोई नहीं रह गया है। कुछ हद कटेश्वर पार्क ठीक है, मगर रखरखाव के अभाव में यह भी बदरंग हो चला है। अमहट घाट के पास विकसित किया जा रहा पार्क मझधार में ही ठप हो गया। यहां चहारदीवारी निर्माण के बाद कोई कार्य नहीं हो सका जिससे मन बहलाने के लिए शहरवासी इस जगह का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा आवास विकास, शिवा काॅलोनी में बनाए गए पार्क का भी देखरेख नहीं हो पा रहा है।
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कोट
पांचवें वित्त आयोग में प्रतिमाह मिलने वाला बजट वेतन, पेंशन के लिहाज से भी कम हैं। बोर्ड फंड का भी काफी धन आवश्यकताओं की पूर्ति में खर्च हो रहा है। परिषद के पास विकास कार्यों के लिए चार करोड़ उपलब्ध हैं जिसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ , नगर पालिका परिषद
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- 2.15 करोड़ रुपये प्रति माह केवल तनख्वाह और पेंशन का खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। नगर पालिका खजाना हर माह खाली हो जा रहा है। शासन से पांचवें राज्य वित्त आयोग के मद में मिलने वाला धन कर्मचारियों के तनख्वाह और पेंशन भर का ही नहीं है। यह कमी बोर्ड फंड से पूरी की जा रही है। प्रतिमाह 35 लाख रुपये ऋण के किस्त का भार अलग से झेलना पड़ रहा है। कुल मिलाकर नगर पालिका हर माह घाटे में जा रही है। सड़क, नाली, पानी एवं सफाई जैसे कार्य धनाभाव में लगभग ठप है।
जानकारी के अनुसार, सितंबर माह के अंत में नगर पालिका को शासन से एक करोड़ 98 लाख 21 हजार रुपये मिले हैं। यह रकम ऊंट के मुंह में जीरा साबित करने जैसा है। क्योंकि पालिका के खर्च इससे कहीं ज्यादा है। केवल कर्मचारियों और पेंशनराें के प्रतिमाह देयक का खर्च 2.15 लाख रुपये है। इसके अलावा प्रतिमाह कूड़ा वाहनों के लिए डीजल खर्च दस लाख रुपये और ऋण अदायगी का 35 लाख रुपये प्रतिमाह अलग से भार है। ऋण अदायगी का किस्त प्रत्येक माह पांचवें राज्य वित्त आयोग के खाते से अपने आप कटौती हो जाती है।
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शेष धनराशि में विकास कार्य और तनख्वाह, पेंशन का भुगतान देना होता है। पालिका हर माह राज्य वित्त आयोग के मद में प्राप्त धन से अपना खर्च पूरा करने की उधेड़बुन में रह जाती है। बावजूद इसके खर्च की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। अगस्त महीने में एक करोड़ 47 लाख रुपये का आवंटन हुआ था। इसमें बोर्ड फंड से कुछ धनराशि मिलाकर कर्मचारियों के तनख्वाह और पेंशन की व्यवस्था बन पाई। ऋण किस्त की कटौती भी हुई। इसके बाद पालिका का हाथ खाली हो गया। इस महीने फिर वही स्थिति सामने आ रही है। दो साल से पालिका इसी ढर्रे पर विकास की गाड़ी घसीट रही है। निर्माण कार्य लगभग ठप है। धनाभाव में सफाई कार्य भी बाधित होने लगे हैं।
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60 लाख रुपये डीजल का भी बकाया
शहर के सफाई कार्य में लगाए गए वाहनों को ईंधन की जरूरत रोज पड़ रही है। पालिका के पास तत्काल भुगतान कर डीजल खरीदने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए उधार डीजल खरीदा जा रहा है। यदाकदा थोड़ा बहुत भुगतान किया जा रहा है। वर्तमान में 60 लाख रुपये डीजल का बकाया है।
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शहर में कूड़ा वाहनों की कमी
नगर पालिका के पास कूड़ा वाहनों की कमी है। 25 वार्डों की गलियों और मुहल्लों में कूड़ा ढोने के लिए 17 मैजिक और 10 पुराने टेंपो हैं। इसमें से आधा दर्जन वाहन कबाड़ होने के कगार पर हैं तो कुछ हो चुके हैं। जबकि वार्डों का विस्तार हो जाने से प्रति वार्ड दो कूड़ा ढोने वाले छोटे की वाहन की जरूरत है। तीन साल से नगर पालिका एक भी नए वाहन की खरीदारी नहीं कर सकी है। इससे वार्डों में कई-कई दिनों तक कूड़े का ढेर लगा रहता है। इसके अलावा तीन ट्रक, तीन जेसीबी, एक डंफर और 6 ट्रैक्टर-ट्राॅली हैं। मगर यह भी नाकाफी हैं।
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प्रमुख सड़कों को लावारिस हालत में छोड़ दी पालिका ने
नगर पालिका ने धनाभाव के चलते शहर की प्रमुख सड़कों को लावारिस हालत में छोड़ दी है। चार माह पहले यहां की नौ सड़कों को चिह्नित कर पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित करने की पहल हुई। मगर, पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से इसकी स्वीकृति अब तक नहीं मिल पाई है। वहीं, लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण सभी सड़कों की दशा दयनीय हो गई है। मालवीय मार्ग पर गड्ढे अधिक होने से छोटे-बड़े सभी वाहन हिचकोले खाकर चल रहे हैं। मुख्य सड़कों के किनारे फुटपाथ और डिवाइडर की सुरक्षा भी खतरे में हैं। कमोवेश यही हाल सिविल लाइन रोड, रोडवेज-दक्षिण दरवाजा मार्ग, पांडेय बाजार-बांसी मार्ग और बरदहिया मार्ग का भी है। इन सड़कों की मरम्मत के लिए नगर पालिका के पास फूटी कौड़ी नहीं है।
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सड़क, नाली की समस्या से जूझ रहे वार्ड
वार्डों की सूरत बिगड़ गई है। इंटरलॉकिंग सड़कों के ईंट तक उखड़कर तितर-बितर हो गए हैं। नालियां चोक कर गई हैं। कई जगहों पर पानी सड़क पर बह रहा है। पिकौरा दत्तूराय ब्राह्मण महासभा के पीछे मुख्य सड़क पर ही पानी दो साल से भरा हुआ है। गोड़िया मुहल्ले की मुख्य सड़क चलने लायक नहीं है। मुरलीजोत आंशिक मुहल्ले में दक्षिण दरवाजा से गिधई की ओर जाने वाली सड़क पर आसानी से नहीं चला जा सकता है। सड़क टूट गई है, ऊपर से जलभराव और गंदगी भी है। यहां लोग मुंह पर रूमाल रखकर चल रहे हैं। यह तो बानगी मात्र है। शहर के नरहरिया, बैरियहवा, आवास विकास उत्तरी, सब्जी मंडी, माली टोला, तुरकहिया आदि वार्डों में भी दुश्वारियों का अंबार है।
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बिगड़ती जा रही पार्कों की दशा
शहर में बनाए पार्कों का भी खेवनहार कोई नहीं रह गया है। कुछ हद कटेश्वर पार्क ठीक है, मगर रखरखाव के अभाव में यह भी बदरंग हो चला है। अमहट घाट के पास विकसित किया जा रहा पार्क मझधार में ही ठप हो गया। यहां चहारदीवारी निर्माण के बाद कोई कार्य नहीं हो सका जिससे मन बहलाने के लिए शहरवासी इस जगह का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा आवास विकास, शिवा काॅलोनी में बनाए गए पार्क का भी देखरेख नहीं हो पा रहा है।
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कोट
पांचवें वित्त आयोग में प्रतिमाह मिलने वाला बजट वेतन, पेंशन के लिहाज से भी कम हैं। बोर्ड फंड का भी काफी धन आवश्यकताओं की पूर्ति में खर्च हो रहा है। परिषद के पास विकास कार्यों के लिए चार करोड़ उपलब्ध हैं जिसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ , नगर पालिका परिषद