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लंबी है बर्खास्त सिपाही परवेज के गुनाहों की फेहरिस्त
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लंबी है बर्खास्त सिपाही परवेज के गुनाहों की फेहरिस्त
बस्ती। वाहन चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए झांसी के बर्खास्त सिपाही परवेज के गुनाहों की फेहरिस्त लंबी है। वह केवल वाहन चोरी के गिरोह का ही सरगना नहीं, बल्कि हत्या, गैंगस्टर, चोरी जैसे अपराधों में भी लिप्त रहा है। पुलिस उसके विरुद्घ गैगस्टर की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
रविवार को जेल भेजे जाने से पहले पुलिस ने उससे लंबी पूछताछ की तो नई बस्ती, कोतवाली झांसी निवासी परवेज ने बताया कि वह 1995 बैच का सिपाही था। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2000 से 2009 तक उत्तराखंड पुलिस का हिस्सा बना। नैनीताल पुलिस लाइंस में टेलीफोन ड्यूटी पर तैनात रहा, मगर बाद में फिर उत्तर प्रदेश के लिए रिलीव हो गया। आपराधिक घटनाओं में शामिल होने की वजह से परवेज को 2016 में नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। पुलिस के अनुसार, परवेज पर झांसी कोतवाली में हत्या के दो व हत्या के प्रयास के चार मुकदमे दर्ज हैं।
2006 में थाना स्वरूप नगर, जनपद कानपुर नगर में तैनाती के दौरान उस पर हिरासत में आरोपी की हत्या के आरोप में पहला मुकदमा दर्ज किया गया था। 2010 में थाना कोतवाली जनपद उन्नाव में हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज हुआ। उसके बाद उस पर गैंगस्टर लगा था। थाना नवाबाद जनपद झांसी की पुलिस ने नंबर बदलकर चोरी की कार के साथ उसे गिरफ्तार किया था। 2019 में थाना ग्वालटोली कानपुर नगर में फिर उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी वर्ष थाना कल्यानपुर जनपद कानपुर नगर पश्चिमी में वाहन चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था।
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2020 में नैनीताल पुलिस ने इसके गिरोह का पर्दाफाश कर तीन लग्जरी कार बरामद की थी। पुलिस के मुताबिक, अब तक पांच बार वह जेल भेजा जा चुका है। सीओ हर्रैया शेषमणि उपाध्याय ने बताया कि इसके बारे में कानपुर, झांसी पुलिस से और भी ब्योरा मंगाया जा रहा है। उसके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी।
बदल देता था कार का सिस्टम
पूछताछ में पता चला कि कार चोरी करते समय वह सबसे पहले वाहन का बोनट खोलता था। उसके बाद स्टेयरिंग का लॉक तोड़ देता था। उसके बाद गाड़ी की बैक लाइट तोड़कर पूरी गाड़ी के लाइटिंग सिस्टम को खत्म करके वहां से अपना सॉफ्टवेयर इंस्टाल कर देता था। उसके बाद पूरी गाड़ी का आटोमेटिक सिस्टम बदल जाता था।
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बस्ती। वाहन चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए झांसी के बर्खास्त सिपाही परवेज के गुनाहों की फेहरिस्त लंबी है। वह केवल वाहन चोरी के गिरोह का ही सरगना नहीं, बल्कि हत्या, गैंगस्टर, चोरी जैसे अपराधों में भी लिप्त रहा है। पुलिस उसके विरुद्घ गैगस्टर की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
रविवार को जेल भेजे जाने से पहले पुलिस ने उससे लंबी पूछताछ की तो नई बस्ती, कोतवाली झांसी निवासी परवेज ने बताया कि वह 1995 बैच का सिपाही था। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2000 से 2009 तक उत्तराखंड पुलिस का हिस्सा बना। नैनीताल पुलिस लाइंस में टेलीफोन ड्यूटी पर तैनात रहा, मगर बाद में फिर उत्तर प्रदेश के लिए रिलीव हो गया। आपराधिक घटनाओं में शामिल होने की वजह से परवेज को 2016 में नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। पुलिस के अनुसार, परवेज पर झांसी कोतवाली में हत्या के दो व हत्या के प्रयास के चार मुकदमे दर्ज हैं।
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2006 में थाना स्वरूप नगर, जनपद कानपुर नगर में तैनाती के दौरान उस पर हिरासत में आरोपी की हत्या के आरोप में पहला मुकदमा दर्ज किया गया था। 2010 में थाना कोतवाली जनपद उन्नाव में हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज हुआ। उसके बाद उस पर गैंगस्टर लगा था। थाना नवाबाद जनपद झांसी की पुलिस ने नंबर बदलकर चोरी की कार के साथ उसे गिरफ्तार किया था। 2019 में थाना ग्वालटोली कानपुर नगर में फिर उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी वर्ष थाना कल्यानपुर जनपद कानपुर नगर पश्चिमी में वाहन चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था।
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2020 में नैनीताल पुलिस ने इसके गिरोह का पर्दाफाश कर तीन लग्जरी कार बरामद की थी। पुलिस के मुताबिक, अब तक पांच बार वह जेल भेजा जा चुका है। सीओ हर्रैया शेषमणि उपाध्याय ने बताया कि इसके बारे में कानपुर, झांसी पुलिस से और भी ब्योरा मंगाया जा रहा है। उसके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी।
बदल देता था कार का सिस्टम
पूछताछ में पता चला कि कार चोरी करते समय वह सबसे पहले वाहन का बोनट खोलता था। उसके बाद स्टेयरिंग का लॉक तोड़ देता था। उसके बाद गाड़ी की बैक लाइट तोड़कर पूरी गाड़ी के लाइटिंग सिस्टम को खत्म करके वहां से अपना सॉफ्टवेयर इंस्टाल कर देता था। उसके बाद पूरी गाड़ी का आटोमेटिक सिस्टम बदल जाता था।