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Basti News: नियम-कायदा नहीं मानते होटल वाले...हादसा हुआ तो नहीं कर सकेंगे दावा
Wed, 28 Jun 2023 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 28 Jun 2023 01:16 AM IST
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बस्ती। शहर समेत जिले के अन्य होटलों में ठहरने की सोच रहे हों तो अपनी सुरक्षा का इंतजाम पहले समझ लें, क्योंकि इन होटलों में आपके साथ कोई हादसा हो गया तो किसी भी तरह का कोई दावा आप नहीं कर सकेंगे। दरअसल, शहर के कुछ प्रमुख होटलों को छोड़ दें तो करीब 40 होटल पर्यटन विभाग का कोई नियम कायदा नहीं मानते। जिला प्रशासन ऐसे होटल और लॉज को सूचीबद्ध कर नोटिस जारी करने की तैयारी में है। ये होटल बिना पर्यटन विभाग की अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
सराय एक्ट में पंजीकरण के लिए होटल, लॉज और गेस्ट हाउस प्रबंधन को खाद्य सुरक्षा, अग्निशमन विभाग पर्यावरण विभाग, बिजली निगम, नगर पालिका से एनओसी और पुलिस अधीक्षक से चरित्र प्रमाणपत्र लेना होता है। इतने विभागों से एनओसी लेने के लिए होटल में सबकुछ नियम कायदे के मुताबिक ही होना चाहिए। लेकिन, इन सबसे बचने के लिए होटल प्रबंधन, सराय एक्ट के तहत पंजीकरण ही नहीं करा रहे हैं। ऐसे होटल संचालकों को पर्यटन विभाग नोटिस भेजने वाला है। बस्ती शहर के कुछ प्रमुख होटलों को छोड़ दें तो तमाम होटलों और गेस्ट हाउस की व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। ग्राहकों की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोई गारंटी लेने वाला नहीं है। यदि किसी ग्राहक के साथ कोई अनहोनी या गड़बड़ी हो भी जाए तो वह किसी तरह की शिकायत या दावा करने की स्थिति में नहीं होता। जबकि आए दिन इन होटलों में ग्राहकों के साथ किसी न किसी घटना की शिकायतें पुलिस तक पहुंचती ही रहती हैं। यदि पर्यटन विभाग या प्रशासन के अफसरों तक शिकायत पहुंचती भी है तो नियमों के तहत किसी दावे का आधार ही नहीं बनता, क्योंकि होटल गेस्ट हाउस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता सिर्फ नाम पर यह सब चल रहा है, रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है। ऐसे में सिर्फ एक ही रास्ता रह जाता है और वह है पुलिस। ग्राहक पुलिस को यदि राजी कर भी लेते हैं तो होटल वाले वहां भी निपट ही लेते हैं। यदि पुलिस से कोई साठगांठ न हो तभी उम्मीद बन पाती है कि ग्राहक की सुनवाई होगी।
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अंग्रेजों के जमाने के नियमों की आड़ में मनमानी
ब्रिटिश काल में वर्ष 1867 में सराय एक्ट बनाया गया था। अंग्रेजों के जमाने के इस एक्ट में आज भी होटलों का पंजीकरण किया जा रहा है। एक्ट में सराय से आशय ऐसे भवन से माना गया था, जिसे यात्रियों के आश्रय और आवास के लिए प्रयोग में लाया जाता हो। एक्ट में प्रावधान है कि डीएम कार्यालय में एक रजिस्टर रखा रहेगा, इसमें वह स्वयं या उसके द्वारा नामित व्यक्ति अपने अधिकार क्षेत्र के अंदर आने वाली सभी सरायों, सरायपालों के नाम, निवास स्थान की प्रविष्टि करेगा। लेकिन इन नियमों से कोई डरता नहीं है, इसलिए मनमानी जोरों पर है।
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हाईवे पर होटलों की हुई भरमार
फोरलेन बनने के बाद डेढ़ दशक के भीतर हाईवे पर होटलों की भरमार हो गई है। पूंजी वाले लोग होटल के नाम पर हाईवे किनारे चार मंजिला तक भवन खड़ा कर रहे हैं। गोरखपुर-फैजाबाद हाईवे के दोनों तरफ जनपद सीमा कांटे से लेकर घघौवा तक लगभग 20 होटल और गेस्ट हाउस बनकर तैयार हैं। इसके अलावा लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर भी होटल बनने शुरू हो गए हैं। इसमें से अधिकांश का सराय एक्ट में पंजीकरण नहीं है। बावजूद इसके हाईवे के यात्रियों को यहां ठहरने की व्यवस्था दी जा रही है।
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होटल संचालकों को सराय एक्ट में पंजीकरण कराना जरूरी है। नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सभी होटलों की जांच कराई जाएगी। जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। -कमलेश चंद्र, अपर जिलाधिकारी, बस्ती।
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सराय एक्ट में पंजीकरण के लिए होटल, लॉज और गेस्ट हाउस प्रबंधन को खाद्य सुरक्षा, अग्निशमन विभाग पर्यावरण विभाग, बिजली निगम, नगर पालिका से एनओसी और पुलिस अधीक्षक से चरित्र प्रमाणपत्र लेना होता है। इतने विभागों से एनओसी लेने के लिए होटल में सबकुछ नियम कायदे के मुताबिक ही होना चाहिए। लेकिन, इन सबसे बचने के लिए होटल प्रबंधन, सराय एक्ट के तहत पंजीकरण ही नहीं करा रहे हैं। ऐसे होटल संचालकों को पर्यटन विभाग नोटिस भेजने वाला है। बस्ती शहर के कुछ प्रमुख होटलों को छोड़ दें तो तमाम होटलों और गेस्ट हाउस की व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। ग्राहकों की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोई गारंटी लेने वाला नहीं है। यदि किसी ग्राहक के साथ कोई अनहोनी या गड़बड़ी हो भी जाए तो वह किसी तरह की शिकायत या दावा करने की स्थिति में नहीं होता। जबकि आए दिन इन होटलों में ग्राहकों के साथ किसी न किसी घटना की शिकायतें पुलिस तक पहुंचती ही रहती हैं। यदि पर्यटन विभाग या प्रशासन के अफसरों तक शिकायत पहुंचती भी है तो नियमों के तहत किसी दावे का आधार ही नहीं बनता, क्योंकि होटल गेस्ट हाउस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता सिर्फ नाम पर यह सब चल रहा है, रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है। ऐसे में सिर्फ एक ही रास्ता रह जाता है और वह है पुलिस। ग्राहक पुलिस को यदि राजी कर भी लेते हैं तो होटल वाले वहां भी निपट ही लेते हैं। यदि पुलिस से कोई साठगांठ न हो तभी उम्मीद बन पाती है कि ग्राहक की सुनवाई होगी।
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अंग्रेजों के जमाने के नियमों की आड़ में मनमानी
ब्रिटिश काल में वर्ष 1867 में सराय एक्ट बनाया गया था। अंग्रेजों के जमाने के इस एक्ट में आज भी होटलों का पंजीकरण किया जा रहा है। एक्ट में सराय से आशय ऐसे भवन से माना गया था, जिसे यात्रियों के आश्रय और आवास के लिए प्रयोग में लाया जाता हो। एक्ट में प्रावधान है कि डीएम कार्यालय में एक रजिस्टर रखा रहेगा, इसमें वह स्वयं या उसके द्वारा नामित व्यक्ति अपने अधिकार क्षेत्र के अंदर आने वाली सभी सरायों, सरायपालों के नाम, निवास स्थान की प्रविष्टि करेगा। लेकिन इन नियमों से कोई डरता नहीं है, इसलिए मनमानी जोरों पर है।
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हाईवे पर होटलों की हुई भरमार
फोरलेन बनने के बाद डेढ़ दशक के भीतर हाईवे पर होटलों की भरमार हो गई है। पूंजी वाले लोग होटल के नाम पर हाईवे किनारे चार मंजिला तक भवन खड़ा कर रहे हैं। गोरखपुर-फैजाबाद हाईवे के दोनों तरफ जनपद सीमा कांटे से लेकर घघौवा तक लगभग 20 होटल और गेस्ट हाउस बनकर तैयार हैं। इसके अलावा लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर भी होटल बनने शुरू हो गए हैं। इसमें से अधिकांश का सराय एक्ट में पंजीकरण नहीं है। बावजूद इसके हाईवे के यात्रियों को यहां ठहरने की व्यवस्था दी जा रही है।
होटल संचालकों को सराय एक्ट में पंजीकरण कराना जरूरी है। नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सभी होटलों की जांच कराई जाएगी। जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। -कमलेश चंद्र, अपर जिलाधिकारी, बस्ती।