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ठिठुरन के बीच पाला का खतरा बढ़ा, किसान परेशान

Wed, 22 Dec 2021 12:04 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Dec 2021 12:04 AM IST
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The danger of frost increased amidst the chill, farmers upset..
ठिठुरन के बीच पाला का खतरा बढ़ा, किसान परेशान
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सात डिग्री सेल्सियस तापमान में सुन्न हो रहीं उंगलियां
अगले 36 घंटे के बीच ठंडक से बढ़ सकती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बर्फीली पछुआ हवा से जनजीवन बेहाल है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अभी कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसे ही बना रहेगा। जबरदस्त ठंड से जूझ रहे जनमानस के लिए एक और खतरे की घंटी बज चुकी है। खासकर किसानों के लिए पाला बड़ी समस्या बनकर सामने आने वाला है।
मौसम के जानकारों का कहना है कि लगातार गिर रहे तापमान और सूखी ठंड के बीच 36 घंटे के भीतर पाला पड़ सकता है। तापमान गिरने से आलू, मटर, अरहर जैसी फसलों और सब्जियों में नुकसान की आशंका जताई गई है। कृषि विज्ञानी बताते हैं कि किसानों को टमाटर, मिर्च, मटर आदि की फसल को पाला से बचाने के लिए उपाय करने चाहिए। दवाओं के छिड़काव अथवा धुआं, पुआल-भूसा आदि के जरिए तापमान बनाए रखना चाहिए। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि आने वाले 24 घंटे के दौरान मौसम की तासीर में ज्यादा अंतर नहीं पड़ेगा। बेतहाशा ठंड का सबसे ज्यादा असर तो कामगारों पर पड़ रहा है। काम के समय इनकी उंगलियां पाला पड़ने से सुन्न हो जाती हैं। अलाव सेंकने के बाद ही उंगलियां सामान्य स्थिति में आ पाती हैं। वहीं तेज बर्फीली हवाओं के चलने से लोग बाहर निकलने से कतराने लगे हैं। शाम होते-होते गलन भरी ठंड और कोहरे के धुंध की फिर छा गई। न्यूनतम तापमान सात डिग्री तथा अधिकतम 21 डिग्री सेल्सियस रहा। वातावरण में नमी न्यूनतम 75 और अधिकतम 90 प्रतिशत होने की वजह से ठिठुरन बढ़ गई। इस दौरान दो किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही पछुआ बर्फीली हवाओं ने लोगों को कंपा दिया।
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क्या है पाला
सर्दी के मौसम में पानी का जमाव हो जाता है जिससे कोशिकायें फट जाती है एवं पौधे की पत्तियां सूख जाती है परिणामस्वरूप फसलों में भारी क्षति हो जाती है। पाला से पौधों तथा फसलों पर प्रभाव पाले के प्रभाव से पौधों की कोशिकाओं में जल संचार प्रभावित होता है। प्रभावित फसल अथवा पौधे का बहुभाग सूख जाता है। जिससे रोग एवं कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। पाले के प्रभाव से फल और फूल नष्ट हो जाते है। पाले के प्रभाव से सब्जियां अधिक प्रभावित होती है एवं पूर्णत: नष्ट हो जाती है।
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पाला से ऐसे करें बचाव
कृषि विज्ञानी डाक्टर एसएन सिंह का कहना है कि किसानों को पाला से बचाव के लिए फसलों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पर्याप्त नमी होने से फसलों में नुकसान की संभावना कम होती है। पाला होने की स्थिति में शाम के समय खेत की मेड़ पर धुआं करें। सिंचाई शाम-रात्रि के समय करें इसके अलावा सल्फर का दो मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें या पाला लगने के तुरंत बाद यानी अगले दिन प्रात: काल ग्लूकोन डी 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।
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