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Basti News: कोर्ट ने अनसुना कर दिया बीमारी का बहाना

Thu, 02 Nov 2023 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 02 Nov 2023 12:55 AM IST
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The court ignored the excuse of illness
न्यायालय परिसर मे जाने वालो की जांच करती पुलिस।
अवसाद की बीमारी पर अदालत में पेश न होने की दलील को किया खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। करीब 22 वर्ष पुराने राहुल अपहरण मामले में आरोपी पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ है। अवसाद आदि बीमारी की दलील देकर मोहलत लेता रहा है।इस बार कोर्ट ने अवसाद की बीमारी की दलील को अनसुना कर दिया।
16 अक्तूबर को अमरमणि को गैर जमानती वारंट जारी करते समय भी बीमारी की दलील दी गई थी, जिसे नकारते हुए न्यायालय ने कहा था कि अवसाद की बीमारी के आधार पर अभियुक्त को पेश होने से छूट नहीं दी जा सकती है।
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छह दिसंबर 2001 को शहर के व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल के अपहरण मामले में न्यायालय ने अमरमणि त्रिपाठी के अलावा दो अन्य वांछितों को कई बार गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश पारित किया, लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई।
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केस दर्ज होने के बाद काफी दिनों तक अमरमणि मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में लखनऊ, गोरखपुर समेत विभिन्न जेलों में बंद रहा। इस दौरान न्यायालय ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक गोरखपुर को तारीख पर हाजिर करने के निर्देश दिए, लेकिन बीमारी का बहाना बनाकर पेशी टलती रही।
24 अगस्त को अदालत की ओर से गोरखपुर के सीएमओ से मेडिकल बोर्ड गठित कर अमरमणि के स्वास्थ्य की रिपोर्ट मांगी गई थी। 11 सितंबर को सीएमओ स्तर से गठित पांच सदस्यीय बोर्ड की रिपोर्ट में अमरमणि को अवसाद की बीमारी बताते हुए इलाज राज्य चिकित्सा परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ के निर्देश के अनुसार चलने की बात कही गई थी।
कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट पर टिप्पणी करते कहा था कि मात्र अवसाद के आधार पर किसी अभियुक्त को कोर्ट आने से अवमुक्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने गोरखपुर के वरिष्ठ जेल अधीक्षक को निर्देश दिए थे कि 16 अक्तूबर को अमरमणि को पेश करें। उस दिन भी बीमारी की दलील दी गई, जिसे नकारते हुए न्यायालय ने कहा था कि अवसाद की बीमारी के आधार पर अभियुक्त को पेश होने से छूट नहीं दी जा सकती।
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यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को शहर के व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। कोतवाली थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया था। पिता धर्मराज ने तहरीर में लिखा था कि उनका बेटा राहुल एक निजी विद्यालय का संस्थागत छात्र है। घर से स्कूल जाने के लिए निकला था। सुबह करीब 7:45 बजे बेटा जब एक गुप्ता परिवार के घर के सामने से गुजर रहा था, उसी समय सफेद रंग की मारुति कार से आए बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया। गुप्ता परिवार के अलावा इस घटना के कुछ और चश्मदीद थे। एक सप्ताह के बाद 13 दिसंबर को लखनऊ के एक घर से बच्चे की बरामदगी होने के साथ ही पुलिस ने संदीप त्रिपाठी नाम के बदमाश को गिरफ्तार किया था।

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इस तरह सामने आया था अमरमणि का नाम

न्यायालय में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, आरोपी बनाए गए संदीप त्रिपाठी ने साथियों के नाम बताए थे। संदीप से पूछताछ में अमरमणि का नाम सामने आया था। इसके बाद तीन महीने में अमरमणि का मंत्री पद चला गया था। पुलिस का दबाव बढ़ने पर अमरमणि ने उच्च न्यायालय से एक फरवरी 2002 में जमानत ले ली थी। 2003 में लखनऊ में मधुमिता शुक्ला हत्याकांड हो गया। इसमें भी अमरमणि आरोपी बनाया गया। इस केस में उसे 2007 में आजीवन कारावास की सजा हो गई। तब से अब तक अमरमणि राहुल अपहरण केस में बस्ती की कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ है।
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22 वर्ष से कोर्ट में ट्रायल तक नहीं हो सका शुरू
राहुल के अपहरण में पुलिस ने पहले सात आरोपी बनाए थे। इनमें मुख्य आरोपी संदीप त्रिपाठी मर चुका है। उसके साथ हनुमान शुक्ला उर्फ काका, अजय मिश्रा, आनंद सिंह, राम विलास, जग प्रताप वर्मा, नैनीश शर्मा, शिवम आरोपी बनाए गए। इन्हीं आरोपियों के साथ अमरमणि त्रिपाठी का नाम भी जोड़ा गया था। पुलिस ने संदीप, हनुमान, अजय, आनंद, राम विलास, जग प्रताप को गिरफ्तार कर लिया। इन बदमाशों को कोर्ट में पेश कर आरोप तय कर दिए। सभी का ट्रायल शुरू हो गया, लेकिन नैनीश और शिवम के साथ अमरमणि कोर्ट में पेश नहीं हुए। न ही तीनों की गिरफ्तारी हो सकी। संदीप की मौत के बाद अन्य आरोपियों ने अपनी फाइल अलग करवा ली। अमरमणि, नैनीश और शिवम जमानत लेने के 22 वर्ष बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस वजह से केस का ट्रायल शुरू नहीं हो सका।

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अमरमणि के हाजिर होने की सुगबुगाहट पर अलर्ट रही पुलिस

अपहरण केस में अमरमणि त्रिपाठी के हाजिर होने की सुगबुगाहट पर पुलिस दिनभर अलर्ट रही। न्यायालय के इर्दगिर्द पुलिस चहलकदमी करती रही। न्यायालय परिसर में जाने वालों की तलाशी हो रही थी। अमरमणि के खिलाफ न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी किया था, जिसे एक नवंबर को हाजिर होने का आदेश दिया गया था। माना जा रहा है कि आरोपी न्यायालय के कड़े रुख को देखते हुए बुधवार को हाजिर नहीं हो सका। न्यायालय सुरक्षा में तैनात पुलिस टीम के अलावा कोतवाल विनय कुमार पाठक, चौकी इंचार्ज सिविल लाइंस, गांधीनगर चौकी इंचार्ज के अलावा स्थानीय अभिसूचना इकाई की टीमें परिसर में भ्रमण करती रहीं।
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