{"_id":"67059a9cf3f9b602680b60a7","slug":"the-audience-was-overwhelmed-with-emotion-after-hearing-the-story-of-the-flower-garden-basti-news-c-207-1-sgkp1006-125340-2024-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: पुष्प वाटिका की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: पुष्प वाटिका की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता
विज्ञापन
प्रतापपुर में चल रही श्रीराम कथा का श्रवण करती महिलाएं- फोटो- संवाद
पुष्प वाटिका की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता
- प्रतापपुर में चल रही श्रीराम कथा में बाल लीला का वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बहादुरपुर ब्लाॅक के प्रतापपुर चौराहे पर चल रही श्रीराम कथा में नैमिषारण्य के संत गोपालजी मिश्र ने पुष्प वाटिका का मार्मिक वर्णन किया। कहा कि विश्वामित्र अपने शिष्य श्रीराम और लक्ष्मण के साथ जब मिथिला पहुंचते हैं तो जनकवाटिका में रुकते हैं। वहां पर सुबह-सुबह श्रीराम और लक्ष्मण गुरु के पूजन के लिए फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका में जाते हैं। वहां सीता जी भी अपनी सखियों के साथ मां सुनयना के आदेश से पार्वती मंदिर में पूजा के लिए आती हैं। वहां सीता शृंगार सहित आती हैं।
उनकी ध्वनि राम के कानों में गूंजती है। इस पर श्रीराम को पहले से ही आभास हो जाता है और वो लक्ष्मण से कहते हैं कि कामदेव नगाड़े बजाते हुए आ रहे हैं। मुझे बचाओ। इतना कहते ही श्रीराम और सीता के नेत्र मिलते हैं। दोनों एक-दूसरे को अपलक देखते हैं और लक्ष्मण उन्हें दूर ले जाते हैं। इसके बाद सीता माता पार्वती के मंदिर में आकर अपनी प्रार्थना देवी काे अर्पित करती हैं और श्रीराम को पति के रूप में प्राप्त करने की विनती करती हैं। वहीं सरल स्वभाव के श्रीराम पुष्प लेकर गुरु के पास गए और उन्होंने अपने गुरु को सारी बात बता दी। इस पर विश्वामित्र कहते हैं कि तुमने मुझे फूल दिए, अब तुम्हें फल प्राप्त होगा। आयोजक अजीत कुमार सिंह झिन्नू, संतोष कुमार सिंह, एडवोकेट नरेंद्र पांडेय, इंद्रजीत सिंह, धर्मेंद्र सिंह बब्बू आदि ने व्यास गद्दी का पूजन किया।
विज्ञापन
- प्रतापपुर में चल रही श्रीराम कथा में बाल लीला का वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बहादुरपुर ब्लाॅक के प्रतापपुर चौराहे पर चल रही श्रीराम कथा में नैमिषारण्य के संत गोपालजी मिश्र ने पुष्प वाटिका का मार्मिक वर्णन किया। कहा कि विश्वामित्र अपने शिष्य श्रीराम और लक्ष्मण के साथ जब मिथिला पहुंचते हैं तो जनकवाटिका में रुकते हैं। वहां पर सुबह-सुबह श्रीराम और लक्ष्मण गुरु के पूजन के लिए फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका में जाते हैं। वहां सीता जी भी अपनी सखियों के साथ मां सुनयना के आदेश से पार्वती मंदिर में पूजा के लिए आती हैं। वहां सीता शृंगार सहित आती हैं।
उनकी ध्वनि राम के कानों में गूंजती है। इस पर श्रीराम को पहले से ही आभास हो जाता है और वो लक्ष्मण से कहते हैं कि कामदेव नगाड़े बजाते हुए आ रहे हैं। मुझे बचाओ। इतना कहते ही श्रीराम और सीता के नेत्र मिलते हैं। दोनों एक-दूसरे को अपलक देखते हैं और लक्ष्मण उन्हें दूर ले जाते हैं। इसके बाद सीता माता पार्वती के मंदिर में आकर अपनी प्रार्थना देवी काे अर्पित करती हैं और श्रीराम को पति के रूप में प्राप्त करने की विनती करती हैं। वहीं सरल स्वभाव के श्रीराम पुष्प लेकर गुरु के पास गए और उन्होंने अपने गुरु को सारी बात बता दी। इस पर विश्वामित्र कहते हैं कि तुमने मुझे फूल दिए, अब तुम्हें फल प्राप्त होगा। आयोजक अजीत कुमार सिंह झिन्नू, संतोष कुमार सिंह, एडवोकेट नरेंद्र पांडेय, इंद्रजीत सिंह, धर्मेंद्र सिंह बब्बू आदि ने व्यास गद्दी का पूजन किया।
विज्ञापन