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Basti News: निचले भूभाग में बना था अटल आवासीय विद्यालय, जलनिकासी की चुनौती पहले से

Mon, 05 Oct 2026 02:01 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:01 AM IST
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The Atal Residential School was built on low-lying land; the challenge of water drainage existed from the start.
अटल आवासीय विद्यालय परिसर में जलभराव संवाद - फोटो : credit
परशुरामपुर (बस्ती)। हर्रैया तहसील क्षेत्र के बसेवाराय में अटल आवासीय विद्यालय के निर्माण के लिए जिस करीब आठ हेक्टेयर जमीन का चयन किया गया, वह अपेक्षाकृत नीचीथी। तत्कालीन राजस्व अभिलेखों में यह जमीन बंजर दर्ज थी। निचले भूभाग के कारण आसपास का पानी भी यहां एकत्रित होता था। जलनिकासी की चुनौती पहले से थी।
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विद्यालय निर्माण के दौरान जलभराव की आशंका को देखते हुए परिसर के चारों तरफ मिट्टी की पटाई कर जमीन का स्तर ऊंचा करने के साथ पानी की निकासी के लिए तालाब भी बनवाया गया था। मगर उस तालाब के भरने के बाद उसका पानी कहां जाएगा, इसकी निकासी के लिए टेक्निकल टीम मानो चूक गई। सूत्रों के अनुसार, आज वही चूक, परिसर के जलभराव का मुख्य कारण बना। जो अब सवाल उठ रहे हैं।
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हलका लेखपाल अजय कुमार ने बताया कि पहले यह जमीन बंजर थी। विद्यालय के लिए इतने हेक्टेयर की भूमि कहीं नहीं मिली तो इसका चयन किया गया था। वहीं, विभाग के अनुसार, विद्यालय निर्माण के समय परिसर की सुरक्षा और जलभराव से बचाव को ध्यान में रखते हुए भवन के चारों तरफ मिट्टी की पटाई कराई गई थी। इसके बाद करीब दो मीटर चौड़ी इंटरलॉकिंग भी लगवाई गई।
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परिसर में बारिश का पानी एकत्रित न हो, इसके लिए एक बड़ा तालाब बनवाया गया था, जिसमें विद्यालय परिसर का पानी पहुंचने की व्यवस्था की गई थी, हालांकि उस तालाब के ओवरफ्लो होने के बाद उसका पानी किधर जाएगा यह इसकी व्यवस्था नहीं की गई थी। अब जब बारिश हुई तो तालाब पहले भरा, फिर मनोरमा नदी से अटैच अर्जनी नाले का उफान हुआ तो उसका भी पानी ड्रेनेज और बाउंड्रीवाल रिसाव के जरिये आ गया, जो मुसीबत बन गया।
अब परिसर से पानी कुछ कम हो रहा, मगर अभी भी परिसर पूरी तरह से जलमग्न बना हुआ है। बसेवाराय के तत्कालीन ग्राम प्रधान राजदत्त शुक्ल ने बताया कि उस समय ग्रामसभा के पास सरकारी जमीन उपलब्ध थी। उच्च अधिकारियों की मंशा के अनुरूप अटल आवासीय विद्यालय के निर्माण के लिए यही जमीन उपलब्ध कराई गई थी। 63 करोड़ रुपये खर्च करके भवन बनाए गए। अन्य कार्य भी हुए थे। अब जलनिकासी के लिए दोबारा 8.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसको लेकर संशय है। कारण कि यदि इतना बजट फिर खर्च हुआ और जलनिकासी के लिए ठोस प्रबंध नहीं हुए तो यह पैसा भी बेकार जाएगा। ऐसे में कई टेक्निकल टीम कई दिनों से सर्वे करके अपनी रिपोर्ट बना रही है।
अब उठ रहे सवाल
निचले भूभाग की जमीन पर विद्यालय का निर्माण कराते समय जलनिकासी की चुनौती सामने होने के बावजूद परिसर में पानी का संकट क्यों बना, यह सवाल अब अहम हो गया है। लोगों ने कहा कि निर्माण के समय किए गए मिट्टी भराव और जलनिकासी की व्यवस्था कितनी कारगर रही, इसकी भी पड़ताल जरूरी है। चूंकि इसके कारण 860 बच्चों में नौवीं क्लास तक के विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी गई है। सिर्फ हाईस्कूल के बच्चे स्कूल में हैं। प्रभावित पढ़ाई को लेकर भी अभिभावक सवाल कर रहे हैं।

कोट:::

जलनिकासी के लिए टेक्निकल टीम सर्वे कर रही है। जल्द ही कोई निर्णय होगा। अभी परिसर में पानी है। पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। -सचिन सिंह, सहायक श्रमायुक्त, बस्ती।



बोले अभिभावक



विद्यालय निर्माण के समय इस बात का ध्यान नहीं रखा गया कि जिस जमीन पर विद्यालय बनवाया जा रहा है वह नीची थी और वहां हर वर्ष बारिश में पानी भर जाता था। टेक्निकल टीम को इससे अवगत कराना था। -मुन्ना शुक्ल, करनपुर



विद्यालय परिसर से जलनिकासी की व्यवस्था नहीं बनाई गई है। परिसर लो-लैंड में होने के कारण अत्यधिक जलभराव की स्थिति में पानी बाहर नहीं निकल पाता। इससे पढ़ाई पर भी असर पड़ा है। -दिलीप पांडेय, सलेमपुर पांडेय
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