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Basti News: दो बीडीओ पर लटकी कार्रवाई की तलवार
Sun, 28 May 2023 01:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 28 May 2023 01:12 AM IST
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दो बीडीओ पर लटकी कार्रवाई की तलवार
बस्ती। 2022 विधानसभा चुनाव में वीवीपैट की पर्चियों को फेंके जाने के मामले में तत्कालीन दो विकास खंड अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। ये दोनों अधिकारी चुनाव में रिटर्निंग अफसर बनाए गए थे। शासन ने अनुशासनिक कार्रवाई के लिए मामले की जांच संयुक्त विकास आयुक्त बस्ती मंडल पद्मकांत शुक्ल को सौंपी है। उनके स्तर से दोनों बीडीओ को आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। संबंधित दोनों बीडीओ को दो माह के भीतर जवाब प्रस्तुत करना होगा।
मतगणना स्थल मंडी समिति के बाहर बिखरी पाई गईं वीवीपैट की पर्चियों के प्रकरण में आरओ बनाए गए तत्कालीन बीडीओ सदर शिवमणि एवं बीडीओ रामनगर रमेश दत्त मिश्र की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। मामला इधर तब तूल पकड़ लिया जब इसमें संलिप्त तीन अन्य लेखपालों को दोषमुक्त कर दिया गया। निर्वाचन आयोग ने इस पर जवाब तलब किया है।
उधर, शासन ने दोनों राजपत्रित अधिकारियों को भी कार्रवाई के घेरे में लेने की कवायद तेज कर दी है। शासन के निर्देश पर जांच अधिकारी संयुक्त विकास आयुक्त ने तत्कालीन दोनों बीडीओ को आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। वीवीपैट पर्चियों के फेंके जाने में उनकी लापरवाही का उल्लेख किया गया है। एक बीडीओ शिवमणि वर्तमान में गोंडा जनपद में तैनात हैं। दूसरे बीडीओ रामनगर ब्लाॅक में ही तैनात हैं। दोनों बीडीओ को दो माह में जवाब देना होगा। इसके बाद शासन को रिपोर्ट प्रेषित कर दी जाएगी।
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यह था पूरा मामला
विधानसभा चुनाव 2022 के मतदान के बाद मतगणना के लिए मंडी समिति के स्ट्रांगरूम में 3 मई को जिले भर के वीवीपैट सुरक्षित कराए गए थे। मतगणना के पहले ही 4 मई को स्ट्रांग रूम के बाहर वीवीपैट की कुछ पर्चियां बिखरी हुई पाई गई थी। इस पर प्रत्याशियों ने तमाम तरह के सवाल उठाए थे। तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल ने सफाई पेश किया कि बिखरी हुई पर्चियां वोटरों की नहीं थी। अलबत्ता ईवीएम में प्रत्याशियों के नाम और सिंबल फीड किए जाते समय जांच के तौर पर प्रयोग होने वाली पर्चियां थी। जिसे फेंकने के बजाय नष्ट किया जाना चाहिए था।
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आयोग ने दिए थे जांच के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने स्ट्रांग रूम के बाहर वीपीपैट की पर्ची पाए जाने पर आरओ/एएसडीएम, दो राजस्व निरीक्षकों, तीन लेखपालों की जांच के निर्देश दिए थे। लेकिन आयोग को संज्ञान में लिए बगैर संबंधित तीन लेखपालों को दोषमुक्त कर दिया गया। इस पर आयोग के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी प्रियंका निरंजन ने वर्तमान में कानपुर में एडीएम न्यायिक के पद पर तैनात यहां के तत्कालीन एसडीएम सदर सूरज कुमार यादव से स्पष्टीकरण तलब किया है। इन्होंने ही लेखपालों को दोषमुक्त करार दिया था। इससे एक बार फिर हड़कंप मच गया है।
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वीवीपैट की पर्चियों को फेंकने के मामले में रिटर्निंग अफसर बनाए गए तत्कालीन बीडीओ बस्ती सदर और बीडीओ रामनगर के खिलाफ शासन से अनुशासनिक कार्रवाई चल रही है। दोनों अधिकारियों को आरोपपत्र उनके वर्तमान तैनाती स्थल के पते पर भेज दिया गया है। जवाब मिलते ही रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। -पदमकांत शुक्ल, संयुक्त विकास आयुक्त, बस्ती मंडल।
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बस्ती। 2022 विधानसभा चुनाव में वीवीपैट की पर्चियों को फेंके जाने के मामले में तत्कालीन दो विकास खंड अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। ये दोनों अधिकारी चुनाव में रिटर्निंग अफसर बनाए गए थे। शासन ने अनुशासनिक कार्रवाई के लिए मामले की जांच संयुक्त विकास आयुक्त बस्ती मंडल पद्मकांत शुक्ल को सौंपी है। उनके स्तर से दोनों बीडीओ को आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। संबंधित दोनों बीडीओ को दो माह के भीतर जवाब प्रस्तुत करना होगा।
मतगणना स्थल मंडी समिति के बाहर बिखरी पाई गईं वीवीपैट की पर्चियों के प्रकरण में आरओ बनाए गए तत्कालीन बीडीओ सदर शिवमणि एवं बीडीओ रामनगर रमेश दत्त मिश्र की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। मामला इधर तब तूल पकड़ लिया जब इसमें संलिप्त तीन अन्य लेखपालों को दोषमुक्त कर दिया गया। निर्वाचन आयोग ने इस पर जवाब तलब किया है।
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उधर, शासन ने दोनों राजपत्रित अधिकारियों को भी कार्रवाई के घेरे में लेने की कवायद तेज कर दी है। शासन के निर्देश पर जांच अधिकारी संयुक्त विकास आयुक्त ने तत्कालीन दोनों बीडीओ को आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। वीवीपैट पर्चियों के फेंके जाने में उनकी लापरवाही का उल्लेख किया गया है। एक बीडीओ शिवमणि वर्तमान में गोंडा जनपद में तैनात हैं। दूसरे बीडीओ रामनगर ब्लाॅक में ही तैनात हैं। दोनों बीडीओ को दो माह में जवाब देना होगा। इसके बाद शासन को रिपोर्ट प्रेषित कर दी जाएगी।
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यह था पूरा मामला
विधानसभा चुनाव 2022 के मतदान के बाद मतगणना के लिए मंडी समिति के स्ट्रांगरूम में 3 मई को जिले भर के वीवीपैट सुरक्षित कराए गए थे। मतगणना के पहले ही 4 मई को स्ट्रांग रूम के बाहर वीवीपैट की कुछ पर्चियां बिखरी हुई पाई गई थी। इस पर प्रत्याशियों ने तमाम तरह के सवाल उठाए थे। तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल ने सफाई पेश किया कि बिखरी हुई पर्चियां वोटरों की नहीं थी। अलबत्ता ईवीएम में प्रत्याशियों के नाम और सिंबल फीड किए जाते समय जांच के तौर पर प्रयोग होने वाली पर्चियां थी। जिसे फेंकने के बजाय नष्ट किया जाना चाहिए था।
आयोग ने दिए थे जांच के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने स्ट्रांग रूम के बाहर वीपीपैट की पर्ची पाए जाने पर आरओ/एएसडीएम, दो राजस्व निरीक्षकों, तीन लेखपालों की जांच के निर्देश दिए थे। लेकिन आयोग को संज्ञान में लिए बगैर संबंधित तीन लेखपालों को दोषमुक्त कर दिया गया। इस पर आयोग के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी प्रियंका निरंजन ने वर्तमान में कानपुर में एडीएम न्यायिक के पद पर तैनात यहां के तत्कालीन एसडीएम सदर सूरज कुमार यादव से स्पष्टीकरण तलब किया है। इन्होंने ही लेखपालों को दोषमुक्त करार दिया था। इससे एक बार फिर हड़कंप मच गया है।
वीवीपैट की पर्चियों को फेंकने के मामले में रिटर्निंग अफसर बनाए गए तत्कालीन बीडीओ बस्ती सदर और बीडीओ रामनगर के खिलाफ शासन से अनुशासनिक कार्रवाई चल रही है। दोनों अधिकारियों को आरोपपत्र उनके वर्तमान तैनाती स्थल के पते पर भेज दिया गया है। जवाब मिलते ही रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। -पदमकांत शुक्ल, संयुक्त विकास आयुक्त, बस्ती मंडल।