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नई शिक्षा नीति में शामिल हुए सुशांत के तीन सुझाव
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सुशांत पांडेय।
- फोटो : BASTI
नई शिक्षा नीति में शामिल हुए सुशांत के तीन सुझाव
चीन की डेलीगेट यात्रा में रह चुके हैं सदस्य
एमबीए धारक रुधौली के हैं रहने वाले
जितेंद्र यादव
बस्ती। योग्यता किसी की मोहताज नहीं होती, तभी तो रुधौली के सुशांत पांडेय का केंद्र सरकार की ओर से तय की जा रही नई शिक्षा नीति में तीन सुझाव शामिल किए गए हैं।
32 वर्षीय सुशांत प्रैक्सिस विद्या पीठ के प्रबंधक हैं। उनके पिता का नाम परशुराम पांडेय और माता का नाम पूनम पांडेय है। नई शिक्षा नीति-2020 के लिए मोदी सरकार के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के दिशा निर्देशन में एक कमेटी के गठन को केंद्रीय स्तर पर चिंतन शिविर का आयोजन छह व सात नवंबर-2017 को किया गया था। इसमें शिक्षा सुधार के लिए सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इसमें वैज्ञानिकों, कुलपतियों, शिक्षाविदें, प्रशासनिक अधिकारी एवं सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों ने सुझाव भेजे थे। इनमें से 150 लोगों के सुझाव को सही मानते हुए स्वीकारोक्ति दी गई। इसमें सुशांत का नाम भी शामिल था। तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने सुशांत को दिल्ली आमंत्रित किया। सुशांत को शिक्षा मंत्रालय ने सुझावों व नई शिक्षा नीति के मसौदों की कमेटी में सदस्य के रूप में शामिल करने की सहमति दी। कमेटी के लीडर आनंद स्वरूप एमआरडीएक्स कैबिनेट सचिव व सीबीएसई चेयरमैन अनीता करवल थीं। कई चरणों की बैठक व विचार-विमर्श के बाद नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार किया गया। सुशांत बताते हैं कि उनकी ओर से प्रस्तावित सुझावों में देश के सभी विद्यालयों को आसपास के ग्राम को गोद लेने, बच्चों के रिपोर्ट कार्ड का 360 डिग्री अप्रैजल का मूल्यांकन तथा बच्चों की शुरुआती पढ़ाई स्कूल की चारदीवारी से बाहर खेलकूद के माध्यम से कराने की शामिल था। इसपर मुहर लगाकर नई शिक्षा नीति में शामिल कर लिया गया है।
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चीन की डेलीगेट यात्रा में रह चुके हैं सदस्य
एमबीए धारक रुधौली के हैं रहने वाले
जितेंद्र यादव
बस्ती। योग्यता किसी की मोहताज नहीं होती, तभी तो रुधौली के सुशांत पांडेय का केंद्र सरकार की ओर से तय की जा रही नई शिक्षा नीति में तीन सुझाव शामिल किए गए हैं।
32 वर्षीय सुशांत प्रैक्सिस विद्या पीठ के प्रबंधक हैं। उनके पिता का नाम परशुराम पांडेय और माता का नाम पूनम पांडेय है। नई शिक्षा नीति-2020 के लिए मोदी सरकार के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के दिशा निर्देशन में एक कमेटी के गठन को केंद्रीय स्तर पर चिंतन शिविर का आयोजन छह व सात नवंबर-2017 को किया गया था। इसमें शिक्षा सुधार के लिए सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इसमें वैज्ञानिकों, कुलपतियों, शिक्षाविदें, प्रशासनिक अधिकारी एवं सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों ने सुझाव भेजे थे। इनमें से 150 लोगों के सुझाव को सही मानते हुए स्वीकारोक्ति दी गई। इसमें सुशांत का नाम भी शामिल था। तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने सुशांत को दिल्ली आमंत्रित किया। सुशांत को शिक्षा मंत्रालय ने सुझावों व नई शिक्षा नीति के मसौदों की कमेटी में सदस्य के रूप में शामिल करने की सहमति दी। कमेटी के लीडर आनंद स्वरूप एमआरडीएक्स कैबिनेट सचिव व सीबीएसई चेयरमैन अनीता करवल थीं। कई चरणों की बैठक व विचार-विमर्श के बाद नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार किया गया। सुशांत बताते हैं कि उनकी ओर से प्रस्तावित सुझावों में देश के सभी विद्यालयों को आसपास के ग्राम को गोद लेने, बच्चों के रिपोर्ट कार्ड का 360 डिग्री अप्रैजल का मूल्यांकन तथा बच्चों की शुरुआती पढ़ाई स्कूल की चारदीवारी से बाहर खेलकूद के माध्यम से कराने की शामिल था। इसपर मुहर लगाकर नई शिक्षा नीति में शामिल कर लिया गया है।
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