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Basti News: मान्यता नहीं फिर भी चल रहे स्कूल... कार्रवाई से पीछे हुआ विभाग
Mon, 20 Nov 2023 12:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 20 Nov 2023 12:10 AM IST
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जुलाई में चला था अभियान, मान्यता विहीन 125 विद्यालयों में हुई थी तालाबंदी
चिह्नित 213 विद्यालय बिना मान्यता के हो रहे संचालित, विभाग ने साधी चुप्पी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में मान्यता विहीन स्कूलों की भरमार है। नर्सरी से लेकर हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई इन स्कूलों में कराई जा रही है। यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों का पंजीकरण सेटिंग के मान्यता प्राप्त स्कूलों से कराया जा रहा है। इस साल विभाग ने 338 गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को चिह्नित कराया था। मगर, 125 विद्यालय ही जुलाई में बंद कराए जा सके। विभागीय रिकाॅर्ड के अनुसार जिले में अब भी 213 विद्यालय चल रहे हैं।
योजना थी कि वर्तमान सत्र में मान्यता विहीन स्कूलों को नहीं चलने दिया जाएगा। इसके लिए इन विद्यालयों की सूची तैयार की गई है। प्रशासन अधिकारियों की सख्ती के बाद विभाग ने जुलाई में अभियान भी चलाया। ताबड़तोड़ 125 विद्यालयों को बंद करा दिया गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई से हाथ खींच लिया। माहौल शांत हुआ तो तालाबंदी वाले विद्यालयों में से कुछ ने पढ़ाई शुरू करा दी है। इसके अलावा कार्रवाई से वंचित 213 स्कूल बेधड़क चल रहे हैं। विभाग ने चुप्पी साध ली है। जबकि मान्यता विहीन स्कूलों को बंद कराने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों के अलावा खंड शिक्षाधिकारियों को दायित्व सौंपा गया है।
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सांठगांठ से चल रहे मान्यता विहीन स्कूल
आरोप है कि नर्सरी से जूनियर या हाईस्कूल से इंटरमीडिएट तक के बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों की विभागीय जिम्मेदारों से सांठगांठ रहती है। उनके बगैर मौन सहमति के यह विद्यालय नहीं चलाए जा सकते हैं। विद्यालय चलाने के लिए संचालकों को बाकायदे जिम्मेदारों तक चढ़ावा भी चढ़ाना पड़ रहा है।
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मान्यता देने में बड़ा खेल
निजी स्कूलों की मान्यता में भी बड़ा खेल है। ऑनलाइन आवेदन के बाद सेटिंग का खेल शुरू होता है। जिम्मेदारों तक गहरी पैठ बनाकर चढ़ावा चढ़ाने में सफल होना वाला ही मान्यता की बाजी मारता है। वरना आवेदन रद्द हो जाता है। यह पुरानी परंपरा बरकरार है। चढ़ावा न चढ़ाने पर नियमों के मकड़जाल में संचालकों को उलझा दिया जाता है। वर्तमान सत्र में मान्यता के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से अभी बीईओ के निरीक्षण से आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी है। जबकि 100 से अधिक आवेदन हुए हैं। जानकारों की मानें तो जब सत्र समाप्ति के करीब होता है, तभी मान्यता की कुछ फाइलों पर अनुमोदन दिया जाता है। इसके बदले संचालकों से अच्छा खासा चढ़ावा लिया जाता है।
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कोट
बिना मान्यता के संचालित स्कूलों का निरीक्षण कर बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही कार्रवाई शुरू होगी। जहां तक मान्यता देने की बात है तो निचले स्तर से रिपोर्ट आने के बाद ही कमेटी बैठती है। मानक के अनुरूप पाए जाने पर विद्यालयों को मान्यता दी जाती है। चढ़ावा चढ़ाने जैसी बात निराधार है।
-अनूप कुमार, बीएसए
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चिह्नित 213 विद्यालय बिना मान्यता के हो रहे संचालित, विभाग ने साधी चुप्पी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में मान्यता विहीन स्कूलों की भरमार है। नर्सरी से लेकर हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई इन स्कूलों में कराई जा रही है। यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों का पंजीकरण सेटिंग के मान्यता प्राप्त स्कूलों से कराया जा रहा है। इस साल विभाग ने 338 गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को चिह्नित कराया था। मगर, 125 विद्यालय ही जुलाई में बंद कराए जा सके। विभागीय रिकाॅर्ड के अनुसार जिले में अब भी 213 विद्यालय चल रहे हैं।
योजना थी कि वर्तमान सत्र में मान्यता विहीन स्कूलों को नहीं चलने दिया जाएगा। इसके लिए इन विद्यालयों की सूची तैयार की गई है। प्रशासन अधिकारियों की सख्ती के बाद विभाग ने जुलाई में अभियान भी चलाया। ताबड़तोड़ 125 विद्यालयों को बंद करा दिया गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई से हाथ खींच लिया। माहौल शांत हुआ तो तालाबंदी वाले विद्यालयों में से कुछ ने पढ़ाई शुरू करा दी है। इसके अलावा कार्रवाई से वंचित 213 स्कूल बेधड़क चल रहे हैं। विभाग ने चुप्पी साध ली है। जबकि मान्यता विहीन स्कूलों को बंद कराने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों के अलावा खंड शिक्षाधिकारियों को दायित्व सौंपा गया है।
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सांठगांठ से चल रहे मान्यता विहीन स्कूल
आरोप है कि नर्सरी से जूनियर या हाईस्कूल से इंटरमीडिएट तक के बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों की विभागीय जिम्मेदारों से सांठगांठ रहती है। उनके बगैर मौन सहमति के यह विद्यालय नहीं चलाए जा सकते हैं। विद्यालय चलाने के लिए संचालकों को बाकायदे जिम्मेदारों तक चढ़ावा भी चढ़ाना पड़ रहा है।
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मान्यता देने में बड़ा खेल
निजी स्कूलों की मान्यता में भी बड़ा खेल है। ऑनलाइन आवेदन के बाद सेटिंग का खेल शुरू होता है। जिम्मेदारों तक गहरी पैठ बनाकर चढ़ावा चढ़ाने में सफल होना वाला ही मान्यता की बाजी मारता है। वरना आवेदन रद्द हो जाता है। यह पुरानी परंपरा बरकरार है। चढ़ावा न चढ़ाने पर नियमों के मकड़जाल में संचालकों को उलझा दिया जाता है। वर्तमान सत्र में मान्यता के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से अभी बीईओ के निरीक्षण से आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी है। जबकि 100 से अधिक आवेदन हुए हैं। जानकारों की मानें तो जब सत्र समाप्ति के करीब होता है, तभी मान्यता की कुछ फाइलों पर अनुमोदन दिया जाता है। इसके बदले संचालकों से अच्छा खासा चढ़ावा लिया जाता है।
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कोट
बिना मान्यता के संचालित स्कूलों का निरीक्षण कर बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही कार्रवाई शुरू होगी। जहां तक मान्यता देने की बात है तो निचले स्तर से रिपोर्ट आने के बाद ही कमेटी बैठती है। मानक के अनुरूप पाए जाने पर विद्यालयों को मान्यता दी जाती है। चढ़ावा चढ़ाने जैसी बात निराधार है।
-अनूप कुमार, बीएसए