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विश्व मातृ दिवस: मां की मेहनत से बेटी ने छुआ आसमान, हैंडबाल की राष्ट्रीय टीम में मिला स्थान
Sun, 08 May 2022 02:41 AM IST
vivek shukla
नीरज श्रीवास्तव, बस्ती।
नीरज श्रीवास्तव, बस्ती।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 08 May 2022 02:41 AM IST
सार
तरीबुन्निशा की चौथी बेटी हिना है, उसकी रुचि खेल में थी। इसे देख मां ने उसको प्रोत्साहित किया। कई बार धन के चलते बाहर जाने में हिना को परेशानी भी हुई, मगर मां का हौसला दिक्कतों पर भारी पड़ा। हिना को पहली बार वर्ष 2016 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला।
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तरीबुन्निशा अपनी बेटी हिना के साथ।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
ढाई दशक पहले पति ने तरीबुन्निशा को तलाक दिया, तो सिर पर छत तक नहीं थी। उस पर चार-चार बेटियों की जिम्मेदारी का बोझ आ गया। इस मुश्किल घड़ी में हिम्मत हारने के बजाय तरीबुन्निशा खुद ही मेहनत कर बेटियों की किस्मत संवारने में जुट गईं। तीन बेटियों की शादी कर दी और चौथी बेटी हिना को राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना दिया।
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मां की मेहनत से हिना आसमान छू रही है। अब तक चार बार राष्ट्रीय टीम में खेल चुकी हिना इस वर्ष हैंडबाल की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हैदराबाद में अपने हुनर का प्रदर्शन किया है। इन दिनों वह फैजाबाद यूनिवर्सिटी से एमपी एड कर रही हैं। उनकी इच्छा पुलिस अधिकारी बनकर देश सेवा की है।
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पचीस वर्ष पहले तरीबुन्निशा को पति ने तलाक दे दिया। अचानक घर से वह सड़क पर आ गई। बेटियों को लेकर तरीबुन्निशा को हाइवे किनारे पालीटेक्निक चौराहे पर थोड़ी सी जमीन में टीन शेड डालकर छत कर इंतजाम कर लिया। अब उसके सामने पेट पालने का संकट खड़ा था, मगर उसने हार नहीं मानी। इधर उधर से कुछ धन का इंतजाम कर वह छोटी सी अंडे की दुकान लगा ली।
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इसके बदौलत उसके घर का खर्च चलने लगा, मगर पढ़ाई लिखाई के लिए धन की जरूरत को पूरा करने के लिए वह आसपास के घरों में चौका बर्तन करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे समय बीता तो बेटियां बड़ी हो गई। इसके बाद तरीबुन्निशा ने तीन बेटियों हसीना जरीना व शारजहां की शादी कर दी।
चौथी बेटी हिना छोटी थी, मगर उसकी रुचि खेल में थी। इसे देख मां ने उसको प्रोत्साहित किया। कई बार धन के चलते बाहर जाने में हिना को परेशानी भी हुई, मगर मां का हौसला दिक्कतों पर भारी पड़ा। प्रदेश स्तरीय टीम से करीब आठ प्रतियोगिताएं खेल चुकी हिना को पहली बार वर्ष 2016 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला। तब से लेकर अब तक वह चार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शिकरत कर अपनी प्रतिभा का दम दिखा चुकी है।
मां तरीबुन्निशा बेटी की उपलब्धि पर फूल नहीं समाती। कहती हैं कि बेटी एक दिन दुनिया भर में नाम कमाएगी। खेल उसकी जिंदगी है तो उसको मुकाम दिलाने के लिए चाहे जो करना पड़े करुंगी।