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Basti News: रिजल्ट की चिंता में खो रही मुस्कान..पढ़ाई के दबाव में बच्चे पड़ रहे बीमार

Mon, 23 Feb 2026 01:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 01:33 AM IST
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Smiles are lost in the worry of results... children are falling ill due to the pressure of studies.
जिला अस्पताल में परीक्षार्थी के अ​भिभावक को सुझाव देते मनो चिकित्सक डॉ. एके दूबे संवाद - फोटो : जहांगीराबाद में सजा खाटू श्याम का दरबार।
बस्ती। परीक्षा का तनाव और पढ़ाई का दबाव बच्चों को बीमार कर रहा है। रात-दिन परीक्षा की तैयारी से बच्चे डिप्रेशन, ओवर थिंकिंग, एंग्जायटी और सिरदर्द जैसी बीमारियाें से ग्रसित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना 8-10 बच्चे उपचार के लिए आ रहे हैं। मनोचिकित्सक इन बच्चों को दवा के साथ ही तनावमुक्त रहने के टिप्स देकर हौसला बढ़ा रहे हैं।
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सीबीएसई के अलावा यूपी बोर्ड की परीक्षा शुरू है। परीक्षा का दबाव बच्चों को बीमार कर रहा है। मनो रोग विशेषज्ञ डाॅ. एके दूबे ने बताया कि परीक्षा के समय बच्चों पर अच्छे नंबर लाने का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में तनाव बढ़ने के केस बढ़ जाते हैं। 10-15 दिनों से ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। तनाव ग्रस्त बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। रोजाना आठ-10 मामले आ रहे हैं। मनो चिकित्सक ने बताया कि ओपीडी में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के ऐसे परीक्षार्थी आए जिनपर अभिभावक का यह दबाव था कि रिश्तेदारी या पड़ोेस के घर वाला बच्चा 90 प्रतिशत अंक लाया था, उससे ज्यादा होना चाहिए।
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इससे बच्चे मनो रोग से ग्रसित हो जा रहे हैं। साथ ही कम अंक आने पर अभिभावकों के गुस्से का डर भी बच्चों को सता रहा है। ऐसे में बच्चे बीमार होकर अस्पताल आ रहे हैं। ऐसे अभिभावकों को समझाया गया है कि बच्चों को खुलकर परीक्षा देने दें, इससे उन पर तनाव कम होगा तो परिणाम बेहतर आएंगे। उन्होंने बताया कि स्वस्थ इंसान को छह घंटे की नींद जरूरी है। विद्यार्थियों और दिमागी काम करने वालों को सात से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। नींद की कमी से फोकस और याददाश्त में परेशानी आती है।
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उन्होंने कहा कि परीक्षा को प्रेशर के बजाय हौसला से दे। पढ़ाई पर फोकस करें न कि परीक्षा परिणाम पर। किसी परीक्षार्थी से तुलना न करें। अभिभावक खुद सालभर असेसमेंट करते रहें तो परिणाम ठीक आएगा। कहा कि हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और सीबीएसई के साथ ही नीट आदि के परीक्षार्थी भी इससे तनावग्रस्त होकर आते हैं, उनकी काउंसिलिंग करके उनके चेहरे पर मुस्कान देने की कोशिश हो रही है।

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ये बरतें सावधानियां

- परीक्षा के समय रिवीजन पर ध्यान दें, बच्चों की तुलना न करें

- दिनचर्या को सही रखें, पौष्टिक खाद्य पदार्थों का प्रयोग करें

- नियमित व्यायाम करें और कुछ देर आंखें बंदकर ध्यान लगाएं

- सोशल मीडिया से दूर रहें, थोड़ी देर मनोरंजन के साधनों का प्रयोग करें

- माता-पिता को भी बच्चों पर विशेष ध्याना देना चाहिए
- घर में माहौल शांत रखें, बच्चों पर अतिरिक्त दबाव न बनाएं

- सुनिश्चित करें कि बच्चे का स्क्रीन टाइम ज्यादा न हो।

- बच्चों के साथ बातचीत करते रहें, उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करें

कोट
जिला अस्पताल में मनो रोग विभाग में बच्चों की काउंसिलिंग की सुविधा है। साथ ही टेलीमानस की सहायता के लिए 14416 या 1800-891-4416 पर तनाव संबंधी लक्षण दिखने पर कॉल कर सकते हैं। 24 घंटे सुझाव की सुविधा है।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
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