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Basti News: खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर सरयू का जलस्तर, कटान तेज
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कुदरहा के मईपुर गांव में मकान से सटकर बहती सरयू
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बस्ती। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट के बावजूद सोमवार को मैदानी इलाकों में कटान तेज रही। कई स्थानों पर फसल लगे खेतों की जमीन कटकर नदी में समाती रही। विक्रमजोत, दुबौलिया में नदी तेजी से कटान कर रही है। इससे ग्रामीणों में डर बना हुआ है। वहीं, घटते जलस्तर के बाद भी दुश्वारियां कम नहीं हो रहीं। अब सरयू लाल निशान से सिर्फ एक सेंटीमीटर ऊपर है।
जलस्तर कम होने से लोग संक्रामक बीमारियों के फैलने को लेकर आशंका जता रहे हैं। सोमवार को घटते जलस्तर के चलते सरयू अब खतरे के निशान से अब एक सेंटीमीटर ऊपर है। इससे तटबंधों के आसपास कटान का खतरा और बढ़ गया है। वहीं पशुओं के सामने चारा संकट खड़ा हो गया है। पशुपालक नाव के सहारे अपनी दिनचर्या पूरी कर रहे हैं। अभी भी स्कूली बच्चों के लिए नाव व बोट चल रही है।
सरयू का कोप कहे या प्रकृति का खेल, हर साल झेलते हैं ग्रामीण
दुबौलिया। सरयू का कोप कहे या प्रकृति का खेल, हर साल ग्रामीण झेलते हैं। फिलहाल सरयू की लहरों को झेलना बाढ़ पीड़ितों की आदत बन गई है। प्रकृति की मार झेलने वाले सरयू किनारे बसे इन गांवों के लोगों को चार महीने बाढ़ का कहर झेलने की आदत बन गई है। यहां वर्ष के चार माह अनिश्चिता की स्थिति रहती है। आठ माह गेंहू, सरसो, परवल, तरबूज-खरबूज, व पशुपालन करते हैं जो इनकी जीविकोपार्जन का मुख्य साधन है। ब्लाॅक क्षेत्र के सुविकाबाबू, बलुईया, सतहा, आंशिक टेढवा के लोग हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं लेकिन वह अपना आशियाना नहीं छोड़ते हैं। जैसे-तैसे बारिश के चार महीने गुजारते हैं। सुविका बाबू गांव में करीब 65 परिवार के 300 ग्रामीण निवास करते हैं। यह गांव टापू जैसा है। अधिक बाढ़ आने पर यहां के लोग छतों पर रहते हैं। नीचे कमरों में पानी भर जाता है। सुविका गांव के बोधे कहते हैं कि सरयू मां की कृपा से ही हमारी जिंदगी चलती है। सरकार की तरफ से मोटर बोट लगाई जाती है। बाढ़ राहत सामाग्री भी बंटता है। सांसत झेलना अब आदत बन गई। खेती-किसानी से ही परिवार की गृहस्थी चलती है। चंदू कहते हैं कि हर वर्ष बाढ़ के आदी हो गए हैं। अगर तटबंध से गांव तक ऊंचा रास्ता बन जाता तो कुछ हद तक समस्या कम होती। जलस्तर कम हो रहा है, अगल-बगल गड्ढों में पानी भरा है। बीमारियों के फैलने का डर बढ़ जाता है। बलुईया गांव की किस्मती कहती हैं कि तटबंध के बीच में गांव है। बाढ़ तो बचपन से देख रहे हैं। जीव-जंतुओं का खतरा रहता है। मंगरा देवी कहती हैं कि बाढ़ के समय में तो लोग खूब आश्वासन देते हैं लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं। 2022 में बाढ़ बहुत तेज आई थी। इस वर्ष तो घरों के अगल-बगल पानी भरा है। बाढ़ अभिशाप बन गया है।
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लाल निशान पर पहुंची नदी, किनारों पर कटान से दहशत
विक्रमजोत। विक्रमजोत विकास क्षेत्र में नदी के बढ़े जलस्तर के बाद हो रही कमी से शुरू हुई कटान को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। नदी किनारे बसे गांव के ग्रामीण नदी के वेग को लेकर सहमे हुए हैं। बीते महीने सरयू नदी में हुई कटान से भूमि गवां चुके लोग डरे हुए हैं। वहीं, सरयू का जलस्तर लौटते हुए खतरे के निशान से पर पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार, सोमवार शाम पांच बजे सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से एक सेमी ऊपर 92.740 रिकार्ड किया गया। लोगों का कहना है कि इस बार नदी ने बाढ़ का विकराल रूप तो नहीं लिया पर कटान व जलभराव से परेशानियां बढ़ गई हैं। रानीपुर कठवनियां, केशवपुर, भरथापुर, कल्यानपुर के पड़ाव क्षेत्र, संदलपुर, भौसिया, कन्हईपुर, खेमराजपुर, शम्भूपुर, पूरे चेतन, पकड़ी संग्राम, अर्जुनपुर, अशोकपुर, संग्रामपुर,बेतावा, मड़ना माझा, माझा किता अव्वल सहित गांवों के किनारों पर नदी का दबाव है। झिनकाई, दुर्गा प्रसाद, संतोष कुमार ने बताया कि मौसम की मार व बाढ़ व कटान से स्थिति खराब हो गई है। बीडी तटबंध पर दुधौरा व काशीपुर के पास नदी तटबंधों से सटकर बह रही है। दुधौरा के पास स्थित संवेदनशील बनी हुई है।
जलस्तर कम होने से कटान वाले स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है।
दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड, बस्ती।
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जलस्तर कम होने से लोग संक्रामक बीमारियों के फैलने को लेकर आशंका जता रहे हैं। सोमवार को घटते जलस्तर के चलते सरयू अब खतरे के निशान से अब एक सेंटीमीटर ऊपर है। इससे तटबंधों के आसपास कटान का खतरा और बढ़ गया है। वहीं पशुओं के सामने चारा संकट खड़ा हो गया है। पशुपालक नाव के सहारे अपनी दिनचर्या पूरी कर रहे हैं। अभी भी स्कूली बच्चों के लिए नाव व बोट चल रही है।
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सरयू का कोप कहे या प्रकृति का खेल, हर साल झेलते हैं ग्रामीण
दुबौलिया। सरयू का कोप कहे या प्रकृति का खेल, हर साल ग्रामीण झेलते हैं। फिलहाल सरयू की लहरों को झेलना बाढ़ पीड़ितों की आदत बन गई है। प्रकृति की मार झेलने वाले सरयू किनारे बसे इन गांवों के लोगों को चार महीने बाढ़ का कहर झेलने की आदत बन गई है। यहां वर्ष के चार माह अनिश्चिता की स्थिति रहती है। आठ माह गेंहू, सरसो, परवल, तरबूज-खरबूज, व पशुपालन करते हैं जो इनकी जीविकोपार्जन का मुख्य साधन है। ब्लाॅक क्षेत्र के सुविकाबाबू, बलुईया, सतहा, आंशिक टेढवा के लोग हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं लेकिन वह अपना आशियाना नहीं छोड़ते हैं। जैसे-तैसे बारिश के चार महीने गुजारते हैं। सुविका बाबू गांव में करीब 65 परिवार के 300 ग्रामीण निवास करते हैं। यह गांव टापू जैसा है। अधिक बाढ़ आने पर यहां के लोग छतों पर रहते हैं। नीचे कमरों में पानी भर जाता है। सुविका गांव के बोधे कहते हैं कि सरयू मां की कृपा से ही हमारी जिंदगी चलती है। सरकार की तरफ से मोटर बोट लगाई जाती है। बाढ़ राहत सामाग्री भी बंटता है। सांसत झेलना अब आदत बन गई। खेती-किसानी से ही परिवार की गृहस्थी चलती है। चंदू कहते हैं कि हर वर्ष बाढ़ के आदी हो गए हैं। अगर तटबंध से गांव तक ऊंचा रास्ता बन जाता तो कुछ हद तक समस्या कम होती। जलस्तर कम हो रहा है, अगल-बगल गड्ढों में पानी भरा है। बीमारियों के फैलने का डर बढ़ जाता है। बलुईया गांव की किस्मती कहती हैं कि तटबंध के बीच में गांव है। बाढ़ तो बचपन से देख रहे हैं। जीव-जंतुओं का खतरा रहता है। मंगरा देवी कहती हैं कि बाढ़ के समय में तो लोग खूब आश्वासन देते हैं लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं। 2022 में बाढ़ बहुत तेज आई थी। इस वर्ष तो घरों के अगल-बगल पानी भरा है। बाढ़ अभिशाप बन गया है।
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लाल निशान पर पहुंची नदी, किनारों पर कटान से दहशत
विक्रमजोत। विक्रमजोत विकास क्षेत्र में नदी के बढ़े जलस्तर के बाद हो रही कमी से शुरू हुई कटान को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। नदी किनारे बसे गांव के ग्रामीण नदी के वेग को लेकर सहमे हुए हैं। बीते महीने सरयू नदी में हुई कटान से भूमि गवां चुके लोग डरे हुए हैं। वहीं, सरयू का जलस्तर लौटते हुए खतरे के निशान से पर पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार, सोमवार शाम पांच बजे सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से एक सेमी ऊपर 92.740 रिकार्ड किया गया। लोगों का कहना है कि इस बार नदी ने बाढ़ का विकराल रूप तो नहीं लिया पर कटान व जलभराव से परेशानियां बढ़ गई हैं। रानीपुर कठवनियां, केशवपुर, भरथापुर, कल्यानपुर के पड़ाव क्षेत्र, संदलपुर, भौसिया, कन्हईपुर, खेमराजपुर, शम्भूपुर, पूरे चेतन, पकड़ी संग्राम, अर्जुनपुर, अशोकपुर, संग्रामपुर,बेतावा, मड़ना माझा, माझा किता अव्वल सहित गांवों के किनारों पर नदी का दबाव है। झिनकाई, दुर्गा प्रसाद, संतोष कुमार ने बताया कि मौसम की मार व बाढ़ व कटान से स्थिति खराब हो गई है। बीडी तटबंध पर दुधौरा व काशीपुर के पास नदी तटबंधों से सटकर बह रही है। दुधौरा के पास स्थित संवेदनशील बनी हुई है।
जलस्तर कम होने से कटान वाले स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है।
दिनेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड, बस्ती।