{"_id":"66994e258fddef3a7106f484","slug":"saryu-crosses-warning-point-again-harvesting-begins-panic-among-villagers-basti-news-c-207-1-bst1001-120688-2024-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: चेतावनी बिंदु फिर पार कर गई सरयू... कटान शुरू, ग्रामीणों में दहशत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: चेतावनी बिंदु फिर पार कर गई सरयू... कटान शुरू, ग्रामीणों में दहशत
विज्ञापन
दुबौलिया। सरयू नदी इधर दो दिनों से फिर बढ़ने लगी है। जलस्तर में प्रत्येक घंटे पर एक से दो सेंटीमीटर की बढ़त दर्ज हो रही है। चौबीस घंटे में नदी चेतावनी बिंदु पार कर गई है। तटबंधों पर दबाव बढ़ना शुरू हो गया है। तटवर्ती गांवों में फिर से दहशत का माहौल सृजित होने लगा है। नदी कटान भी करना शुरू कर दी है।
दो दिन पहले तक नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। बाढ़ प्रभावित गांव सुबिका बाबू, आंशिक टेढ़वा में काफी राहत महसूस की गई। इधर, बारिश भी थम गई है। इन गांवों से बाढ़ का पानी हट गया है। लोगों की दिनचर्या पटरी पर लौट रही थी। इसी बीच नदी फिर ऊफान पर आने लगी है।
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम 5 बजे जलस्तर 92. 230 मीटर पर दर्ज किया गया है। जबकि चेतावनी बिंदु 91.73, और खतरे का निशान 92.730 मीटर पर है। नदी चेतावनी बिंदु पार कर खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। एक बार फिर सुबिका बाबू व आंशिक टेढ़वा गांव पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ खंड तटबंधों की निगरानी कर रहा है। सरयू नदी कटरिया गांव से लेकर शेरवाघाट तक कटान करनी शुरू कर दी है। कृषि योग्य भूमि नदी की धारा में समाहित हाे रही है। इससे किसानोें की चिंता बढ़ गई है।
विज्ञापन
...
नहीं पहुंची प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीम, संक्रमण का खतरा
विक्रमजोत। विकास क्षेत्र के तटबंध से सटे गांवों में फिलहाल बाढ़ का खतरा टला हुआ है। लेकिन, यहां आबादी वाले क्षेत्र बाढ़ का पानी हटने के बाद से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
बीडी तटबंध से सटे गांव सरवरपुर, चनहा, बघुआपार, लकडीपकडी, नरसिंहपुर, चंद्रपलिया, खेमराजपुर, पूरे चेतन, कन्हईपुर, संदलपुर, चांदपुर, लोलपुर एवं विक्रमजोत तटबंध के किनारे बसे गांव कल्यानपुर, भरथापुर, पड़ाव, बाघानाला, फूलडीह, गौरियानैन, रानीपुर कठवनियां में प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी भर जाता है। नदी का जलस्तर घटने पर बाढ़ का पानी खिसकता है। इस बार भी इन गांवों में एक सप्ताह तक बाढ का पानी भरा रहा।
अब पानी खिसकने के बाद यहां कीचड़ एवं घास- फूस में सड़न पैदा हो गई है। जिससे संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा है।बावजूद इसके स्वास्थ्य टीम इन प्रभावित गांवों में अभी तक नहीं पहुंची है। हितलाल, शिवसिंह, हरीकेश सिंह, जगदीश यादव, चंद्रभान सिंह आदि ने बताया कि तमाम महिलाएं, बच्चें डायरिया, बुखार, सरदर्द और फोड़े फुंसी की बीमारी से त्रस्त है। अभी तक स्वास्थ्य टीमों ने गांव में दौरा नहीं किया है। किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं पहुंचाई गई है।
प्रतिवर्ष टीकाकरण और दवाओं का वितरण करने टीम आती थी। लेकिन इस बार आशा से लेकर सीएचसी का कोई जिम्मेदार झांकने भी नहीं पहुंचा है। इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. आसिफ फारूखी ने बताया कि संक्रमण की जानकारी मिली है। स्वास्थ्य टीम रवाना की जा चुकी है। यह एक सप्ताह तक गांव में कैंप कर संक्रमण रोधी दवाओं का वितरण करेगी। संवाद
विज्ञापन
दो दिन पहले तक नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। बाढ़ प्रभावित गांव सुबिका बाबू, आंशिक टेढ़वा में काफी राहत महसूस की गई। इधर, बारिश भी थम गई है। इन गांवों से बाढ़ का पानी हट गया है। लोगों की दिनचर्या पटरी पर लौट रही थी। इसी बीच नदी फिर ऊफान पर आने लगी है।
विज्ञापन
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम 5 बजे जलस्तर 92. 230 मीटर पर दर्ज किया गया है। जबकि चेतावनी बिंदु 91.73, और खतरे का निशान 92.730 मीटर पर है। नदी चेतावनी बिंदु पार कर खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। एक बार फिर सुबिका बाबू व आंशिक टेढ़वा गांव पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ खंड तटबंधों की निगरानी कर रहा है। सरयू नदी कटरिया गांव से लेकर शेरवाघाट तक कटान करनी शुरू कर दी है। कृषि योग्य भूमि नदी की धारा में समाहित हाे रही है। इससे किसानोें की चिंता बढ़ गई है।
विज्ञापन
...
नहीं पहुंची प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीम, संक्रमण का खतरा
विक्रमजोत। विकास क्षेत्र के तटबंध से सटे गांवों में फिलहाल बाढ़ का खतरा टला हुआ है। लेकिन, यहां आबादी वाले क्षेत्र बाढ़ का पानी हटने के बाद से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
बीडी तटबंध से सटे गांव सरवरपुर, चनहा, बघुआपार, लकडीपकडी, नरसिंहपुर, चंद्रपलिया, खेमराजपुर, पूरे चेतन, कन्हईपुर, संदलपुर, चांदपुर, लोलपुर एवं विक्रमजोत तटबंध के किनारे बसे गांव कल्यानपुर, भरथापुर, पड़ाव, बाघानाला, फूलडीह, गौरियानैन, रानीपुर कठवनियां में प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी भर जाता है। नदी का जलस्तर घटने पर बाढ़ का पानी खिसकता है। इस बार भी इन गांवों में एक सप्ताह तक बाढ का पानी भरा रहा।
अब पानी खिसकने के बाद यहां कीचड़ एवं घास- फूस में सड़न पैदा हो गई है। जिससे संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा है।बावजूद इसके स्वास्थ्य टीम इन प्रभावित गांवों में अभी तक नहीं पहुंची है। हितलाल, शिवसिंह, हरीकेश सिंह, जगदीश यादव, चंद्रभान सिंह आदि ने बताया कि तमाम महिलाएं, बच्चें डायरिया, बुखार, सरदर्द और फोड़े फुंसी की बीमारी से त्रस्त है। अभी तक स्वास्थ्य टीमों ने गांव में दौरा नहीं किया है। किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं पहुंचाई गई है।
प्रतिवर्ष टीकाकरण और दवाओं का वितरण करने टीम आती थी। लेकिन इस बार आशा से लेकर सीएचसी का कोई जिम्मेदार झांकने भी नहीं पहुंचा है। इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. आसिफ फारूखी ने बताया कि संक्रमण की जानकारी मिली है। स्वास्थ्य टीम रवाना की जा चुकी है। यह एक सप्ताह तक गांव में कैंप कर संक्रमण रोधी दवाओं का वितरण करेगी। संवाद