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चार करोड़ से संवरेगी वनविहार की सूरत
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चार करोड़ से संवरेगी वनविहार की सूरत
बस्ती। वर्षों से उपेक्षित वनविहार की सूरत जल्द ही संवरने वाली है। इसके लिए सांसद की ओर से चार करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मुहर लगने के बाद यहां सुंदरीकरण का काम शुरू होगा।
वर्ष 1988 में स्थापित संत रविदास वन विहार दिन ढलने तक बच्चों की किलकारियों से आबाद रहता था। यहां लगे तरह-तरह के फूलों की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती थीं। लगभग 15 वर्ष तक इसकी सुंदरता लोगों को लुभाती रही। समय बीतने के साथ ही इसकी सूरत बिगड़ती चली गई। अब आलम यह है कि भीतर लगे झूले टूट गए हैं। पार्क की हालत यह है कि आकर्षण का केंद्र रहा फौव्वारा, पैडल बोट, वाच टावर, एक्यूवेरियम समेत अन्य मनोरंजन के संसाधन धन के अभाव में शोपीस बनकर रह गए हैं। यदि कोई भटककर उधर चला भी जाता हैं तो पार्क की बदहाली को देखकर मायूसी के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं लगता। वन विहार में प्रवेश करते ही सबसे पहले वर्षों पूर्व निर्मित खड़ंजा मुसीबत का सबब बन जाता है। भय यह लगता कि कहीं किसी का पैर न फिसल जाए। पार्क में बच्चों को झूला झूलने का सपना देखना ही छोड़ देना चाहिए। यदि गलती से चरखी की तरफ बढ़ गए तो दांतों तले अंगुली दबा लेना पड़ेगा। वाच टावर की स्थिति यह है कि यहां से चारों तरफ का नजारा देखने के बजाय आप की लोगों की नजर से गायब हो जाएंगे, क्यों कि वाच टावर चारों तरफ झाड़ियों से घिरा हुआ है।
पांच लाख किए जा चुके हैं खर्च
हाल ही में वन विभाग की ओर से इस पार्क पर पांच लाख रुपये रंगाई पुताई के नाम पर खर्च कर दिए गए। झूले आदि की दशा जस की तस बनी हुई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
डीएफओ नवीन प्रकाश शाक्य कहते हैं कि सांसद की ओर से शासन को चार करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। हाल ही में वन विहार कि रंगाई पुताई कराई गई है। साथ ही कबीर कुटीर की भी मरम्मत कराई गई है। इस कार्य में पांच लाख रुपये खर्च हुए हैं।
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बस्ती। वर्षों से उपेक्षित वनविहार की सूरत जल्द ही संवरने वाली है। इसके लिए सांसद की ओर से चार करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मुहर लगने के बाद यहां सुंदरीकरण का काम शुरू होगा।
वर्ष 1988 में स्थापित संत रविदास वन विहार दिन ढलने तक बच्चों की किलकारियों से आबाद रहता था। यहां लगे तरह-तरह के फूलों की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती थीं। लगभग 15 वर्ष तक इसकी सुंदरता लोगों को लुभाती रही। समय बीतने के साथ ही इसकी सूरत बिगड़ती चली गई। अब आलम यह है कि भीतर लगे झूले टूट गए हैं। पार्क की हालत यह है कि आकर्षण का केंद्र रहा फौव्वारा, पैडल बोट, वाच टावर, एक्यूवेरियम समेत अन्य मनोरंजन के संसाधन धन के अभाव में शोपीस बनकर रह गए हैं। यदि कोई भटककर उधर चला भी जाता हैं तो पार्क की बदहाली को देखकर मायूसी के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं लगता। वन विहार में प्रवेश करते ही सबसे पहले वर्षों पूर्व निर्मित खड़ंजा मुसीबत का सबब बन जाता है। भय यह लगता कि कहीं किसी का पैर न फिसल जाए। पार्क में बच्चों को झूला झूलने का सपना देखना ही छोड़ देना चाहिए। यदि गलती से चरखी की तरफ बढ़ गए तो दांतों तले अंगुली दबा लेना पड़ेगा। वाच टावर की स्थिति यह है कि यहां से चारों तरफ का नजारा देखने के बजाय आप की लोगों की नजर से गायब हो जाएंगे, क्यों कि वाच टावर चारों तरफ झाड़ियों से घिरा हुआ है।
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पांच लाख किए जा चुके हैं खर्च
हाल ही में वन विभाग की ओर से इस पार्क पर पांच लाख रुपये रंगाई पुताई के नाम पर खर्च कर दिए गए। झूले आदि की दशा जस की तस बनी हुई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
डीएफओ नवीन प्रकाश शाक्य कहते हैं कि सांसद की ओर से शासन को चार करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। हाल ही में वन विहार कि रंगाई पुताई कराई गई है। साथ ही कबीर कुटीर की भी मरम्मत कराई गई है। इस कार्य में पांच लाख रुपये खर्च हुए हैं।
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