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संसाधन भरपूर, विशेषज्ञ व टेक्नीशियन का इंतजार
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महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज का भवन।
- फोटो : BASTI
संसाधन भरपूर, विशेषज्ञ व टेक्नीशियन का इंतजार
मेडिकल कॉलेज में तीन ऑक्सीजन प्लांट के लिए तकनीकी हाथों की जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोरोना के नए वैरिएंट ने फिर से सबको असहज कर दिया है, मगर मेडिकल कॉलेज में तैयारी अपूर्ण है। कॉलेज में संसाधन तो भरपूर हैं, मगर विशेषज्ञ व टेक्नीशियन की कमी है। यदि जरूरत पड़ी तो ऑक्सीजन जनरेटर व वेंटिलेटर संचालन में दिक्कत खड़ी हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन इनकी भर्ती के लिए कई पत्र शासन को भेज चुका है, लेकिन विशेषज्ञ, टेकभनीशियन व ऑपरेटर नहीं मिल सकेहैं।
जिले में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली को अधिकृत किया गया है। व्यवस्था को चलाने के लिए 120 वेंटिलेटर युक्त बेड व सिलिंडर से ऑक्सीजन की व्यवस्था दूसरी लहर के समय हुई थी, मगर अब सबकुछ बदल चुका है। अस्पताल में जरूरत पूरी करने के लिए तीन ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराए गए हैं। इन्हें सीधे वेंटिलेटर से जोड़ा गया है।
ऑक्सीजन प्लांट के लिए ऑपरेटर की तैनाती के लिए कॉलेज प्रशासन ने शासन को पत्र भेजा है, मगर अब तक एक भी तकनीशियन नहीं मिल पाया है। जबकि वेंटिलेटर संचालन के लिए करीब 30 तथा ऑक्सीजन प्लांट के लिए 18 ऑपरेटरों की जरूरत है। ऐसे में न तो वेंटिलेटर संचालित हो पा रहा है और न ऑक्सीजन प्लांट।
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जिम्मेदार कहते हैं कि वेंटिलेटर व ऑक्सीजन प्लांट संचालित करने के लिए कुछ लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, मगर यह अल्पकालिक व्यवस्था है। इमरजेंसी में जब डिमांड बढ़ जाएगी तब स्थिति नहीं संभलेगी। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सभी इस काम को कर सकते हैं। इतना प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह जरूर है कि यहां ऑक्सीजन प्लांट व वेंटिलेटर के लिए तकनीकी हाथ नहीं हैं। शासन को पत्र लिखा गया है। कोरोना की नई लहर से निपटने के लिए कॉलेज प्रशासन तैयारी को अंतिम रूप दे चुका है।
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मेडिकल कॉलेज में तीन ऑक्सीजन प्लांट के लिए तकनीकी हाथों की जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोरोना के नए वैरिएंट ने फिर से सबको असहज कर दिया है, मगर मेडिकल कॉलेज में तैयारी अपूर्ण है। कॉलेज में संसाधन तो भरपूर हैं, मगर विशेषज्ञ व टेक्नीशियन की कमी है। यदि जरूरत पड़ी तो ऑक्सीजन जनरेटर व वेंटिलेटर संचालन में दिक्कत खड़ी हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन इनकी भर्ती के लिए कई पत्र शासन को भेज चुका है, लेकिन विशेषज्ञ, टेकभनीशियन व ऑपरेटर नहीं मिल सकेहैं।
जिले में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली को अधिकृत किया गया है। व्यवस्था को चलाने के लिए 120 वेंटिलेटर युक्त बेड व सिलिंडर से ऑक्सीजन की व्यवस्था दूसरी लहर के समय हुई थी, मगर अब सबकुछ बदल चुका है। अस्पताल में जरूरत पूरी करने के लिए तीन ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराए गए हैं। इन्हें सीधे वेंटिलेटर से जोड़ा गया है।
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ऑक्सीजन प्लांट के लिए ऑपरेटर की तैनाती के लिए कॉलेज प्रशासन ने शासन को पत्र भेजा है, मगर अब तक एक भी तकनीशियन नहीं मिल पाया है। जबकि वेंटिलेटर संचालन के लिए करीब 30 तथा ऑक्सीजन प्लांट के लिए 18 ऑपरेटरों की जरूरत है। ऐसे में न तो वेंटिलेटर संचालित हो पा रहा है और न ऑक्सीजन प्लांट।
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जिम्मेदार कहते हैं कि वेंटिलेटर व ऑक्सीजन प्लांट संचालित करने के लिए कुछ लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, मगर यह अल्पकालिक व्यवस्था है। इमरजेंसी में जब डिमांड बढ़ जाएगी तब स्थिति नहीं संभलेगी। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सभी इस काम को कर सकते हैं। इतना प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह जरूर है कि यहां ऑक्सीजन प्लांट व वेंटिलेटर के लिए तकनीकी हाथ नहीं हैं। शासन को पत्र लिखा गया है। कोरोना की नई लहर से निपटने के लिए कॉलेज प्रशासन तैयारी को अंतिम रूप दे चुका है।