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Basti News: गंदगी के अंबार में स्वच्छता सर्वेक्षण कराने की तैयारी
Tue, 18 Jul 2023 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 18 Jul 2023 11:44 PM IST
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बस्ती। गंदगी के अंबार के बीच स्वच्छता सर्वेक्षण कराने की तैयारी नगर पालिका में फिर शुरू हो गई है। केंद्रीय स्वच्छता टीम के सर्वेक्षण में पिछले दो साल में यहां की रैंकिंग घटी हुई है। इसमें बहुत खास सुधार नहीं हो पाया। 2023 की रैंकिंग के लिए सर्वेक्षण का समय फिर करीब आ गया है। अगस्त में टीम कभी भी पहुंच सकती है।
नगर पालिका क्षेत्र में बाहर से दिखने वाला शहरी चमक-दमक फीकी है। लाख दावों के बावजूद भी इधर-उधर नजर दौड़ाने पर गंदगी दिख जा रही है। सड़क के किनारे कूड़ा पसरा है, तो नालियां और नाले सघन आबादी के बीच खुले पड़े हैं। यह आमजन के लिए जोखिम भरा है, तो सेहत के लिए नुकसान भी है। प्रमुख मार्गों की सड़कें, पटरियां अधिकांश जगहों पर उखड़ी हुई है। बारिश होने के चलते शहर की सूरत और बिगड़ गई है।
खुली जगहों पर झांड़-झंखाड़ उग आए हैं। स्वच्छता की दृष्टि से मुहल्लों की दशा और दयनीय है। कई जगहों पर नालियां खुले में बह रही है। सड़कें टूटी हुई हैं। कूड़ा रखने की व्यवस्था भी लचर हो गई है। अधिकांश कूड़ेदान जर्जर हो चुके हैं। लोग बाहर ही कूड़ा फेंक रहे हैं। इन दुश्वारियों के बीच स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर पालिका की रैंकिंग किस पायदान पर ठहरेगी यह भगवान ही भरोसे है। वहीं इस बार सर्वेक्षण का अंक भी 7500 से बढ़कर 9500 हो गया है।
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यहां आबादी के बीच खुले हैं नाले
गांधीनगर क्षेत्र में तुरकहिया मुहल्ले से निकलता मुख्य नाला खुला है। बगल से रास्ता भी है। राहगीरों को आनेजाने में नाले में गिरने का खतरा रहता है, तो दुर्गंध भी हर समय उठता है। वहीं कटेश्वरपार्क के निकट से मालवीय रोड पिकौरा शिवगुलाम होते हुए नरहरिया को जाने वाला मुख्य नाला भी ढका नहीं जा सका है, जिससे नागरिकों को गंदगी और दुर्घटना दोनों का सामना करना पड़ रहा है। मालवीय रोड पर दोनों तरफ बनाए गए नाले खुले ही रखे गए हैं। सबसे खराब स्थिति स्टेशन रोड की है। यहां सड़क के किनारे स्थित नालों से सर्वाधिक दुर्गंध उठती है। जानवरों के अपशिष्ट फेंके जाने से राह चलना दूभर रहता है।
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प्रमुख सड़कें भी बदहाल
शहर की प्रमुख सड़कें भी बदहाल हो चुकी है। मालवीय मार्ग, ब्लाक रोड, धर्मशाला मार्ग, गांव गोड़िया मार्ग, मालवीय रोड से मंगला कालोनी मार्ग, रोडवेज से रेलवे स्टेशन मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन सड़कों में जगह-जगह गड्ढे बन आए है। नगर पालिका धन के अभाव में मरम्मत कार्य करने में लाचार है।
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महापुरुषों की प्रतिमा स्थलों की भी स्थिति खराब
शहर के एक दर्जन प्रमुख चौराहों पर स्थापित विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमा स्थलों की भी स्थिति रखरखाव के अभाव में बिगड़ गई है। रंग रोगन न होने से कुछ मूर्तियां बदरंग हो गई है। सुभाष तिराहे पर फव्वारा कई साल से खराब है। रोडवेज स्थित भगत सिंह का प्रतिमा स्थल अतिक्रमण की चपेट में है। शास्त्री चौक पर भी रंगाई पुताई काफी दिनों से नहीं हुई है।
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डिवाइडर के किनारे कराई जा रही सफाई
शहर की प्रमुख सड़कों पर बनाए गए डिवाइडर के किनारे धूल जमी है। नगर पालिका की ओर से इसे साफ कराया जा रहा है, लेकिन इस धूल को फावड़े से एकत्र कर वहीं छोड़ दिया जा रहा है। वाहनों के आने जाने पर फिर धूल इधर-उधर बिखर जा रही है।
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स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के लिए केंद्रीय टीम कभी भी आ सकती है। इसको लेकर तैयारियां तेज कर दी गई है। दुकानदारों को डस्टबिन रखने और कचरा न फैलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। सामुदायिक शौचालयों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से वाल पेंटिंग कराई जाएगी। शहर में कूड़ा निस्तारण न होने से नगर पालिका को स्वच्छता सर्वेक्षण में बहुत अधिक फायदा अभी तक नहीं मिला है। क्योंकि एक हजार अंक कूड़े के अच्छी तरह से निस्तारण पर ही मिलते है। प्रयास किया जा रहा है कि इस बार नगर पालिका को स्वच्छता अवार्ड हासिल हो जाए।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका
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नपाप बस्ती की रैंकिंग पर एक नजर
वर्ष... रैंक
नेशनल रैंकिंग
2019-312
2020-272
2021-340
2022-231
स्टेट रैंकिंग
2020-38
2021-54
2022-44
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नगर पालिका क्षेत्र में बाहर से दिखने वाला शहरी चमक-दमक फीकी है। लाख दावों के बावजूद भी इधर-उधर नजर दौड़ाने पर गंदगी दिख जा रही है। सड़क के किनारे कूड़ा पसरा है, तो नालियां और नाले सघन आबादी के बीच खुले पड़े हैं। यह आमजन के लिए जोखिम भरा है, तो सेहत के लिए नुकसान भी है। प्रमुख मार्गों की सड़कें, पटरियां अधिकांश जगहों पर उखड़ी हुई है। बारिश होने के चलते शहर की सूरत और बिगड़ गई है।
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खुली जगहों पर झांड़-झंखाड़ उग आए हैं। स्वच्छता की दृष्टि से मुहल्लों की दशा और दयनीय है। कई जगहों पर नालियां खुले में बह रही है। सड़कें टूटी हुई हैं। कूड़ा रखने की व्यवस्था भी लचर हो गई है। अधिकांश कूड़ेदान जर्जर हो चुके हैं। लोग बाहर ही कूड़ा फेंक रहे हैं। इन दुश्वारियों के बीच स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर पालिका की रैंकिंग किस पायदान पर ठहरेगी यह भगवान ही भरोसे है। वहीं इस बार सर्वेक्षण का अंक भी 7500 से बढ़कर 9500 हो गया है।
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यहां आबादी के बीच खुले हैं नाले
गांधीनगर क्षेत्र में तुरकहिया मुहल्ले से निकलता मुख्य नाला खुला है। बगल से रास्ता भी है। राहगीरों को आनेजाने में नाले में गिरने का खतरा रहता है, तो दुर्गंध भी हर समय उठता है। वहीं कटेश्वरपार्क के निकट से मालवीय रोड पिकौरा शिवगुलाम होते हुए नरहरिया को जाने वाला मुख्य नाला भी ढका नहीं जा सका है, जिससे नागरिकों को गंदगी और दुर्घटना दोनों का सामना करना पड़ रहा है। मालवीय रोड पर दोनों तरफ बनाए गए नाले खुले ही रखे गए हैं। सबसे खराब स्थिति स्टेशन रोड की है। यहां सड़क के किनारे स्थित नालों से सर्वाधिक दुर्गंध उठती है। जानवरों के अपशिष्ट फेंके जाने से राह चलना दूभर रहता है।
प्रमुख सड़कें भी बदहाल
शहर की प्रमुख सड़कें भी बदहाल हो चुकी है। मालवीय मार्ग, ब्लाक रोड, धर्मशाला मार्ग, गांव गोड़िया मार्ग, मालवीय रोड से मंगला कालोनी मार्ग, रोडवेज से रेलवे स्टेशन मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन सड़कों में जगह-जगह गड्ढे बन आए है। नगर पालिका धन के अभाव में मरम्मत कार्य करने में लाचार है।
महापुरुषों की प्रतिमा स्थलों की भी स्थिति खराब
शहर के एक दर्जन प्रमुख चौराहों पर स्थापित विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमा स्थलों की भी स्थिति रखरखाव के अभाव में बिगड़ गई है। रंग रोगन न होने से कुछ मूर्तियां बदरंग हो गई है। सुभाष तिराहे पर फव्वारा कई साल से खराब है। रोडवेज स्थित भगत सिंह का प्रतिमा स्थल अतिक्रमण की चपेट में है। शास्त्री चौक पर भी रंगाई पुताई काफी दिनों से नहीं हुई है।
डिवाइडर के किनारे कराई जा रही सफाई
शहर की प्रमुख सड़कों पर बनाए गए डिवाइडर के किनारे धूल जमी है। नगर पालिका की ओर से इसे साफ कराया जा रहा है, लेकिन इस धूल को फावड़े से एकत्र कर वहीं छोड़ दिया जा रहा है। वाहनों के आने जाने पर फिर धूल इधर-उधर बिखर जा रही है।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के लिए केंद्रीय टीम कभी भी आ सकती है। इसको लेकर तैयारियां तेज कर दी गई है। दुकानदारों को डस्टबिन रखने और कचरा न फैलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। सामुदायिक शौचालयों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से वाल पेंटिंग कराई जाएगी। शहर में कूड़ा निस्तारण न होने से नगर पालिका को स्वच्छता सर्वेक्षण में बहुत अधिक फायदा अभी तक नहीं मिला है। क्योंकि एक हजार अंक कूड़े के अच्छी तरह से निस्तारण पर ही मिलते है। प्रयास किया जा रहा है कि इस बार नगर पालिका को स्वच्छता अवार्ड हासिल हो जाए।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका
नपाप बस्ती की रैंकिंग पर एक नजर
वर्ष... रैंक
नेशनल रैंकिंग
2019-312
2020-272
2021-340
2022-231
स्टेट रैंकिंग
2020-38
2021-54
2022-44