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Basti News: शहर की सड़कें ...जगह-जगह गड्ढे और उखड़े पैबंद से आवागमन दुष्कर
Mon, 05 Jun 2023 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 05 Jun 2023 01:04 AM IST
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दक्षिण दरवाजा से रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क पर गड्ढे से बचकर निकलने की कोशिश करता कार चालक।
बस्ती। शहर की सड़कों पर चलना दूभर हो गया है। शहर के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। इससे छोटे-बड़े सभी वाहन हिचकोले खा रहे हैं। उबड़-खाबड़ सड़क पर अक्सर कोई न कोई राहगीर दुर्घटना का शिकार बन रहा है। यातायात का दबाव बढ़ते ही परेशानी और बढ़ जा रही है। वाहन चलाने वाले हर व्यक्ति की इसी उधेड़-बुन में रहता है कि सामने और दाएं-बाएं चल रहे वाहनों से सुरक्षित रहे या फिर सड़क पर बने गड्ढों में लड़खड़ाने से बचा जाए। इसी चक्कर में अक्सर वाहनों की भिड़ंत भी हो जा रही है।
नगर पालिका परिषद के अधीन शहर में लगभग 60 किलोमीटर लंबाई के प्रमुख मार्ग हैं। जिन पर मंडल मुख्यालय की समूची यातायात व्यवस्था निर्भर करती है। इसमें अधिकांश सड़कों के रखरखाव का इंतजाम नगर पालिका के पास नहीं है। बजट के अभाव में सड़कों के चौड़ीकरण एवं सुंदरीकरण की कौन कहे, मरम्मत कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे सड़कें बदहाल हो गई हैं। एक-दो सड़कों को छोड़ दें तो सकुशल यात्रा किसी मार्ग पर संभव नहीं है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़े पैच कार्य शहरी यातायात पर ब्रेक लगा दे रहे हैं। गनीमत है कि छुट्टियां चल रही हैं। आवागमन का भार कुछ कम हुआ है। वरना सामान्य दिनों में आवागमन का दबाव बढ़ते ही टूटी सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल रहता है।
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मालवीय मार्ग पर उखड़ गया है पैच कार्य
शहर के फव्वारा चौराहे से शुरू होने वाला मालवीय मार्ग रोडवेज नेहरू तिराहा पर खत्म होता है। तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। कई जगहों पर पैच कार्य उखड़े हुए है। बैरिहवा चौराहा, रौता चौराहा, विद्युत विभाग कार्यालय के सामने और नेहरू तिराहे के पास यह सड़क टूट चुकी है। इसके अलावा डिवाइडर भी क्षतिग्रस्त अवस्था में तब्दील है। इस मार्ग पर रोडवेज बसों के अलावा शहरी आवागमन का भार अधिक है। ऐसे में सुबह यातायात बहाल होते ही राहगीरों की दुर्गति शुरू हो जा रही है।
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ब्लाक रोड और धर्मशाला रोड भी खस्ताहाल
शहर को सीधे हाईवे से जोड़ने वाला ब्लाक रोड भी खस्ताहाल हो चुका है। दो किलोमीटर लंबी यह सड़क बड़ेवन से लेकर रौता चौराहे तक जगह-जगह क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो गई है। इससे बचने के चक्कर में दो पहिया, चार पहिया वाहन सवार अक्सर अनियंत्रित हो जा रहे हैं। इस मार्ग पर बहुत संभलकर यात्रा करनी पड़ रही है। यहीं हाल रौता चौराहा से धर्मशाला मार्ग का भी है। मुख्य बाजार गांधीनगर से जोड़ने वाली यह सड़क कई जगहों पर टूट चुकी है। यहां भी लोगों की सुगम यात्रा नहीं हो पा रही है।
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दक्षिण दरवाजा-रेलवे स्टेशन मार्ग पर वाहन खा रहे हिचकोले
दक्षिण दरवाजा-रेलवे स्टेशन मार्ग पर वाहनों को हिचकोले खाकर यात्रा पूरी करनी पड़ रही है। इस सड़क का लगभग पांच वर्ष पूर्ण डिवाइडर निर्माण के साथ चौड़ीकरण का कार्य कराया गया था। देखरेख के अभाव में अब यह सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जगह-जगह अनियमित आकार के गड्ढे बन गए हैं। कई जगहों पर पैच कार्य भी उखड़ गया है। उससे बचने के लिए वाहनों को दाएं-बाएं अचानक मोड़ना पड़ता है। इस दौरान दुर्घटना की आशंका प्रबल हो जाती है।
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किसी मार्ग पर हरियाली की व्यवस्था नहीं
शहर के किसी भी प्रमुख मार्ग पर हरियाली की व्यवस्था नहीं हैं। चिलचिलाती धूप में यात्रा के दौरान यह कमी हर राहगीर को अखरती है। समूचे में किसी भी राहगीर को सड़क के किनारे छाव नहीं मिलेगा। दो साल पहले मालवीय मार्ग पर नगर पालिका की ओर से ब्रिकगार्ड के साथ पौधा रोपण की पहल की गई थी। लाखों रुपये खर्च भी हुए। लेकिन रखवाली नहीं हो पाई। नतीजा पौधों के विकसित होने को कौन कहे ब्रिकगार्ड के ईट भी मौके पर नहीं बचे हैं। रेलवे स्टेशन मार्ग, गांधीनगर, ब्लाक रोड, कोतवाली मार्ग, पचपेड़िया मार्ग सभी हरियाली से सूने हैं।
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शहर की सड़कों के मरम्मत का कार्य बेहद जरूरी है। सड़कों के दोनों तरफ ड्रेनेज सिस्टम होना चाहिए। यहां तो सड़क पर ही पानी लगता है। इसलिए पैच कार्य उखड़ जाते हैं। सालोसाल दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। -पवन श्रीवास्तव, स्टेशन रोड, बस्ती।
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किसी भी शहर की सुंदरता वहां की सड़क, नाली और पानी की व्यवस्था पर निर्भर करती है। यहां तीनों की स्थिति दयनीय है। ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर चलना खतरनाक हो गया है। गड्ढों से बचने के लिए चोटिल तक होना पड़ता है। -मिथिलेश श्रीवास्तव, जखनी।
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सड़कों की समस्या का स्थाई निदान प्रशासन के पास नहीं है। रेलवे स्टेशन जाना हो या कचहरी हर तरफ गड्ढों की मुसीबत है। संभलकर न चलिए तो अनहोनी कहीं हो सकती है। आवाज उठने पर केवल कुछ गड्ढों को राबिश से भरकर छोड़ दिया जाता है।
-अजय कुमार, स्टेशन रोड।
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बेहतर सड़कों की सुविधा सबसे जरूरी है। इससे मरीज, स्कूली बच्चे या आम नागरिक सभी को सुरक्षित यात्रा करने का अवसर मिलता है। यह दुर्भाग्य है कि अपने शहर की सड़कों की दशा अन्य शहरों की तुलना में बेहद दयनीय है। -बाबूलाल, दक्षिण दरवाजा।
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बजट के अभाव में सड़कों का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। फिर भी गड्ढों को भरवाया जा रहा है। धन उपलब्ध होते ही मरम्मत कार्य भी शुरू हो जाएगा। वैसे पूर्व में मरम्मत कार्य का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी में भी भेजा जा चुका है।
दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद, बस्ती।
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नगर पालिका परिषद के अधीन शहर में लगभग 60 किलोमीटर लंबाई के प्रमुख मार्ग हैं। जिन पर मंडल मुख्यालय की समूची यातायात व्यवस्था निर्भर करती है। इसमें अधिकांश सड़कों के रखरखाव का इंतजाम नगर पालिका के पास नहीं है। बजट के अभाव में सड़कों के चौड़ीकरण एवं सुंदरीकरण की कौन कहे, मरम्मत कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे सड़कें बदहाल हो गई हैं। एक-दो सड़कों को छोड़ दें तो सकुशल यात्रा किसी मार्ग पर संभव नहीं है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़े पैच कार्य शहरी यातायात पर ब्रेक लगा दे रहे हैं। गनीमत है कि छुट्टियां चल रही हैं। आवागमन का भार कुछ कम हुआ है। वरना सामान्य दिनों में आवागमन का दबाव बढ़ते ही टूटी सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल रहता है।
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मालवीय मार्ग पर उखड़ गया है पैच कार्य
शहर के फव्वारा चौराहे से शुरू होने वाला मालवीय मार्ग रोडवेज नेहरू तिराहा पर खत्म होता है। तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। कई जगहों पर पैच कार्य उखड़े हुए है। बैरिहवा चौराहा, रौता चौराहा, विद्युत विभाग कार्यालय के सामने और नेहरू तिराहे के पास यह सड़क टूट चुकी है। इसके अलावा डिवाइडर भी क्षतिग्रस्त अवस्था में तब्दील है। इस मार्ग पर रोडवेज बसों के अलावा शहरी आवागमन का भार अधिक है। ऐसे में सुबह यातायात बहाल होते ही राहगीरों की दुर्गति शुरू हो जा रही है।
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ब्लाक रोड और धर्मशाला रोड भी खस्ताहाल
शहर को सीधे हाईवे से जोड़ने वाला ब्लाक रोड भी खस्ताहाल हो चुका है। दो किलोमीटर लंबी यह सड़क बड़ेवन से लेकर रौता चौराहे तक जगह-जगह क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो गई है। इससे बचने के चक्कर में दो पहिया, चार पहिया वाहन सवार अक्सर अनियंत्रित हो जा रहे हैं। इस मार्ग पर बहुत संभलकर यात्रा करनी पड़ रही है। यहीं हाल रौता चौराहा से धर्मशाला मार्ग का भी है। मुख्य बाजार गांधीनगर से जोड़ने वाली यह सड़क कई जगहों पर टूट चुकी है। यहां भी लोगों की सुगम यात्रा नहीं हो पा रही है।
दक्षिण दरवाजा-रेलवे स्टेशन मार्ग पर वाहन खा रहे हिचकोले
दक्षिण दरवाजा-रेलवे स्टेशन मार्ग पर वाहनों को हिचकोले खाकर यात्रा पूरी करनी पड़ रही है। इस सड़क का लगभग पांच वर्ष पूर्ण डिवाइडर निर्माण के साथ चौड़ीकरण का कार्य कराया गया था। देखरेख के अभाव में अब यह सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जगह-जगह अनियमित आकार के गड्ढे बन गए हैं। कई जगहों पर पैच कार्य भी उखड़ गया है। उससे बचने के लिए वाहनों को दाएं-बाएं अचानक मोड़ना पड़ता है। इस दौरान दुर्घटना की आशंका प्रबल हो जाती है।
किसी मार्ग पर हरियाली की व्यवस्था नहीं
शहर के किसी भी प्रमुख मार्ग पर हरियाली की व्यवस्था नहीं हैं। चिलचिलाती धूप में यात्रा के दौरान यह कमी हर राहगीर को अखरती है। समूचे में किसी भी राहगीर को सड़क के किनारे छाव नहीं मिलेगा। दो साल पहले मालवीय मार्ग पर नगर पालिका की ओर से ब्रिकगार्ड के साथ पौधा रोपण की पहल की गई थी। लाखों रुपये खर्च भी हुए। लेकिन रखवाली नहीं हो पाई। नतीजा पौधों के विकसित होने को कौन कहे ब्रिकगार्ड के ईट भी मौके पर नहीं बचे हैं। रेलवे स्टेशन मार्ग, गांधीनगर, ब्लाक रोड, कोतवाली मार्ग, पचपेड़िया मार्ग सभी हरियाली से सूने हैं।
शहर की सड़कों के मरम्मत का कार्य बेहद जरूरी है। सड़कों के दोनों तरफ ड्रेनेज सिस्टम होना चाहिए। यहां तो सड़क पर ही पानी लगता है। इसलिए पैच कार्य उखड़ जाते हैं। सालोसाल दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। -पवन श्रीवास्तव, स्टेशन रोड, बस्ती।
किसी भी शहर की सुंदरता वहां की सड़क, नाली और पानी की व्यवस्था पर निर्भर करती है। यहां तीनों की स्थिति दयनीय है। ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर चलना खतरनाक हो गया है। गड्ढों से बचने के लिए चोटिल तक होना पड़ता है। -मिथिलेश श्रीवास्तव, जखनी।
सड़कों की समस्या का स्थाई निदान प्रशासन के पास नहीं है। रेलवे स्टेशन जाना हो या कचहरी हर तरफ गड्ढों की मुसीबत है। संभलकर न चलिए तो अनहोनी कहीं हो सकती है। आवाज उठने पर केवल कुछ गड्ढों को राबिश से भरकर छोड़ दिया जाता है।
-अजय कुमार, स्टेशन रोड।
बेहतर सड़कों की सुविधा सबसे जरूरी है। इससे मरीज, स्कूली बच्चे या आम नागरिक सभी को सुरक्षित यात्रा करने का अवसर मिलता है। यह दुर्भाग्य है कि अपने शहर की सड़कों की दशा अन्य शहरों की तुलना में बेहद दयनीय है। -बाबूलाल, दक्षिण दरवाजा।
बजट के अभाव में सड़कों का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। फिर भी गड्ढों को भरवाया जा रहा है। धन उपलब्ध होते ही मरम्मत कार्य भी शुरू हो जाएगा। वैसे पूर्व में मरम्मत कार्य का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी में भी भेजा जा चुका है।
दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद, बस्ती।

दक्षिण दरवाजा से रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क पर गड्ढे से बचकर निकलने की कोशिश करता कार चालक।