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Basti News: ओवरलोड भारी वाहनों से समय से पहले टूट रहीं सड़कें

Mon, 26 Feb 2024 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 26 Feb 2024 12:35 AM IST
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Roads breaking prematurely due to overloaded heavy vehicles
- सड़कों पर 40 से 50 टन का अधिक भार ढो रहें डंफर, ट्रेलर और ट्रक - 30 से 40 टन सहन क्षमता के मानक की बन रही अधिकांश नई सड़कें
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। करोड़ों की लागत से तैयार हो रही सड़क परियोजनाओं को ओवरलोड भारी वाहन समय से पहले ही चौपट कर दे रहे हैं। यह सड़कें पांच साल भी अपनी चमक दमक बरकरार नहीं रख पा रही है। ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से साल दो साल के भीतर ही इन सड़कों की सूरत बिगड़ जा रही है।
सड़कों में प्रयुक्त हॉट मिक्स प्लांट से तैयार तारकोल, गिट्टी एवं क्रस्ट का कठोर मिश्रण ओवरलोड वाहनों के दबाव को बहुत दिनों तक नहीं झेल पा रहा है। वाहनों के झुकाव और अधिक भार के हिसाब से सड़क में पहले दरार पड़ती है। बाद में गिट्टियां छिन्न- भिन्न हो जा रही है। नतीजा नई सड़क में ही साल भीतर गड्ढे बन जा रहे हैं। एक जगह पैच कार्य उखड़ा तो फिर उसका असर दुर तक पड़ रहा है। ओवरलोड वाहनों के संचलन पर प्रतिबंध न होने एक- दो नहीं बल्कि कई सड़कें समय से पहले उखड़नी शुरू हो गई है। अयोध्या- फैजाबाद हाईवे की फोरलेन सड़क, लुंबिनी- दुद्धी मार्ग की टू- लेन सड़क, रामजानकी मार्ग की टू- लेन सड़क, बस्ती- कॉटे मार्ग की सड़क, बरदहिया- हड़िया चौराहा मार्ग, बस्ती- मेंहदावल मार्ग, पॉलीटेक्नि- गौरा मार्ग, बस्ती- डुमरियागंज मार्ग की टू- लेन समेत एक दर्जन से अधिक सड़कें क्षमता से अधिक भार सहन करने के कारण साल- दो साल के भीतर ही टूटने लगी हैं। इसमें से कुछ सड़कों का नवीनीकरण हुए अभी साल भी नहीं बीता है लेकिन यह टूटने लगी हैं। इसकी मुख्य वजह ओवरलोड वाहन की आवाजाही बताई जा रही है। तकनीकी रूप से कम क्षमता के वाहन पर ज्यादा भार लेकर चलने पर सड़क पर उसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार वाहनों को भार क्षमता के अनुकूल चलाए जाने पर सड़कों की आयु सुरक्षित मानी जाती है। मगर गिट्टी, मोरंग, बालू, मिट्टी, सीमेंट, आलू, प्याज जैसे वजन वाले सामग्रियों की ढुलाई ट्रक, ट्रेलर पर क्षमता से कहीं अधिक लादकर किया जा रहा है। जिससे सड़क धंस जा रही है। इसके बाद उस पर भार पड़ने से टूटन शुरू हो रहा है।
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30 से 40 टन भार क्षमता की बन रही सड़कें
अमूमन टू- लेन और फोरलेन की सड़कें 30 से 40 टन भार क्षमता की बनाई जा रही है। यानी सड़क के पैच कार्य पर एक समान रूप से इतने भार क्षमता की ढुलाई हो तो उस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। मगर ओवरलोड वाहन इस अनुपात के अनुरूप नहीं चल पा रहे हैं। भार क्षमता से अधिक सामग्री लोड कर चलने पर सड़क पर मानक से अधिक दबाव पड़ता है। इसी वजह से सड़कें धंसने के बाद टूटने लगती है। इसीलिए अलग- अलग चक्कों के माल वाहकों का अलग- अलग भार क्षमता निर्धारित है। ताकि मानक के अनुरूप सामग्री लादकर चलने पर सड़क पर मानक से अधिक भार न पड़े।
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जानिए, क्या है वाहनों की भार क्षमता
परिवहन विभाग के मानक के अनुसार भार क्षमता के निर्धारण में पहियों की संख्या की भी अहम भूमिका है। ज्यादा पहिए वाले वाहन ज्यादा भार लेकर चला जा सकता है। इससे सड़क पर एक समान भार पड़ता है। इस हिसाब से 6 चक्का ट्रक की भार क्षमता 18.5 टन, 14 चक्का ट्रक की भार क्षमता 42.500 टन है। 22 चक्का ट्रेलर की भार क्षमता 55 टन है। वहीं दस चक्का डंफर की भार क्षमता 28 टन है। मगर व्यवहारिक रूप से अधिकांश कैरियर वाहनों से क्षमता से दोगुना भार की ढुलाई कराई जा रही है। जिससे सड़क पर अधिक दबाव पड़ रहा है।
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बिगड़ गई इन सड़कों की दशा
बस्ती- कॉटे मार्ग पर आठ किमी की लंबाई तक अभी छह माह पहले सात मीटर चौड़ी सड़क बनाकर तैयार की गई। इस मार्ग पर औद्योगिक क्षेत्र प्लास्टिक कांपलेक्स एवं मुंडेरवा चीनी मिल भी स्थित है। ऐसे में ओवरलोड वाहनों के चलने से यह सड़क मकबूलगंज, लोहटी, वायपोखर के पास टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई है। इसी तरह दो साल पहले बना बस्ती- डुमरियागंज मार्ग पर भी जगह- जगह सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। रामजानकी मार्ग टू- लेन सड़क बने अभी एक साल भी नहीं हुआ कुदरहा, पिपरपाती, पाऊ आदि स्थलों के पास यह सड़क या धंस कर गहरी हो गई या गिट्टियां उखड़कर गड्ढों में तब्दील हैं। अयोध्या- फैजाबाद हाईवे पर भी सड़कें जगह- जगह धंसी हुई हैं। पैच कार्य कर मरम्मत बीच- बीच में किया जाता है मगर कुछ दिन स्थिति फिर जस की तस हो जा रही है।
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केस- एक
23 फरवरी को हाईवे पर कप्तानगंज के पास से एआरटीओ प्रशासन पंकज कुमार ने चेकिंग के दौरान ओवरलोड ट्रक को रोका। जॉच के दौरान उस पर निर्धारित भार क्षमता से 50 टन अधिक सामग्री लोड पाया गया। वाहन को तत्काल चालान किया गया।
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केस- दो
जनवरी माह में हाईवे एवं लुंबिनी- दुद्धी मार्ग पर एक दर्जन से अधिक माल वाहक ओवरलोड चलने पर चालान किए गए। इनमें क्षमता से डेढ़ से दो गुना अधिक भार लेकर सड़कों पर चलते हुए पाया गया।
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केस- तीन
सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान दिसंबर माह में भी आधा दर्जन बड़े माल वाहन एवं एक दर्जन छोटे माल वाहन पिकप, ट्रैक्टर- ट्राली और डंफर क्षमता अधिक भार लेकर चलते हुए पकड़े गए। जिनका परिवहन विभाग ने चालान भी किया।
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सड़क पर भार लेकर चलने पर कोई नुकसान नहीं है। लेकिन, उसी मानक के अनुसार वाहन भी होना चाहिए। इसीलिए अलग- अलग भार क्षमता के वाहनों की बनावट अलग रहती है। अधिक भार ढोने वाले वाहनों में पहिए अधिक रहते हैं। ताकि सड़क पर मानक से अधिक भार न पड़े। वैसे आजकल की सड़कों पर 30 से 40 टन का भार एक समान रूप से पड़े तो उस पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे ज्यादा भार पड़ने पर सड़क प्रभावित होती है।

इं. अभिषेक, एक्सपर्ट, सड़क निर्माण।
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ओवरलोड वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान ओवरलोड वाहन मिलने पर बख्शे नहीं जाते हैं। एक दो दिन में फिर से अभियान चलने वाला है।
पंकज सिंह, एआरटीओ, प्रशासन।
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