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Basti News: एक साल में भी नहीं बन पाई एक किमी सड़क
Tue, 22 Aug 2023 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 22 Aug 2023 11:36 PM IST
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बस्ती। आए थे लकदक सड़क बनाने, दुश्वारी छोड़कर चले गए। आधा अधूरा निर्माण अब राह नहीं चलने दे रहा है। अस्पताल पहुंचने की जल्दी हो या बच्चों के स्कूल जाने और दफ्तर पहुंचने की रफ्तार, कुछ दूरी तक यह बिल्कुल थम जा रही है। सकुशल यात्रा भी खतरे में है। एक लेन में सड़क के नाम पर डेढ़ फिट गड्ढे में चलना पड़ रहा है। एक किलोमीटर की यात्रा किसी जोखिम से कमतर नहीं है। यह हाल है अस्पताल, स्कूल और दफ्तर पहुंचाने वाली बस्ती- कांटे मार्ग की।
दो साल पहले रोडवेज से कांटे तक 24 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर चलना कठिन था। इस मार्ग पर अधिक क्षतिग्रस्त होने वाले जगह पर कुल 11 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 4.52 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ। इसमें दस किलोमीटर तक सात मीटर चौड़ाई तक काली सड़क और एक किलोमीटर आरसीसी सड़क का निर्माण होना था। साल भर पहले रोडवेज से मकबूलगंज चौराहे तक और मुंडेरवा से कांटे तक काली सड़क का निर्माण दो फेज में पूरा कर दिया गया। तीसरे फेज में जलभराव वाले जगह पर जिला अस्पताल तीसरे गेट से टीबी अस्पताल तक और कनपुरवा से प्लास्टिक कांपलेक्स चौराहे तक पांच-पांच सौ मीटर की दूरी में आरसीसी सड़क का निर्माण करना था। एक किलोमीटर तक प्रस्तावित सड़क का यह आरसीसी निर्माण साल भर से उलझा हुआ है।
किसी तरह एक लेन की आरसीसी सड़क के ढलाई का कार्य पूरा किया गया है लेकिन, दूसरी तरफ के लेन का पैच कार्य उखाड़कर जस की तस स्थिति में छोड़ दिया गया है, जिससे यह लेन एक फिट गहरी हो गई है। ऊपर से नवनिर्मित आरसीसी लेन की सरिया दूसरी लेन की ओर निकली हुई है। ऐसे में गड्ढे में तब्दील इस सड़क पर चलने के दौरान सरिया से टकराने का खतरा है। बारिश के दिनों में दूसरी लेन की सड़क पर पानी और कीचड़ है। आरसीसी लेन अभी चालू न होने से छोटे-बड़े सभी वाहनों का आवागमन क्षतिग्रस्त लेन पर ही निर्भर है। यहां अक्सर दुर्घटना और जाम की समस्या खड़ी होना आम बात हो गई है।
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मार्ग पर प्रतिष्ठित विद्यालय, अस्पताल और सरकारी कार्यालय हैं स्थित
इस मार्ग से आईसीएससी और सीबीएसई बोर्ड के दो प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों के अलावा, जिला अस्पताल, टीबी अस्पताल, डायट, औद्याेगिक आस्थान, विद्युत कार्यशाला, 220 केवी बिजलीघर के अलावा आधा दर्जन सरकारी कार्यालय सीधे जुड़े हैं। इसके अलावा यह शहर से गोरखपुर जनपद को जोड़ने वाली भी सड़क है। जिससे रोडवेज बसों और कामर्शियल वाहनों की आवाजाही भी निरंतर रहती है। शहर के मुहाने पर यह सड़क निर्माण के चक्कर में उलझ गई है। स्कूली बच्चों से लेकर दफ्तर और अस्पताल जाने वाले सभी राहगीरों को जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ रही है।
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प्लास्टिक कांप्लेक्स चौराहे पर हम अपनी गाड़ी खड़ी कर सामान खरीद रहे थे। तभी एक ट्रक नवनिर्मित आरसीसी सड़क पर लटक गई, जिससे मेरी बाइक उसमें फंस गई। बाद में लोगों की मदद से बाइक को बाहर निकाला।
-सुनील कुमार, मंझरिया।
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एक साल से हम लोग क्षतिग्रस्त सड़क पर जैसे तैसे चल रहे हैं। निर्माण की गति धीमी होने से आए दुर्घटना होती है। एक दिन मैं स्वयं निर्माणाधीन आरसीसी सड़क पर चलते समय अनियंत्रित हो गए। गनीमत थी कि चोट नहीं लगी।
-अमरेंद्र चौधरी, जिगिना।
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अस्पताल चौराहे के बाद से प्लास्टिक कांप्लेक्स तक चलना कठिन हो गया है। आधे-अधूरे में ही सड़क को छोड़ दिया गया है। बच्चों को रोजाना इस मार्ग से स्कूल ले जाना और ले आना पड़ता है। बहुत संभलकर न चले तो अपना भी गिरेंगे और बच्चे भी चोटिल होंगे।
-कुलदीप अग्रहरि, पुरानी बस्ती।
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आरसीसी लेन के बगल में गड्ढे में तब्दील सड़क पर चलने के दौरान डर लगता है। कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि आरसीसी लेन पर चल रहा वाहन दूसरे लेन में पलट न जाए। इसके अलावा रोडवेज बस और अन्य भारी वाहन आने के दौरान जाम में फंसना पड़ता है।
-चंदन सर्राफ, रोडवेज।
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सड़क का निर्माण कार्य जारी रखा गया है। बारिश की वजह से विलंब हो रहा है। मौसम ठीक होते ही बचे हुए भाग में आरसीसी सड़क का निर्माण पूरा करा दिया जाएगा।
-इं. अवधेश प्रसाद, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी।
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दो साल पहले रोडवेज से कांटे तक 24 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर चलना कठिन था। इस मार्ग पर अधिक क्षतिग्रस्त होने वाले जगह पर कुल 11 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 4.52 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ। इसमें दस किलोमीटर तक सात मीटर चौड़ाई तक काली सड़क और एक किलोमीटर आरसीसी सड़क का निर्माण होना था। साल भर पहले रोडवेज से मकबूलगंज चौराहे तक और मुंडेरवा से कांटे तक काली सड़क का निर्माण दो फेज में पूरा कर दिया गया। तीसरे फेज में जलभराव वाले जगह पर जिला अस्पताल तीसरे गेट से टीबी अस्पताल तक और कनपुरवा से प्लास्टिक कांपलेक्स चौराहे तक पांच-पांच सौ मीटर की दूरी में आरसीसी सड़क का निर्माण करना था। एक किलोमीटर तक प्रस्तावित सड़क का यह आरसीसी निर्माण साल भर से उलझा हुआ है।
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किसी तरह एक लेन की आरसीसी सड़क के ढलाई का कार्य पूरा किया गया है लेकिन, दूसरी तरफ के लेन का पैच कार्य उखाड़कर जस की तस स्थिति में छोड़ दिया गया है, जिससे यह लेन एक फिट गहरी हो गई है। ऊपर से नवनिर्मित आरसीसी लेन की सरिया दूसरी लेन की ओर निकली हुई है। ऐसे में गड्ढे में तब्दील इस सड़क पर चलने के दौरान सरिया से टकराने का खतरा है। बारिश के दिनों में दूसरी लेन की सड़क पर पानी और कीचड़ है। आरसीसी लेन अभी चालू न होने से छोटे-बड़े सभी वाहनों का आवागमन क्षतिग्रस्त लेन पर ही निर्भर है। यहां अक्सर दुर्घटना और जाम की समस्या खड़ी होना आम बात हो गई है।
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मार्ग पर प्रतिष्ठित विद्यालय, अस्पताल और सरकारी कार्यालय हैं स्थित
इस मार्ग से आईसीएससी और सीबीएसई बोर्ड के दो प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों के अलावा, जिला अस्पताल, टीबी अस्पताल, डायट, औद्याेगिक आस्थान, विद्युत कार्यशाला, 220 केवी बिजलीघर के अलावा आधा दर्जन सरकारी कार्यालय सीधे जुड़े हैं। इसके अलावा यह शहर से गोरखपुर जनपद को जोड़ने वाली भी सड़क है। जिससे रोडवेज बसों और कामर्शियल वाहनों की आवाजाही भी निरंतर रहती है। शहर के मुहाने पर यह सड़क निर्माण के चक्कर में उलझ गई है। स्कूली बच्चों से लेकर दफ्तर और अस्पताल जाने वाले सभी राहगीरों को जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ रही है।
प्लास्टिक कांप्लेक्स चौराहे पर हम अपनी गाड़ी खड़ी कर सामान खरीद रहे थे। तभी एक ट्रक नवनिर्मित आरसीसी सड़क पर लटक गई, जिससे मेरी बाइक उसमें फंस गई। बाद में लोगों की मदद से बाइक को बाहर निकाला।
-सुनील कुमार, मंझरिया।
एक साल से हम लोग क्षतिग्रस्त सड़क पर जैसे तैसे चल रहे हैं। निर्माण की गति धीमी होने से आए दुर्घटना होती है। एक दिन मैं स्वयं निर्माणाधीन आरसीसी सड़क पर चलते समय अनियंत्रित हो गए। गनीमत थी कि चोट नहीं लगी।
-अमरेंद्र चौधरी, जिगिना।
अस्पताल चौराहे के बाद से प्लास्टिक कांप्लेक्स तक चलना कठिन हो गया है। आधे-अधूरे में ही सड़क को छोड़ दिया गया है। बच्चों को रोजाना इस मार्ग से स्कूल ले जाना और ले आना पड़ता है। बहुत संभलकर न चले तो अपना भी गिरेंगे और बच्चे भी चोटिल होंगे।
-कुलदीप अग्रहरि, पुरानी बस्ती।
आरसीसी लेन के बगल में गड्ढे में तब्दील सड़क पर चलने के दौरान डर लगता है। कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि आरसीसी लेन पर चल रहा वाहन दूसरे लेन में पलट न जाए। इसके अलावा रोडवेज बस और अन्य भारी वाहन आने के दौरान जाम में फंसना पड़ता है।
-चंदन सर्राफ, रोडवेज।
सड़क का निर्माण कार्य जारी रखा गया है। बारिश की वजह से विलंब हो रहा है। मौसम ठीक होते ही बचे हुए भाग में आरसीसी सड़क का निर्माण पूरा करा दिया जाएगा।
-इं. अवधेश प्रसाद, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी।