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Basti News: निपटाए जाएंगे राजस्व से जुड़े मुकदमे, प्रशासन गंभीर
Tue, 10 Oct 2023 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 10 Oct 2023 12:43 AM IST
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बस्ती। देवरिया सामुहिक हत्याकांड के बाद जमीन संबंधी विवाद को लेकर यहां जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। विभाग वार मुकदमों की सूची तैयार कराई गई है। प्रतिदिन सुनवाई की रूपरेखा बनाई जा रही है। पुराने और नए दोनों तरह के मामले निपटाए जाएंगे। निस्तारण की मानीटरिंग डीएम अंद्रा वामसी अपनी टीम के साथ स्वयं करेंगे।
जिले में जमीन से संबंधित 22500 मामले लंबित चल रहे हैं। इसमें सर्वाधिक राजस्व न्यायालयों में 19000 और चकबंदी न्यायालयों में 3500 मामले लंबित है। राजस्व न्यायालयों के 5 हजार मामले तीन साल से अधिक पुराने हो चुके हैं। डीएम ने अलग-अलग प्रकृति मुकदमों को सूचीबद्ध कराकर निस्तारण पर जोर दिया है। इसमें खारिज-दाखिल, वरासत, धारा 24 के तहत पक्की पैमाइश, धारा 80 की कार्रवाई जैसे मामलों के त्वरित निस्तारण की योजना तैयार कर ली गई है। इसके लिए प्रतिदिन राजस्व न्यायालयों में सुनवाई होना अनिवार्य किया जाएगा। अभी तक अधिकारियों की व्यस्तता के चलते न्यायालयों में तारीख पर तारीख पड़ती रही। डीएम ने बताया कि अब राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों को नियमित किया जा रहा है। प्रतिदिन सुनवाई होने से मुकदमों का निस्तारण होने लगेगा। इसके लिए एक अलग से टीम गठित की जाएगी। न्यायालयों की समीक्षा होगी और निस्तारण पर नजर रखी जाएगी। प्रतिमाह 3200 मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।
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जिले में जमीन से संबंधित 22500 मामले लंबित चल रहे हैं। इसमें सर्वाधिक राजस्व न्यायालयों में 19000 और चकबंदी न्यायालयों में 3500 मामले लंबित है। राजस्व न्यायालयों के 5 हजार मामले तीन साल से अधिक पुराने हो चुके हैं। डीएम ने अलग-अलग प्रकृति मुकदमों को सूचीबद्ध कराकर निस्तारण पर जोर दिया है। इसमें खारिज-दाखिल, वरासत, धारा 24 के तहत पक्की पैमाइश, धारा 80 की कार्रवाई जैसे मामलों के त्वरित निस्तारण की योजना तैयार कर ली गई है। इसके लिए प्रतिदिन राजस्व न्यायालयों में सुनवाई होना अनिवार्य किया जाएगा। अभी तक अधिकारियों की व्यस्तता के चलते न्यायालयों में तारीख पर तारीख पड़ती रही। डीएम ने बताया कि अब राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों को नियमित किया जा रहा है। प्रतिदिन सुनवाई होने से मुकदमों का निस्तारण होने लगेगा। इसके लिए एक अलग से टीम गठित की जाएगी। न्यायालयों की समीक्षा होगी और निस्तारण पर नजर रखी जाएगी। प्रतिमाह 3200 मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।
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