{"_id":"696d38891c484f989d0d9e22","slug":"responsible-people-are-ill-illegal-vehicles-are-running-without-any-fear-basti-news-c-207-1-bst1006-151519-2026-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: जिम्मेदार बीमार, बेधड़क दौड़ रहे डग्गामार वाहन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: जिम्मेदार बीमार, बेधड़क दौड़ रहे डग्गामार वाहन
विज्ञापन
बड़ेवन चौराहे के पास खड़ी बसें। संवाद
- फोटो : महिलाओं को जागरूक करती महिला आरक्षी।
बस्ती। सड़क पर बेधड़क डग्गामार वाहन दौड़ लगा रहे हैं। लोकल रूट से लेकर हाईवे तक इन वाहनों की भरमार है। ठसाठस यात्रियों से भरे यह वाहन बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं। परिवहन विभाग के जिम्मेदार इन वाहनों पर कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। जानकार बताते हैं कि वाहन माफियाओं की परिवहन विभाग में साठगांठ रहती है। इसी वजह से बिना परमिट और फिटनेस के ही निजी बस सड़कों में सवारियां ढोई जा रही है।
बता दें कि जिला मुख्यालय से बांसी, डुमरियागंज, मेंहदावल, बनकटी आदि लोकल रूटों पर डग्गामार वाहनों की भरमार है। इन रूटों पर दो तरह के डग्गामार बसें चल रही हैं। पुरानी और जर्जर बसें जिला मुख्यालय तक सवारियां ढो रहीं हैं, जबकि नई बसों में सीधे लखनऊ और अयोध्या के सवारी बैठाए जा रहे हैं। ग्रामीण अंचल के इन कस्बों से लखनऊ तक प्रति सवारी पांच सौ रुपये तक किराया वसूल किया जा रहा है।
जानकारों के अनुसार ग्रामीण अंचल से लखनऊ-अयोध्या तक संचालित होने वाली 32 से 42 सीटर बसों के पास ऑल यूपी परमिट रहता है। इसकी आड़ में लोकल सवारियों को नियमित ढोया जा रहा है। जबकि परिवहन विभाग की नियमावली के अनुसार ऑल यूपी या ऑल इंडिया परमिट पर इन बसों को सिर्फ बुकिंग पर चलने की अनुमति है। जगह-जगह सवारियां बैठाकर ढोना प्रतिबंधित है।
विज्ञापन
विभाग में ऑल यूपी एवं ऑल इंडिया परमिट वाले चार सौ से अधिक बसों का पंजीकरण है। लेकिन, इसमें से अधिकांश बसें रोजाना सवारियां ढोने के काम में लाई जा रही है। जानकारों का कहना है कि परिवहन विभाग के जिम्मेदारों से इनकी सेटिंग होती है। अयोध्या और लखनऊ तक बिना परमिट के सवारियां ढोने के बदले बस संचालकों द्वारा विभाग के जिम्मेदारों तक सुविधा शुल्क पहुंचाया जाता हैं। विभागी से जुड़े दलाल ऐसे बसों की गाड़ी संख्या सहित सूची तक जिम्मेदारों को उपलब्ध कराए हैं।
यहीं वजह है कि प्रवर्तन टीम इन बसों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने से परहेज करती है। अभियान चालू होने के दौरान सूची से इतर बसाें को पकड़कर सिर्फ खानापूर्ति कर दी जाती है। यहीं वजह है कि सहायक संभागीय कार्यालय के बाबू से लेकर अधिकारी तक फिटनेस और परमिट वाले वाहनों से जुड़े सवालों पर चुप्पी साध ले रहे हैं। आरआई सीमा गौतम बताती हैं कि इस समय उनकी ड्यूटी प्रयागराज माघ मेले में लगी है। बिना फिटनेस और परमिट वाली गाड़ियों का विवरण एआरटीओ माला बाजपेयी के पास होगा।
-- -- -- -- -- -- -
बड़ेवन चौराहे पर नंबर लगाकर भरते हैं सवारियां
शहर के बड़ेवन चौराहे पर ऑल यूपी परमिट की आड़ में बस्ती से लखनऊ तक डग्गामारी करने के लिए लाइन से बसें खड़ी रहती है। यहां बाकायदे नंबर लगाकर सवारियां भरी जा रही हैं। जिन संचालकों ने जिम्मेदारों तक भेजी जाने वाली डग्गामार वाहनों की सूची में सेवा शर्तों का पालन करते हुए गाड़ी का नंबर दर्ज करा दिया है उन्हें कोई चिंता नहीं रहती है। यदि निर्धारित रूट की परमिट और फिटनेस भी नहीं है तब भी सवारी ढोने में कोई दिक्कत नहीं आ रही है। इसी तरह बनकटी, महसो, रुधौली, बाघनगर क्षेत्र से डग्गामार वाहन अयोध्या और लखनऊ तक की सवारियां ढोई जा रही हैं।
-- -- -- -- -- -- -
टैक्सी में रहीं लग्जरी कार
विभिन्न कंपनियों की सीएनजी युक्त लग्जरी कार आजकल टैक्सी के उपयोग में लाई जा रही है। निजी उपयोग में पंजीकृत सात सीटर कार हाईवे के मूड़घाट चौराहे से लखनऊ तक सवारी ढो रही है। दिन भर यहां गाड़ियों का नंबर लगता है। लेकिन परिवहन माफियाओं के तिकड़म के आगे विभागीय कार्रवाई होते नहीं देखी जाती है। जानकारों के अनुसार परिवहन माफिया इसके बदले प्रवर्तन कार्य में लगे जिम्मेदारों को अच्छी रकम पहुंचाते हैं। यहीं नहीं शहर के बीचोबीच स्थित रोडवेज के निकट नेहरू तिराहा लग्जरी गाड़ियों का स्टैंड बन गया है। निजी उपयोग में पंजीकृत चार दर्जन से अधिक लग्जरी गाड़ियों को यहां खड़ी करके रोजाना बुकिंग की जाती है।
-- -- -- -- -- -
प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से कतरा रहे अधिकारी
परिवहन विभाग में तैनात एआरटीओ और आरटीओ स्तर के अधिकारी जिले स्तर पर प्रवर्तन कार्य संभालने से साफ इनकार कर रहे हैं। कागज में एआरटीओ प्रवर्तन का चार्ज किसी के पास नहीं बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह खेल इन लिए हो रहा है कि उच्चस्तर पर मामला पकड़ में आने के बाद अपने पास चार्ज न होने की दुहाई देकर पल्ला झाड़ लिया जाए।
कोट
एआरटीओ प्रवर्तन की जिम्मेदारी हमें दी गई थी। लेकिन, मेरी तबीयत अक्सर खराब रहती है। इसलिए मैंने प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से इन्कार कर दिया है। अब मैं केवल एआरटीओ प्रशासन के पद का दायित्व संभाल रही हूं। संबंधित पद के दायित्व के बारे में आरटीओ ही बता पाएंगे।
-माला बाजपेई, एआरटीओ, प्रशासन।
कोट
एआरटीओ प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से माला बाजपेयी ने मना कर दिया है। वह केवल एआरटीओ प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मैं मंडल स्तर पर आरटीओ प्रवर्तन के रूप में नियुक्त हूं। इसलिए जिले स्तर पर प्रवर्तन का कार्य नहीं देख सकता हूं। एआरटीओ प्रवर्तन का पद खाली चल रहा है।
-सुरेश मौर्य, आरटीओ, प्रवर्तन।
विज्ञापन
बता दें कि जिला मुख्यालय से बांसी, डुमरियागंज, मेंहदावल, बनकटी आदि लोकल रूटों पर डग्गामार वाहनों की भरमार है। इन रूटों पर दो तरह के डग्गामार बसें चल रही हैं। पुरानी और जर्जर बसें जिला मुख्यालय तक सवारियां ढो रहीं हैं, जबकि नई बसों में सीधे लखनऊ और अयोध्या के सवारी बैठाए जा रहे हैं। ग्रामीण अंचल के इन कस्बों से लखनऊ तक प्रति सवारी पांच सौ रुपये तक किराया वसूल किया जा रहा है।
विज्ञापन
जानकारों के अनुसार ग्रामीण अंचल से लखनऊ-अयोध्या तक संचालित होने वाली 32 से 42 सीटर बसों के पास ऑल यूपी परमिट रहता है। इसकी आड़ में लोकल सवारियों को नियमित ढोया जा रहा है। जबकि परिवहन विभाग की नियमावली के अनुसार ऑल यूपी या ऑल इंडिया परमिट पर इन बसों को सिर्फ बुकिंग पर चलने की अनुमति है। जगह-जगह सवारियां बैठाकर ढोना प्रतिबंधित है।
विज्ञापन
विभाग में ऑल यूपी एवं ऑल इंडिया परमिट वाले चार सौ से अधिक बसों का पंजीकरण है। लेकिन, इसमें से अधिकांश बसें रोजाना सवारियां ढोने के काम में लाई जा रही है। जानकारों का कहना है कि परिवहन विभाग के जिम्मेदारों से इनकी सेटिंग होती है। अयोध्या और लखनऊ तक बिना परमिट के सवारियां ढोने के बदले बस संचालकों द्वारा विभाग के जिम्मेदारों तक सुविधा शुल्क पहुंचाया जाता हैं। विभागी से जुड़े दलाल ऐसे बसों की गाड़ी संख्या सहित सूची तक जिम्मेदारों को उपलब्ध कराए हैं।
यहीं वजह है कि प्रवर्तन टीम इन बसों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने से परहेज करती है। अभियान चालू होने के दौरान सूची से इतर बसाें को पकड़कर सिर्फ खानापूर्ति कर दी जाती है। यहीं वजह है कि सहायक संभागीय कार्यालय के बाबू से लेकर अधिकारी तक फिटनेस और परमिट वाले वाहनों से जुड़े सवालों पर चुप्पी साध ले रहे हैं। आरआई सीमा गौतम बताती हैं कि इस समय उनकी ड्यूटी प्रयागराज माघ मेले में लगी है। बिना फिटनेस और परमिट वाली गाड़ियों का विवरण एआरटीओ माला बाजपेयी के पास होगा।
बड़ेवन चौराहे पर नंबर लगाकर भरते हैं सवारियां
शहर के बड़ेवन चौराहे पर ऑल यूपी परमिट की आड़ में बस्ती से लखनऊ तक डग्गामारी करने के लिए लाइन से बसें खड़ी रहती है। यहां बाकायदे नंबर लगाकर सवारियां भरी जा रही हैं। जिन संचालकों ने जिम्मेदारों तक भेजी जाने वाली डग्गामार वाहनों की सूची में सेवा शर्तों का पालन करते हुए गाड़ी का नंबर दर्ज करा दिया है उन्हें कोई चिंता नहीं रहती है। यदि निर्धारित रूट की परमिट और फिटनेस भी नहीं है तब भी सवारी ढोने में कोई दिक्कत नहीं आ रही है। इसी तरह बनकटी, महसो, रुधौली, बाघनगर क्षेत्र से डग्गामार वाहन अयोध्या और लखनऊ तक की सवारियां ढोई जा रही हैं।
टैक्सी में रहीं लग्जरी कार
विभिन्न कंपनियों की सीएनजी युक्त लग्जरी कार आजकल टैक्सी के उपयोग में लाई जा रही है। निजी उपयोग में पंजीकृत सात सीटर कार हाईवे के मूड़घाट चौराहे से लखनऊ तक सवारी ढो रही है। दिन भर यहां गाड़ियों का नंबर लगता है। लेकिन परिवहन माफियाओं के तिकड़म के आगे विभागीय कार्रवाई होते नहीं देखी जाती है। जानकारों के अनुसार परिवहन माफिया इसके बदले प्रवर्तन कार्य में लगे जिम्मेदारों को अच्छी रकम पहुंचाते हैं। यहीं नहीं शहर के बीचोबीच स्थित रोडवेज के निकट नेहरू तिराहा लग्जरी गाड़ियों का स्टैंड बन गया है। निजी उपयोग में पंजीकृत चार दर्जन से अधिक लग्जरी गाड़ियों को यहां खड़ी करके रोजाना बुकिंग की जाती है।
प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से कतरा रहे अधिकारी
परिवहन विभाग में तैनात एआरटीओ और आरटीओ स्तर के अधिकारी जिले स्तर पर प्रवर्तन कार्य संभालने से साफ इनकार कर रहे हैं। कागज में एआरटीओ प्रवर्तन का चार्ज किसी के पास नहीं बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह खेल इन लिए हो रहा है कि उच्चस्तर पर मामला पकड़ में आने के बाद अपने पास चार्ज न होने की दुहाई देकर पल्ला झाड़ लिया जाए।
कोट
एआरटीओ प्रवर्तन की जिम्मेदारी हमें दी गई थी। लेकिन, मेरी तबीयत अक्सर खराब रहती है। इसलिए मैंने प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से इन्कार कर दिया है। अब मैं केवल एआरटीओ प्रशासन के पद का दायित्व संभाल रही हूं। संबंधित पद के दायित्व के बारे में आरटीओ ही बता पाएंगे।
-माला बाजपेई, एआरटीओ, प्रशासन।
कोट
एआरटीओ प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से माला बाजपेयी ने मना कर दिया है। वह केवल एआरटीओ प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मैं मंडल स्तर पर आरटीओ प्रवर्तन के रूप में नियुक्त हूं। इसलिए जिले स्तर पर प्रवर्तन का कार्य नहीं देख सकता हूं। एआरटीओ प्रवर्तन का पद खाली चल रहा है।
-सुरेश मौर्य, आरटीओ, प्रवर्तन।