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रामजानकी मार्ग : किसानों ने मांगा मुआवजा तो रोक दिया फोरलेन का निर्माण

Sat, 10 Jun 2023 12:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 10 Jun 2023 12:52 AM IST
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Ramjanki Marg: Farmers asked for compensation then stopped construction of four lane
कलवारी चौराहे पर रामजानकी मार्ग का क्राॅसिंग प्वाइंट।
बस्ती। राम जानकी मार्ग पर प्रस्तावित फोरलेन सड़क परियोजना मुआवजे के चक्कर में उलझ गई है। बस्ती जनपद की 55 किलोमीटर सीमा में इस मार्ग पर अभी टू-लेन सड़क ही आधी अधूरी बन पाई है। वह भी कई जगहों पर मानक को पूरा नहीं कर रही है। अगल-बगल पक्का निर्माण होने से कई जगह सड़क संकरी छोड़ दी गई है। सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू होते ही स्थानीय काश्तकार मुआवजे को आवाज बुलंद करने लगे। उनकी मांग पर अमल करने के बजाए जिम्मेदार परियोजना को ठंडे बस्ते में डालकर चुप बैठ गए हैं।
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वर्तमान में केंद्रीय राज्य सड़क परिवहन विभाग (एनएचएआई) के पास इस जनपद में 55 किलोमीटर तक सड़क बनाने के लिए केवल 12 मीटर चौड़ी जमीन है। जबकि फोरलेन बनाने के लिए 50 मीटर चौड़ी जमीन की जरूरत है। उपलब्ध जमीन पर सिर्फ टू-लेन सड़क और उसकी पटरी ही बन पाना संभव है।
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अयोध्या वाया बस्ती मिथिला तक लगभग 400 किलोमीटर रामजानकी मार्ग को फोरलेन में परिवर्तित करने की घोषणा वर्ष 2018 में हुई थी। जनपद में छावनी से छपिया तक इस सड़क की लंबाई 55 किलोमीटर है। घोषणा के बाद पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड ने इस सड़क को केंद्रीय राज्य सड़क परिवहन विभाग को हस्तांतरित कर दिया था। तब इस सड़क की चौड़ाई सात मीटर थी। केंद्रीय मंत्रालय से बस्ती जनपद के लिए इस सड़क के लिए 281 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित हुआ था। एनएचएआई ने फोरलेन सड़क परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया और पुरानी सड़क को टू-लेन में परिवर्तित करने का कार्य शुरू करा दिया। कुछ जगहों पर इसको लेकर काश्तकारों ने विरोध शुरू कर दिया। सड़क चौड़ी होते ही लोग मुआवजे की मांग करने लगे। एनएचएआई इस मामले में उलझने के बजाय सात मीटर सड़क और दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ मीटर पेव्ड शोल्डर का निर्माण के साथ इस मार्ग को दस मीटर में परिवर्तित करने का कार्य शुुरू करा दिया। इसी के साथ फोरलेन परियोजना फाइलों में बंद हो गई। इधर, चार साल बीत गए अभी तक टू-लेन सड़क का निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है।
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केवल एक मीटर का फुटपाथ
- कागज में रामजानकी मार्ग पर टू-लेन सड़क के रूप में भले ही दर्ज है लेकिन कई जगहों पर यह मानक नहीं पूरी कर रही है। जिला प्रशासन के अनुसार सरकारी अभिलेख में यह सड़क 12 मीटर चौड़ी है। टू-लेन बनाने के लिए एनएचएआई ने चौड़ाई में इजाफा नहीं किया। डेढ़-डेढ़ मीटर पेब्ड शोल्डर के साथ दस मीटर चौड़ी सड़क निर्माण और दोनों तरफ एक-एक मीटर पटरी निर्माण ही कराया गया है। इसके बाद सड़क के किनारे अतिरिक्त जमीन ही नहीं है। कुछ कस्बों में घनी आबादी की वजह से पटरी निर्माण भी नहीं हो पाया है। विशेषरगं, दुबौलिया, चिलमा और अगौना बाजार में केवल सड़क चौड़ीकरण का कार्य हुआ है। यहां सड़क के दोनों तरफ पक्के निर्माण है। लोगों का कहना है कि यह उनकी निजी भूमि है। बगैर मुआवजे के एनएचएआई अधिग्रहित नहीं कर सकती है। गायघाट कस्बे में चौड़ीकरण के बाद कई मकान इस सड़क से बिल्कुल सट गए हैं। उनका निकास सड़क पर ही है। लोगों की कुर्सी, चारपाई सड़क पर ही लग रही है। आए दिन यहां दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कुदरहा कस्बे में भी यही हाल है। सड़क से सटे दुकान और मकान हैं। शाम को सड़क पर ही बाजार भी लगता है। संतकबीरनगर जनपद के रामपुर बारह कोनी से शनिचरा बाजार तक यह सड़क अभी बन ही नहीं पाई है।
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संवदेनशील बना कलवारी चौराहे का क्राॅसिंग
इस मार्ग पर कलवारी चौराहे का क्राॅसिंग सबसे संवेदनशील है। यहां बाद में बनाया गया टू-लेन रामजानकी मार्ग लुंबिनी-दुद्धी टू-लेन सड़क मार्ग को पार करता है। इसके लिए इस चौराहे पर फ्लाई ओवर का निर्माण नहीं हुआ है। इसके अलावा कोई संकेतक या ब्रेकर भी नहीं है। रात के समय यहां अक्सर दुर्घटना होती है। भारी वाहन इस क्राॅसिंग पर अचानक ब्रेक लेने के दौरान या तो भिड़ जाते हैं या अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं। चौराहे पर स्थित चाय, पान की दुकानें इन वाहनों की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त भी चुकी है। दिन में आवागमन का दबाव बढ़ते ही यहां जाम भी लग जाता है।
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डिवाइडर और हरियाली की व्यवस्था नहीं
- इस टू-लेन सड़क पर अतिरिक्त जमीन न होने से प्रमुख कस्बों में डिवाइडर भी नहीं बनाए गए हैं। विशेषरगंज, कुदरहा, चिलमा, गौसपुर, अगौना, कलवारी, गायघाट और कुदरहा बाजार में डिवाइडर का निर्माण नहीं हुआ है। जबकि दुर्घटना को रोकने के लिए कस्बों में यह जरुरी होता है। इसके अलावा पटरी के दोनों तरफ शेष जगह न होने से सड़क हरियाली की भी व्यवस्था नहीं हो सकी है।
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टोलप्लाजा का निर्माण भी नहीं
- इस मार्ग पर जनपद में टोलप्लाजा का निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है। छावनी से शुरू इस मार्ग के 23 किलोमीटर की दूरी पर यह प्रस्तावित है। टोलप्लाजा के निर्माण के लिए अतिरक्ति जमीन की जरूरत है। जिसे विभाग अभी अधिग्रहित नहीं किया है। इस वजह से टोल प्लाजा का निर्माण नहीं हो सका है।
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छावनी में 16.50 करोड़ देंगे मुआवजा
अभी तक केवल छावनी में फोरलेन की शक्ल में डिवाइडरयुक्त सड़क बनाने के लिए मुआवजे का प्रबंध हो पाया है। यहां निर्माणाधीन ओवरब्रिज के सर्विस लेन और कस्बे में फोरलेन सड़क के लिए शासन से 16.50 करोड़ रुपये अवमुक्त हुआ है। इस धनराशि से किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जाएगी।
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स्थानीय नागरिकों ने बताई समस्रूा
कुदरहा के निकट स्वास्थ्य केंद्र बनहरा के पास पूरब की दिशा में सड़क मेरे जमीन बना दी गई है। जिसका मुआवजा हमें नहीं मिला है। हाईकोर्ट से जांच का आदेश हुआ था। जिला प्रशासन ने खारिज कर दिया था। मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मेरे अलावा 27 अन्य काश्तकार भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जिनकी टू -लेन में जमीन गई है। -राजेश द्विवेदी, बनहरा।
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पहले लुंबिनी-दुद्धी मार्ग फिर रामजानकी मार्ग बनाया गया। लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ। चौराहों और कस्बों में डिवाइडर, रेड सिग्नल एवं जरूरी सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए हैं। कलवारी चौराहे पर फ्लाईओवर की जरूरत थी, नहीं बनाया गया। अब यह जगह दुर्घटना बहुल बन गई है। -डॉ. प्रेम त्रिपाठी, गायघाट।
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कलवारी चौराहे पर रामजानकी टू-लेन सड़क काफी संकरी है। क्राॅसिंग पर ओवरब्रिज न होने से अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। मेरी जानकारी में यहां सड़क पार करने के दौरान एक दर्जन से अधिक बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। 10 फरवरी को भिड़ंत के बाद एक ट्रक उनकी दुकान पर पलट गया। लगभग 80 हजार का नुकसान हुआ। गनीमत यह कि रात का वक्त था। वरना जनहानि भी होती। -विमलेश, दुकानदार, कलवारी
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8 मई को कलवारी चौराहे पर रात के समय सड़क पार करते समय एक्सीडेंट हुआ और एक ट्रक मेरी दुकान पर आकर पलट गया। काउंटर समेत पूरी दुकान क्षतिग्रस्त हो गई। करीब डेढ़ लाख की आर्थिक क्षति हुई। इस चौराहे पर दुर्घटना रोकने के लिए विशेष उपाय होने चाहिए। वरना किसी दिन बड़ी घटना हो सकती है। -कृष्णा प्रसाद, दुकानदार, कलवारी।
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हस्तांतरण के समय डीएम स्तर से 12 मीटर सड़क की चौड़ाई लिखित मिली थी। एनएचएआई ने इसी चौड़ाई में 10 मीटर चौड़ी सड़क और दोनों तरफ एक-एक मीटर पटरी का निर्माण किया है। जहां अतिक्रमण है इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई है। छावनी में मुआवजे के लिए 16.50 करोड़ जिला प्रशासन को मुहैया करा दिए गए हैं। टोल प्लाजा का निर्माण शीघ्र शुरू करा दिया जाएगा।

-ध्रुव अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, एनएचएआई।
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डेईडीहा में हुआ था आंदोलन
रामजानकी टू-लेन सड़क निर्माण के दौरान सपा नेता सिद्धार्थ सिंह राका की अगुवाई में डेईडीहा में मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने आंदोलन खड़ा कर दिया था। तत्कालीन विधायक महादेवा रवि सोनकर ने किसानों को आश्वस्त किया कि वह मुख्यमंत्री से मिलकर समस्या से अवगत कराएंगे। तत्कालीन विधायक कप्तानगंज सीए चंद्र प्रकाश शुक्ल ने भी किसानों को मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया तब आंदोलन खत्म हुआ था। डेईडीहा, कुदरहा, गायघाट आदि जगहों पर किसानों का कहना है कि उनकी जमीन बगैर अधिग्रहण किए ही टू-लेन में शामिल कर ली गई है।

कलवारी चौराहे पर रामजानकी मार्ग का क्राॅसिंग प्वाइंट।

कलवारी चौराहे पर रामजानकी मार्ग का क्राॅसिंग प्वाइंट।

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