{"_id":"629269a2a709012f23105932","slug":"rachana-pal-has-listen-82-cases-basti-news-gkp4384739192","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज्य सूचना आयुक्त ने की 82 मामलों की सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राज्य सूचना आयुक्त ने की 82 मामलों की सुनवाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य सूचना आयुक्त ने की 82 मामलों की सुनवाई
बस्ती। राज्य सूचना आयुक्त रचना पाल ने जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत विभिन्न विभागों से संबंधित 82 मामलों की सुनवाई की। कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को सबसे पहले आयुक्त ने 27 की सुनवाई में अवशेष रह गई बीस फाइलों को सुना। निर्देश दिया कि जन सूचना अधिकारी वास्तव में सूचना देने की नीयत से कार्य करें तथा स्पष्ट एवं बिंदुवार सूचना उपलब्ध कराए।
कहा कि सूचना के प्रकट किए जाने से छूट का अनावश्यक लाभ न उठाएं। बताया कि अधिनियम के तहत व्यक्तिगत सूचना नहीं दी जा सकती। शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के अंतर्गत भी सूचना के प्रकट करने पर रोक रहती है। ऐसी सूचना जो अपराधियों की जांच या अभियोजन प्रक्रिया में होगी, उस पर रोक है। कहा कि इस अधिनियम के तहत कोई भी सूचना साधारण रूप से उसी प्रारूप में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उसे मांगा गया है। सूचना अलग से तैयार नहीं की जाएगी, बल्कि कार्यालय में अनुरक्षित सूचना ही उपलब्ध कराई जाएगी।
इस मौके पर एडीएम अभय कुमार मिश्र, डीडीओ अजीत श्रीवास्तव, डिप्टी आरएमओ. गोरखनाथ तिवारी, डीएसओ सत्यवीर सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई, राकेश गौतम, डीपीआरओ एसएस सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। राज्य सूचना आयुक्त रचना पाल ने जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत विभिन्न विभागों से संबंधित 82 मामलों की सुनवाई की। कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को सबसे पहले आयुक्त ने 27 की सुनवाई में अवशेष रह गई बीस फाइलों को सुना। निर्देश दिया कि जन सूचना अधिकारी वास्तव में सूचना देने की नीयत से कार्य करें तथा स्पष्ट एवं बिंदुवार सूचना उपलब्ध कराए।
कहा कि सूचना के प्रकट किए जाने से छूट का अनावश्यक लाभ न उठाएं। बताया कि अधिनियम के तहत व्यक्तिगत सूचना नहीं दी जा सकती। शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के अंतर्गत भी सूचना के प्रकट करने पर रोक रहती है। ऐसी सूचना जो अपराधियों की जांच या अभियोजन प्रक्रिया में होगी, उस पर रोक है। कहा कि इस अधिनियम के तहत कोई भी सूचना साधारण रूप से उसी प्रारूप में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उसे मांगा गया है। सूचना अलग से तैयार नहीं की जाएगी, बल्कि कार्यालय में अनुरक्षित सूचना ही उपलब्ध कराई जाएगी।
विज्ञापन
इस मौके पर एडीएम अभय कुमार मिश्र, डीडीओ अजीत श्रीवास्तव, डिप्टी आरएमओ. गोरखनाथ तिवारी, डीएसओ सत्यवीर सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई, राकेश गौतम, डीपीआरओ एसएस सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन