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रात में जरूरतमंदो को भोजन पहुंचा रही मजिस्ट्रेट की गाड़ी
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रात में जरूरतमंदों को पहुंचा रहे भोजन
बस्ती। लॉकडाउन में तमाम परिवार भोजन की जरूरत को लेकर परेशान हैं। प्रशासन हर जरूरतमंद को भोजन पहुंचाने का दावा कर रहा है। हालांकि भोजन घर-घर तो नहीं पहुंचाया जा रहा है, मगर मजिस्ट्रेट की वह गाड़ी जिसमें भोजन रखकर राजस्व विभाग के कर्मी शहर के सड़कों पर रात को चक्कर काटते हैं। वे हर चौराहे पर गाड़ी रोक कर लोगों को भोजन दे रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार की रात कुछ ऐसा ही नजारा मालवीय मार्ग के मडवानगर चौराहे पर देखा। टीम से पूछा कि यह कौन लोग हैं जिन्हें भोजन का पैकेट दे रहे हैं तो जवाब मिला जो भी हाथ पसार रहा है वह जरूरतमंद है और उसे तत्काल भोजन का पैकेट दे दिया जा रहा है।
रात करीब आठ बजे मजिस्ट्रेट की गाड़ी में चार लोगों की टीम फर्राटे भरते हुए सड़क पर निकली। जिस चौराहे पर गाड़ी रुकी वहां सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से इस गाड़ी में बैठे शख्स ने पैकेट थमाया। जहां भीड़ एकत्रित होने लगी वहां उसने नियमानुसार दूरी कराकर लोगों को खड़ा कर दिया और इसके बाद क्रमवार भोजन दिया। प्रशासन के इस कार्य ने जरूरतमंदों का भरोसा जीत लिया है। कटरा निवासी पेशे से साइकिल मिस्त्री राजू ने बताया कि जब 21 दिन के लॉक डाउन की बात सुनी तो परेशान हो गया था क्योंकि वही परिवार का मुखिया है और मिस्त्री होने के नाते रोज कमाना और रोज खाना हो पाता है। परंतु इस समस्या का हल प्रशासन ने कर दिया।
भोजन बांट रहे कर्मियों ने बताया की उच्चाधिकारियों से स्पष्ट निर्देश प्राप्त हुए है कि कोई भी जरूरतमंद भूखा न सोने पाए और भोजन के बारे में उसे सोचने की जरूरत न पड़े।
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बस्ती। लॉकडाउन में तमाम परिवार भोजन की जरूरत को लेकर परेशान हैं। प्रशासन हर जरूरतमंद को भोजन पहुंचाने का दावा कर रहा है। हालांकि भोजन घर-घर तो नहीं पहुंचाया जा रहा है, मगर मजिस्ट्रेट की वह गाड़ी जिसमें भोजन रखकर राजस्व विभाग के कर्मी शहर के सड़कों पर रात को चक्कर काटते हैं। वे हर चौराहे पर गाड़ी रोक कर लोगों को भोजन दे रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार की रात कुछ ऐसा ही नजारा मालवीय मार्ग के मडवानगर चौराहे पर देखा। टीम से पूछा कि यह कौन लोग हैं जिन्हें भोजन का पैकेट दे रहे हैं तो जवाब मिला जो भी हाथ पसार रहा है वह जरूरतमंद है और उसे तत्काल भोजन का पैकेट दे दिया जा रहा है।
रात करीब आठ बजे मजिस्ट्रेट की गाड़ी में चार लोगों की टीम फर्राटे भरते हुए सड़क पर निकली। जिस चौराहे पर गाड़ी रुकी वहां सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से इस गाड़ी में बैठे शख्स ने पैकेट थमाया। जहां भीड़ एकत्रित होने लगी वहां उसने नियमानुसार दूरी कराकर लोगों को खड़ा कर दिया और इसके बाद क्रमवार भोजन दिया। प्रशासन के इस कार्य ने जरूरतमंदों का भरोसा जीत लिया है। कटरा निवासी पेशे से साइकिल मिस्त्री राजू ने बताया कि जब 21 दिन के लॉक डाउन की बात सुनी तो परेशान हो गया था क्योंकि वही परिवार का मुखिया है और मिस्त्री होने के नाते रोज कमाना और रोज खाना हो पाता है। परंतु इस समस्या का हल प्रशासन ने कर दिया।
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भोजन बांट रहे कर्मियों ने बताया की उच्चाधिकारियों से स्पष्ट निर्देश प्राप्त हुए है कि कोई भी जरूरतमंद भूखा न सोने पाए और भोजन के बारे में उसे सोचने की जरूरत न पड़े।
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