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विचाराधीन कैदी की मौत के मामले में दोषी को सजा
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विचाराधीन कैदी की मौत के मामले में दोषी को सजा
बस्ती। जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ शिवचंद की अदालत ने विचाराधीन कैदी की मौत के मामले में दोषी को आठ साल कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता राकेश प्रसाद पांडेय ने अदालत के समक्ष घटना का विवरण रखा। उन्होंने बताया कि मामला जिला कारागार में विचाराधीन कैदी विष्णु और रामपति के बीच का है। 11 जून 2016 की सुबह आठ बजे बैरक नंबर आठ में नहाने की बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया। विष्णु ने दूसरे बंदी रामपति को जमीन पर पटक दिया।
रामपति को काफी चोटें आई। उनका प्राथमिक इलाज जिला कारागार में किया गया। हालत बिगड़ने पर चिकित्सक ने 13 जून को रामपति को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से नाजुक हालत में उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। लखनऊ पहुंचते-पहुंचते रामपति की मौत हो गई। इस मामले में जेलर विष्णुकांत मिश्रा ने कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचक ने नौ जनवरी 2017 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने सजा सुनाई।
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बस्ती। जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ शिवचंद की अदालत ने विचाराधीन कैदी की मौत के मामले में दोषी को आठ साल कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता राकेश प्रसाद पांडेय ने अदालत के समक्ष घटना का विवरण रखा। उन्होंने बताया कि मामला जिला कारागार में विचाराधीन कैदी विष्णु और रामपति के बीच का है। 11 जून 2016 की सुबह आठ बजे बैरक नंबर आठ में नहाने की बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया। विष्णु ने दूसरे बंदी रामपति को जमीन पर पटक दिया।
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रामपति को काफी चोटें आई। उनका प्राथमिक इलाज जिला कारागार में किया गया। हालत बिगड़ने पर चिकित्सक ने 13 जून को रामपति को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से नाजुक हालत में उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। लखनऊ पहुंचते-पहुंचते रामपति की मौत हो गई। इस मामले में जेलर विष्णुकांत मिश्रा ने कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचक ने नौ जनवरी 2017 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने सजा सुनाई।
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