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रियायती दर पर दाल मिलनी शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2015 12:21 AM IST
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बस्ती। सरकार की ओर से रियायती दर पर वितरण करने के लिए जिले को 50 क्विंटल
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अरहर दाल का पहला खेप मिला है। पहले ही दिन दोपहर दो बजे तक 323 किलो दाल
बिक गई। दाल खरीदने वालों की लाइन लगी हुई थी।
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से 120 रुपये प्रति किलो की दर से मिलनी शुरू हो गई है। प्रबंधक जीउत लाल श्रीवास्तव ने बताया कि यह दाल सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों और एपीएल, बीपीएल एवं अन्त्योदय राशन कार्डधारकों को प्रति कार्ड दो किलो दी जा रही है।
बताया कि अगर किसी सरकारी सेवक के पास कार्ड नहीं है, उनका कार्ड भी दस रुपये जमा कर बनाया जा रहा है।
गरीबों की थाली से गायब हो चुके अरहर की दाल को फिर से थाली में लाने के लिए सरकार ने पहल की है।
इसके लिए जिले को 50 क्विंटल दाल मिली है। सस्ती दर पर दाल मिलने की सूचना जैसे ही कलेक्ट्रेट कर्मचारियों, अधिवक्ताओं आदि को हुई, वे डिपो पर पहुंच गए। देखते ही देखते मात्र चार घंटे में 323 किलो दाल बिक गई।
जिन सरकारी कर्मचारियों के पास कार्ड नहीं था, वे कार्ड बनवाने में जुट गए। लगभग 100 कर्मचारियों ने कार्ड बनवाए। दाल एक किलो के पैकेट में दी जा रही है। एक व्यक्ति और एक राशन कार्ड पर दो किलो दाल मिल रही है।
दाल खरीदने वाले कर्मचारियों ने बताया कि देखने में दाल की गुणवत्ता ठीक लग रही है। कलेक्ट्रेट कर्मचारी राधेश्याम जायसवाल, अनिल कुमार, अमरपाती, देवेंद्र श्रीवास्तव, अशोक मिश्र आदि का कहना है कि सस्ती दर पर दाल मिलने से उन लोगों को राहत मिली है।
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से 120 रुपये प्रति किलो की दर से मिलनी शुरू हो गई है। प्रबंधक जीउत लाल श्रीवास्तव ने बताया कि यह दाल सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों और एपीएल, बीपीएल एवं अन्त्योदय राशन कार्डधारकों को प्रति कार्ड दो किलो दी जा रही है।
बताया कि अगर किसी सरकारी सेवक के पास कार्ड नहीं है, उनका कार्ड भी दस रुपये जमा कर बनाया जा रहा है।
गरीबों की थाली से गायब हो चुके अरहर की दाल को फिर से थाली में लाने के लिए सरकार ने पहल की है।
इसके लिए जिले को 50 क्विंटल दाल मिली है। सस्ती दर पर दाल मिलने की सूचना जैसे ही कलेक्ट्रेट कर्मचारियों, अधिवक्ताओं आदि को हुई, वे डिपो पर पहुंच गए। देखते ही देखते मात्र चार घंटे में 323 किलो दाल बिक गई।
जिन सरकारी कर्मचारियों के पास कार्ड नहीं था, वे कार्ड बनवाने में जुट गए। लगभग 100 कर्मचारियों ने कार्ड बनवाए। दाल एक किलो के पैकेट में दी जा रही है। एक व्यक्ति और एक राशन कार्ड पर दो किलो दाल मिल रही है।
दाल खरीदने वाले कर्मचारियों ने बताया कि देखने में दाल की गुणवत्ता ठीक लग रही है। कलेक्ट्रेट कर्मचारी राधेश्याम जायसवाल, अनिल कुमार, अमरपाती, देवेंद्र श्रीवास्तव, अशोक मिश्र आदि का कहना है कि सस्ती दर पर दाल मिलने से उन लोगों को राहत मिली है।