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Basti News: कान में पानी जाने से बचाएं, ओटोमाइकोसिस का खतरा
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जिला अस्पताल में मरीजों को परामर्श देते चिकित्सक-संवाद
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बस्ती। बारिश के मौसम में बढ़ी उमस और नमी के कारण कानों में फंगल इंफेक्शन (ओटोमाइकोसिस) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल के ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विभाग की ओपीडी में 40 मरीज इस समस्या से पीड़ित होकर आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस कन्नौजिया ने बताया कि ओपीडी में हर दिन 150 मरीज आ रहे हैं। जुलाई से अक्तूबर तक कान के अंदर नमी बनी रहने से फंगस तेजी से पनपता है। कई लोग नहाने या बारिश में भीगने के बाद कानों को ठीक से नहीं सुखाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग कान खुजलाने के लिए माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड का इस्तेमाल करते हैं, इससे कान की त्वचा पर सूक्ष्म घाव बन जाते हैं। फंगस को बढ़ने का मौका मिल जाता है।
सलाह दी कि यदि कान में पानी चला जाए तो तुरंत साफ तीली में रूई लपेटकर या मुलायम सूती कपड़े से बाहरी हिस्से को धीरे-धीरे सुखा लें। तेज दर्द, मवाद, पर्दे में छेद या गंभीर संक्रमण की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी तेल या दवा कान में नहीं डालनी चाहिए।
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ये हैं लक्षण
- कान में लगातार तेज खुजली होना।
- कान में दर्द या जलन महसूस होना।
- कान बंद होने या भारीपन का एहसास होना।
- सुनाई कम देना या आवाज दबकर सुनाई देना।
- कान से सफेद, काला या पीले रंग का स्राव निकलना।
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चिकित्सकों के सुझाव
- नहाने या बारिश में भीगने के बाद कानों को अच्छी तरह सुखाएं।
- कान में पानी जाने से बचाएं, आवश्यकता होने पर ईयर प्लग का उपयोग करें।
- माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड से कान की सफाई न करें।
- कान में खुजली होने पर स्वयं दवा या ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।
- दर्द, खुजली या स्राव की स्थिति में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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जिला अस्पताल के नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस कन्नौजिया ने बताया कि ओपीडी में हर दिन 150 मरीज आ रहे हैं। जुलाई से अक्तूबर तक कान के अंदर नमी बनी रहने से फंगस तेजी से पनपता है। कई लोग नहाने या बारिश में भीगने के बाद कानों को ठीक से नहीं सुखाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग कान खुजलाने के लिए माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड का इस्तेमाल करते हैं, इससे कान की त्वचा पर सूक्ष्म घाव बन जाते हैं। फंगस को बढ़ने का मौका मिल जाता है।
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सलाह दी कि यदि कान में पानी चला जाए तो तुरंत साफ तीली में रूई लपेटकर या मुलायम सूती कपड़े से बाहरी हिस्से को धीरे-धीरे सुखा लें। तेज दर्द, मवाद, पर्दे में छेद या गंभीर संक्रमण की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी तेल या दवा कान में नहीं डालनी चाहिए।
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ये हैं लक्षण
- कान में लगातार तेज खुजली होना।
- कान में दर्द या जलन महसूस होना।
- कान बंद होने या भारीपन का एहसास होना।
- सुनाई कम देना या आवाज दबकर सुनाई देना।
- कान से सफेद, काला या पीले रंग का स्राव निकलना।
चिकित्सकों के सुझाव
- नहाने या बारिश में भीगने के बाद कानों को अच्छी तरह सुखाएं।
- कान में पानी जाने से बचाएं, आवश्यकता होने पर ईयर प्लग का उपयोग करें।
- माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड से कान की सफाई न करें।
- कान में खुजली होने पर स्वयं दवा या ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।
- दर्द, खुजली या स्राव की स्थिति में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लें।