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Basti News: महुआ डाबर महोत्सव की तैयारियां तेज, होंगे कार्यक्रम
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नगर बाजार। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा 8 जून से 10 जून तक महुआ डाबर महोत्सव-2026 का आयोजन बहादुरपुर विकास खंड स्थित एतिहासिक क्रांति स्थल महुआ डाबर में किया जाएगा। शौर्य, शहादत और विरासत की थीम पर आधारित यह तीन दिवसीय महोत्सव भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को समर्पित होगा। इसको लेकर तैयारी तेज हो गई है।
महोत्सव का आयोजन प्रतिवर्ष 10 जून 1857 को महुआ डाबर में क्रांतिवीर जफर अली एवं उनके साथियों द्वारा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध किए गए वीरतापूर्ण संघर्ष की स्मृति में किया जाता है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देते हुए कई ब्रिटिश अधिकारियों को परास्त किया था। इसके प्रतिशोध में ब्रिटिश शासन ने महुआ डाबर गांव को आग के हवाले कर दिया और राजस्व अभिलेखों में उसे ‘गैर-चिरागी’ घोषित कर दिया। इसी गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने तथा अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
मनोरमा नदी के पावन तट पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव का उद्देश्य शहीदों के त्याग और बलिदान की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ना तथा स्थानीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसके साथ ही विरासत यात्रा (हैरिटेज वॉक), गारद सलामी एवं मशाल सलामी, महुआ डाबर के इतिहास पर परिचर्चा, स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित फिल्म एवं डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन, विद्यालयी विद्यार्थियों की देशभक्ति प्रस्तुतियां, स्वतंत्रता संग्राम साहित्य सम्मेलन, इतिहासकारों, शोधार्थियों एवं लेखकों का संवाद, शहीदों की झांकियां, नाट्य मंचन, ओपन माइक के माध्यम से कविता, गीत, वक्तृत्व एवं लोककला प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
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महोत्सव का आयोजन प्रतिवर्ष 10 जून 1857 को महुआ डाबर में क्रांतिवीर जफर अली एवं उनके साथियों द्वारा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध किए गए वीरतापूर्ण संघर्ष की स्मृति में किया जाता है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देते हुए कई ब्रिटिश अधिकारियों को परास्त किया था। इसके प्रतिशोध में ब्रिटिश शासन ने महुआ डाबर गांव को आग के हवाले कर दिया और राजस्व अभिलेखों में उसे ‘गैर-चिरागी’ घोषित कर दिया। इसी गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने तथा अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
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मनोरमा नदी के पावन तट पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव का उद्देश्य शहीदों के त्याग और बलिदान की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ना तथा स्थानीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसके साथ ही विरासत यात्रा (हैरिटेज वॉक), गारद सलामी एवं मशाल सलामी, महुआ डाबर के इतिहास पर परिचर्चा, स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित फिल्म एवं डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन, विद्यालयी विद्यार्थियों की देशभक्ति प्रस्तुतियां, स्वतंत्रता संग्राम साहित्य सम्मेलन, इतिहासकारों, शोधार्थियों एवं लेखकों का संवाद, शहीदों की झांकियां, नाट्य मंचन, ओपन माइक के माध्यम से कविता, गीत, वक्तृत्व एवं लोककला प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
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