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Basti News: नए चेहरे के सहारे शहर में सरकार की तैयारी
Wed, 03 May 2023 01:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 03 May 2023 01:43 AM IST
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बस्ती। नगर पालिका परिषद चुनाव की गहमागहमी अब तेज हो चली है। भाजपा यहां दूसरी बार ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने की जुगत में है। पिछले बार की तरह इस बार भी सत्तासीन दल नए चेहरे के सहारे हैं। वहीं सपा ने दूसरे पाले के प्रत्याशी पर दांव चल दिया है। बसपा भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। नए चेहरे को मैदान में उतारकर चुनावी जंग और दिलचस्प बना दी है। आम आदमी पार्टी ने सपा के बागी पर पासा फेंका है। कांग्रेस ने अपने पूर्व के उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।
नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी उतारने की पहल सपा ने की। वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार रह चुकी नेहा वर्मा को उनके पति अंकुर वर्मा को पार्टी में शामिल कर उम्मीदवार बना दिया। अंकुर कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। कायस्थ समाज से ताल्लुक रखने वाली नेहा पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रूपम मिश्रा से शिकस्त खा चुकी हैं। चूंकि शहर में कायस्थ बिरादारी निर्णायक भूमिका में रहती है, इसलिए सपा के इस दांव से भाजपा सहित अन्य दलों में खलबली मच गई। जवाब में भाजपा ने भी अपने तरकश से कायस्थ तीर ही छोड़ा। संगठन के वरिष्ठ नेता अनूप खरे की पत्नी सीमा खरे को मैदान में उतारकर भाजपा ने चुनावी तापमान चढ़ा दिया। भाजपा ने इस बार एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश की है। एक तो पिछली बार की तरह नया चेहरा और दूसरा कायस्थ वोट सहेजने की चाल पार्टी ने चली है।
हालांकि इस दांव से दोनों दलों को बगावत का भी सामना करना पड़ा है। सीमा खरे को मैदान में उतारने से भाजपा नेता आशीष शुक्ल बागी हो गए। उन्होंने भी अपनी पत्नी नेहा शुक्ला को मैदान में उतारकर इस चुनाव में जोर आजमाइश शुरू कर दी है। सपा के वरिष्ठ नेता सिद्धेश सिन्हा भी प्रत्याशी चयन के बाद बगावत पर उतर आए। उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। उनकी पत्नी विनीता सिन्हा आप उम्मीदवार के रूप में मैदान में आ गई। बसपा भी इस बार चुनावी मैदान में है। प्रीति त्रिपाठी को नए चेहरे के रूप में अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक अफसर यू अहमद की पत्नी सलमा अफसर पर अपना दांव चला है। कुल मिलाकर नगर पालिका चुनाव में लड़ाई दिलचस्प हो चली है। ज्यों-ज्यों तिथि करीब आ रही है प्रत्याशियों की धड़कने बढ़ती जा रही है। राजनीतिक दल भी अपने प्रत्याशियों के लिए पूरी ताकत झोंक दिए हैं। पार्टी के ओहदेदार नेता खुद चुनावी कमान संभाल रखे हैं। उन्हें चौक-चौराहों से लगायत गली-मोहल्लों तक प्रत्याशियों का प्रचार करते हुए देखा जा रहा है। अब देखना है कि समीकरण किस करवट बैठेगा और बाजी कौन मारेगा।
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निर्दलीय उम्मीदवार भी बिगाड़ सकते हैं समीकरण
- निर्दतीय उम्मीदवार भी चुनाव में दलीय समीकरण बिगाड़ सकते हैं। कुछ पार्टियों से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोंक दिए हैं तो कुछ अपने दमखम पर भाग्य आजमा रहे हैं। निर्दलीय उम्मीदवार दलीय प्रत्याशियों के लिए एक अलग चुनौती बने हैं। राजनीतिक दलों को इनके दांव पेंच का भी सामना करना पड़ रहा है।
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वर्ष 2017 में नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव परिणाम
भाजपा- 12205
सपा- 8199
कांग्रेस- 9286
बसपा- 7958
निर्दल मोहसिना खातून- 4611
निर्दल नीलम सिंह- 3833
निर्दल रामरती- 3165
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नगर पालिका क्षेत्र में इस बार कुल मतदाताओं की संख्या- 117830
नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए कुल प्रत्याशियों की संख्या- 14
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नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी उतारने की पहल सपा ने की। वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार रह चुकी नेहा वर्मा को उनके पति अंकुर वर्मा को पार्टी में शामिल कर उम्मीदवार बना दिया। अंकुर कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। कायस्थ समाज से ताल्लुक रखने वाली नेहा पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रूपम मिश्रा से शिकस्त खा चुकी हैं। चूंकि शहर में कायस्थ बिरादारी निर्णायक भूमिका में रहती है, इसलिए सपा के इस दांव से भाजपा सहित अन्य दलों में खलबली मच गई। जवाब में भाजपा ने भी अपने तरकश से कायस्थ तीर ही छोड़ा। संगठन के वरिष्ठ नेता अनूप खरे की पत्नी सीमा खरे को मैदान में उतारकर भाजपा ने चुनावी तापमान चढ़ा दिया। भाजपा ने इस बार एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश की है। एक तो पिछली बार की तरह नया चेहरा और दूसरा कायस्थ वोट सहेजने की चाल पार्टी ने चली है।
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हालांकि इस दांव से दोनों दलों को बगावत का भी सामना करना पड़ा है। सीमा खरे को मैदान में उतारने से भाजपा नेता आशीष शुक्ल बागी हो गए। उन्होंने भी अपनी पत्नी नेहा शुक्ला को मैदान में उतारकर इस चुनाव में जोर आजमाइश शुरू कर दी है। सपा के वरिष्ठ नेता सिद्धेश सिन्हा भी प्रत्याशी चयन के बाद बगावत पर उतर आए। उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। उनकी पत्नी विनीता सिन्हा आप उम्मीदवार के रूप में मैदान में आ गई। बसपा भी इस बार चुनावी मैदान में है। प्रीति त्रिपाठी को नए चेहरे के रूप में अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक अफसर यू अहमद की पत्नी सलमा अफसर पर अपना दांव चला है। कुल मिलाकर नगर पालिका चुनाव में लड़ाई दिलचस्प हो चली है। ज्यों-ज्यों तिथि करीब आ रही है प्रत्याशियों की धड़कने बढ़ती जा रही है। राजनीतिक दल भी अपने प्रत्याशियों के लिए पूरी ताकत झोंक दिए हैं। पार्टी के ओहदेदार नेता खुद चुनावी कमान संभाल रखे हैं। उन्हें चौक-चौराहों से लगायत गली-मोहल्लों तक प्रत्याशियों का प्रचार करते हुए देखा जा रहा है। अब देखना है कि समीकरण किस करवट बैठेगा और बाजी कौन मारेगा।
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निर्दलीय उम्मीदवार भी बिगाड़ सकते हैं समीकरण
- निर्दतीय उम्मीदवार भी चुनाव में दलीय समीकरण बिगाड़ सकते हैं। कुछ पार्टियों से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोंक दिए हैं तो कुछ अपने दमखम पर भाग्य आजमा रहे हैं। निर्दलीय उम्मीदवार दलीय प्रत्याशियों के लिए एक अलग चुनौती बने हैं। राजनीतिक दलों को इनके दांव पेंच का भी सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2017 में नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव परिणाम
भाजपा- 12205
सपा- 8199
कांग्रेस- 9286
बसपा- 7958
निर्दल मोहसिना खातून- 4611
निर्दल नीलम सिंह- 3833
निर्दल रामरती- 3165
नगर पालिका क्षेत्र में इस बार कुल मतदाताओं की संख्या- 117830
नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए कुल प्रत्याशियों की संख्या- 14