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पीएफएमएस के फेर में फंसे किसानों के 16 करोड़
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- पीसीएफ व पीसीयू पर बकाया है धान खरीद की रकम
नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। मूल्य समर्थन योजना के तहत पीसीएफ व पीसीयू द्वारा 31 दिसंबर के बाद हुई धान खरीद और पूर्व के शेष भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से करने पर शासन ने रोक लगा दी है। अब भुगतान पीएफएमएस यानी पब्लिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम से होगा। इससे किसानों के करीब 16 करोड़ रुपये फंस गए हैं। गौरतलब है कि अब तक डेढ़ अरब रुपये से अधिक का धान एजेंसियों ने विभिन्न क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीदा है।
पीएफएमएस के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। भुगतान के लिए सबसे पहले संबंधित केंद्र प्रभारियों का डिजिटल हस्ताक्षर शासन की ओर से बनेगा। इसके बाद संबंधित किसान का खाता नंबर, नाम व मोबाइल नंबर एनआईसी से पीएफएमएस के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। संपूर्ण फाइल पूरी होने व अपलोड के बाद लखनऊ संबंधित के खाते में धन भेजेगा। यदि खाता नंबर में कोई अंक गलत हुआ तो धन किसान को नहीं मिल सकेगा।
शासन के निर्देशों के क्रम में यदि केंद्र प्रभारी अपना डिजिटल हस्ताक्षर शासन को भेजेंगे तो उसमें लंबा समय लगेेगा। ऐसे में किसानों अब अपने उत्पाद का मूल्य पाने में लंबा इंतजार करना होगा।
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डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि यूं तो प्रक्रिया पूरी करने में थोड़ा समय जरूर लगेगा, मगर भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी होगी। पीएफएमएस से भुगतान में कोई दिक्कत नहीं आती, न तो किसी पर कोई आरोप लगता है। यदि सब कुछ ठीक होता है तो 72 घंटे में धन संबंधित किसान के खाते में पहुंच जाता है।
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नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। मूल्य समर्थन योजना के तहत पीसीएफ व पीसीयू द्वारा 31 दिसंबर के बाद हुई धान खरीद और पूर्व के शेष भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से करने पर शासन ने रोक लगा दी है। अब भुगतान पीएफएमएस यानी पब्लिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम से होगा। इससे किसानों के करीब 16 करोड़ रुपये फंस गए हैं। गौरतलब है कि अब तक डेढ़ अरब रुपये से अधिक का धान एजेंसियों ने विभिन्न क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीदा है।
पीएफएमएस के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। भुगतान के लिए सबसे पहले संबंधित केंद्र प्रभारियों का डिजिटल हस्ताक्षर शासन की ओर से बनेगा। इसके बाद संबंधित किसान का खाता नंबर, नाम व मोबाइल नंबर एनआईसी से पीएफएमएस के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। संपूर्ण फाइल पूरी होने व अपलोड के बाद लखनऊ संबंधित के खाते में धन भेजेगा। यदि खाता नंबर में कोई अंक गलत हुआ तो धन किसान को नहीं मिल सकेगा।
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शासन के निर्देशों के क्रम में यदि केंद्र प्रभारी अपना डिजिटल हस्ताक्षर शासन को भेजेंगे तो उसमें लंबा समय लगेेगा। ऐसे में किसानों अब अपने उत्पाद का मूल्य पाने में लंबा इंतजार करना होगा।
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डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि यूं तो प्रक्रिया पूरी करने में थोड़ा समय जरूर लगेगा, मगर भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी होगी। पीएफएमएस से भुगतान में कोई दिक्कत नहीं आती, न तो किसी पर कोई आरोप लगता है। यदि सब कुछ ठीक होता है तो 72 घंटे में धन संबंधित किसान के खाते में पहुंच जाता है।