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जिनोम सिक्वेसिंग के लिए भेजा गया मात्र 30 नमूना
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जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए मात्र 30 नमूने
सीएमओ बोले- केवल रेड जोन व विदेश से आने वालों की ही होगी जिनोम सिक्वेंसिंग
लखनऊ से कम सीटी वैल्यू वालों का ही मांगा गया था नमूना
बस्ती। ओमिक्रॉन को लेकर शासन व सरकार भले सतर्क हो, मगर अपने जिले में जिनोम सिक्वेंसिंग के मात्र 30 नमूने ही मेडिकल कॉलेज से जांच के लिए भेजे गए हैं। जबकि अब तक करीब 172 लोग संक्रमित हैं। जिनोम सिक्वेसिंग से इस बात का पता लगाया जा सकता है कि कोरोना पाजिटिव केस ओमिक्रॉन वायरस का है या नहीं।
सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर की मानें तो केवल रेड जोन वाले देश से आने वाले लोगों की ही जिनोम सिक्वेंसिंग को नमूना दिया जाता है, जबकि कैली के माइक्रो बाइलोजिस्ट डॉ. विनोद कुमार मौर्य कहते हैं कि लखनऊ के निर्देशानुसार ही नमूना भेजा जाता है। अभी तक लखनऊ ने केवल सीटी वैल्यू यानी साइकल थ्रसाल्ड की वैल्यू कम वालों का ही नमूना मांगा है, जिस मानक में अब तक तीस लोगों का नमूना ही पाया गया था, जिसे जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जा चुका है। अपने जिले में पहला केस 28 दिसंबर को मिला, मगर इसके बाद तीस दिसंबर को दो केस मिले, इनमें से एक ओमिक्रॉन का रोगी मिला है। इसके बाद तो ताबड़तोड़ केस आने लगे। जांच का दायरा हालांकि बढ़ नहीं सका, मगर पॉजिटिव केस की संख्या बढ़ गई। इधर, प्रदेश सरकार ने ओमिक्रॉन की आमद को लेकर सतर्कता के तहत जीनोम सिक्वेंसिंग के निर्देश दिए। ऐसे में पहले तो तेजी से नमूना लखनऊ जांच के लिए भेजा गया, मगर अब स्थिति ढीली हो गई। जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए नमूना भेजने की गति थम गई है। नतीजतन, अब तक मात्र 30 नमूनों को लखनऊ भेजा गया है। इसके पीछे सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर व माइक्रो बाइलोजिस्ट डॉ. विनोद कुमार मौर्य का अलग-अलग मत है। सीएमओ केवल रेड जोन वाले विदेशी प्रवासियों के नमूनों को भेजे जाने की बात कहते हैं, मगर डॉ. मौर्य मानक की बात कहते हैं। इन दोनों के बीच जिनोम सिक्वेंसिंग की प्रक्रिया उलझी हुई है।
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सीएमओ बोले- केवल रेड जोन व विदेश से आने वालों की ही होगी जिनोम सिक्वेंसिंग
लखनऊ से कम सीटी वैल्यू वालों का ही मांगा गया था नमूना
बस्ती। ओमिक्रॉन को लेकर शासन व सरकार भले सतर्क हो, मगर अपने जिले में जिनोम सिक्वेंसिंग के मात्र 30 नमूने ही मेडिकल कॉलेज से जांच के लिए भेजे गए हैं। जबकि अब तक करीब 172 लोग संक्रमित हैं। जिनोम सिक्वेसिंग से इस बात का पता लगाया जा सकता है कि कोरोना पाजिटिव केस ओमिक्रॉन वायरस का है या नहीं।
सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर की मानें तो केवल रेड जोन वाले देश से आने वाले लोगों की ही जिनोम सिक्वेंसिंग को नमूना दिया जाता है, जबकि कैली के माइक्रो बाइलोजिस्ट डॉ. विनोद कुमार मौर्य कहते हैं कि लखनऊ के निर्देशानुसार ही नमूना भेजा जाता है। अभी तक लखनऊ ने केवल सीटी वैल्यू यानी साइकल थ्रसाल्ड की वैल्यू कम वालों का ही नमूना मांगा है, जिस मानक में अब तक तीस लोगों का नमूना ही पाया गया था, जिसे जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जा चुका है। अपने जिले में पहला केस 28 दिसंबर को मिला, मगर इसके बाद तीस दिसंबर को दो केस मिले, इनमें से एक ओमिक्रॉन का रोगी मिला है। इसके बाद तो ताबड़तोड़ केस आने लगे। जांच का दायरा हालांकि बढ़ नहीं सका, मगर पॉजिटिव केस की संख्या बढ़ गई। इधर, प्रदेश सरकार ने ओमिक्रॉन की आमद को लेकर सतर्कता के तहत जीनोम सिक्वेंसिंग के निर्देश दिए। ऐसे में पहले तो तेजी से नमूना लखनऊ जांच के लिए भेजा गया, मगर अब स्थिति ढीली हो गई। जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए नमूना भेजने की गति थम गई है। नतीजतन, अब तक मात्र 30 नमूनों को लखनऊ भेजा गया है। इसके पीछे सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर व माइक्रो बाइलोजिस्ट डॉ. विनोद कुमार मौर्य का अलग-अलग मत है। सीएमओ केवल रेड जोन वाले विदेशी प्रवासियों के नमूनों को भेजे जाने की बात कहते हैं, मगर डॉ. मौर्य मानक की बात कहते हैं। इन दोनों के बीच जिनोम सिक्वेंसिंग की प्रक्रिया उलझी हुई है।
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