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Basti News: गोशालाओं की जमीनी हकीकत परखेंगे अफसर, पोर्टल पर देंगे रिपोर्ट
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बस्ती। जिले के गोशालाओं की व्यवस्था सुधारने के लिए सख्ती शुरू हो गई है। अधिकारियों को माह में दो बार संयुक्त निरीक्षण कर बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। निरीक्षण रिपोर्ट ''गो आश्रय पोर्टल'' पर अपलोड की जाएगी और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जनपद की गोशालाओं की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और वहां संरक्षित बेसहारा पशुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जनपद के सभी उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों, पशु चिकित्सा अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे गोशालाओं का नियमित निरीक्षण कर वहां बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करें।
डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने निर्देशित करते हुए कहा है कि अधिकारियों को दफ्तर से बाहर निकलकर धरातल पर काम करना होगा। हर ब्लाॅक के खंड विकास अधिकारी और संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी माह में कम से कम दो बार गोशालाओं का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान अधिकारी मुख्य रूप से गोशालाओं के संचालन, गोवंश के लिए चारा, पानी और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की बारीकी से जांच करेंगे। सीवीओ डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि 3400 पशु 51 गोशाला में संरक्षित हैं। निगरानी शुरू कर दी गई है।
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गो आश्रय पोर्टल पर अपलोड होगी रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद अधिकारियों को निरीक्षण आख्या तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसे गो आश्रय पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इस रिपोर्ट को मुख्य विकास अधिकारी के भी समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, अधिकारियों को हर महीने और हर पखवाड़े (पाक्षिक) की प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से गो आश्रय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
कोट
गोवंश के रख-रखाव में किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी गोशाला में चारा-पानी या अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-सार्थक अग्रववाल, सीडीओ, बस्ती।
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जनपद की गोशालाओं की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और वहां संरक्षित बेसहारा पशुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जनपद के सभी उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों, पशु चिकित्सा अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे गोशालाओं का नियमित निरीक्षण कर वहां बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करें।
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डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने निर्देशित करते हुए कहा है कि अधिकारियों को दफ्तर से बाहर निकलकर धरातल पर काम करना होगा। हर ब्लाॅक के खंड विकास अधिकारी और संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी माह में कम से कम दो बार गोशालाओं का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान अधिकारी मुख्य रूप से गोशालाओं के संचालन, गोवंश के लिए चारा, पानी और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की बारीकी से जांच करेंगे। सीवीओ डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि 3400 पशु 51 गोशाला में संरक्षित हैं। निगरानी शुरू कर दी गई है।
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गो आश्रय पोर्टल पर अपलोड होगी रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद अधिकारियों को निरीक्षण आख्या तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसे गो आश्रय पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इस रिपोर्ट को मुख्य विकास अधिकारी के भी समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, अधिकारियों को हर महीने और हर पखवाड़े (पाक्षिक) की प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से गो आश्रय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
कोट
गोवंश के रख-रखाव में किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी गोशाला में चारा-पानी या अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-सार्थक अग्रववाल, सीडीओ, बस्ती।