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Basti News: अब गांवों में ही होगा ठोस और तरल अपशिष्टों का प्रबंधन...खर्च होंगे 3.50 करोड़
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सदर ब्लॉक के ग्राम पंचायत कटया में बना कूड़ा कलेक्शन सेंटर स्रोत विभाग
बस्ती। स्वच्छ भारत मिशन के फेज-2 में सभी ग्राम पंचायतों में शौचालय व सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करा दिया गया। अब फेज-3 में ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए चयनित गांवों में बनकर तैयार हुए ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन केंद्र के लिए भुगतान से वंचित गांवों से धनराशि के लिए डिमांड भेजी जा रही है। अभी तक 21 ग्राम पंचायतों से डिमांड आया है, जिसके खाते में धनराशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस योजना पर गांवों में 3.50 करोड़ रुपये खर्च कि जाने हैं।
बताया गया कि इन गांवों को पूरी तरह ठोस व तरह अपशिष्ट मुक्त बनाया जा रहा है। शासन की ओर से दो किस्तों में तीन करोड़ 50 लाख रुपये जारी किए गए हैं। डीपीआरओ घनश्याम सागर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य कराए जाने के लिए पांच हजार से अधिक आबादी वाले ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता पर संतृप्त किए जाने का निर्णय लिया गया था।
इसके बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 में पांच हजार से कम आबादी वाले गांव, फिर 2024-25 में उससे कम आबादी वाले कम और फिर 2025-26 में सभी छूटे गावों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन केंद्र के लिए चयन किया गया था। विभाग का दावा है कि सभी 1185 ग्राम पंचायतों में यह केंद्र बन चुका है। इसमें से जो ग्राम पंचायतें धनराशि से वंचित रह गई हैं, उसमें करीब 700 हैं। उनसे डिमांड मांगा जा रहा है। अभी तक चालू सत्र में 21 ग्राम पंचायतों ने ही डिमांड किया है। शेष का डिमांड आना बाकी है।
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बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर 660 रुपये प्रति व्यक्ति और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर 45 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से बजट खर्च किया जा रहा है, वहीं जो सबसे छोटे गांव चयन किए गए हैं, जहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर 280 प्रति व्यक्ति और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर 60 प्रति व्यक्ति के हिसाब से खर्च किया जा रहा है। इसमें 30 फीसदी बजट ग्राम पंचायतों से खर्च किया गया है।
बाकी धनराशि पंचायतीराज विभाग स्वच्छता अभियान के तहत जारी करेगा। इसके लिए प्रति गांव के लिए लिमिट तय है कि 50 लाख रुपये तक ही सेंटर पर खर्च कर सकेंगे। विभाग का दवा है कि अधिकांश गांवों से निकलने वाले कचरे के लिए गांवों में बने ठोस एवं तरस कचरा प्रबंधन केंद्र की स्थापना हो चुकी है। गांवों में घर-घर से कचरा एकत्र किया जा रहा है। अपशिष्ट केंद्र पर अलग-अलग किया जा रहा है।
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लैप्स होने के बाद फिर आया बजट, भुगतान की प्रक्रिया में आएगी तेजी
विभाग के अनुसार, पूर्व में तीन करोड़ का बजट जारी हुआ था। मगर, ग्राम पंचायतों से ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन केंद्र के लिए कोई डिमांड न होने पर यह बजट लैप्स हो गया था। अब फिर से उसी बजट को शासन स्तर से जारी किया गया है। इसके अलावा 50 लाख रुपये अतिरिक्त में आया है। अब डिमांड के साथ भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
कोट
1185 ग्राम पंचायतों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन केंद्र बनकर तैयार हैं। क्रियाशील भी करा दिए गए हैं। अभी करीब 700 ग्राम पंचायतों का भुगतान बाकी है, उनसे डिमांड के लिए कहा गया है। अभी तक सिर्फ 21 गांव का डिमांड प्राप्त हुआ है, भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-घनश्याम सागर, डीपीआरओ, बस्ती।
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बताया गया कि इन गांवों को पूरी तरह ठोस व तरह अपशिष्ट मुक्त बनाया जा रहा है। शासन की ओर से दो किस्तों में तीन करोड़ 50 लाख रुपये जारी किए गए हैं। डीपीआरओ घनश्याम सागर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य कराए जाने के लिए पांच हजार से अधिक आबादी वाले ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता पर संतृप्त किए जाने का निर्णय लिया गया था।
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इसके बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 में पांच हजार से कम आबादी वाले गांव, फिर 2024-25 में उससे कम आबादी वाले कम और फिर 2025-26 में सभी छूटे गावों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन केंद्र के लिए चयन किया गया था। विभाग का दावा है कि सभी 1185 ग्राम पंचायतों में यह केंद्र बन चुका है। इसमें से जो ग्राम पंचायतें धनराशि से वंचित रह गई हैं, उसमें करीब 700 हैं। उनसे डिमांड मांगा जा रहा है। अभी तक चालू सत्र में 21 ग्राम पंचायतों ने ही डिमांड किया है। शेष का डिमांड आना बाकी है।
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बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर 660 रुपये प्रति व्यक्ति और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर 45 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से बजट खर्च किया जा रहा है, वहीं जो सबसे छोटे गांव चयन किए गए हैं, जहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर 280 प्रति व्यक्ति और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर 60 प्रति व्यक्ति के हिसाब से खर्च किया जा रहा है। इसमें 30 फीसदी बजट ग्राम पंचायतों से खर्च किया गया है।
बाकी धनराशि पंचायतीराज विभाग स्वच्छता अभियान के तहत जारी करेगा। इसके लिए प्रति गांव के लिए लिमिट तय है कि 50 लाख रुपये तक ही सेंटर पर खर्च कर सकेंगे। विभाग का दवा है कि अधिकांश गांवों से निकलने वाले कचरे के लिए गांवों में बने ठोस एवं तरस कचरा प्रबंधन केंद्र की स्थापना हो चुकी है। गांवों में घर-घर से कचरा एकत्र किया जा रहा है। अपशिष्ट केंद्र पर अलग-अलग किया जा रहा है।
लैप्स होने के बाद फिर आया बजट, भुगतान की प्रक्रिया में आएगी तेजी
विभाग के अनुसार, पूर्व में तीन करोड़ का बजट जारी हुआ था। मगर, ग्राम पंचायतों से ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन केंद्र के लिए कोई डिमांड न होने पर यह बजट लैप्स हो गया था। अब फिर से उसी बजट को शासन स्तर से जारी किया गया है। इसके अलावा 50 लाख रुपये अतिरिक्त में आया है। अब डिमांड के साथ भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
कोट
1185 ग्राम पंचायतों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन केंद्र बनकर तैयार हैं। क्रियाशील भी करा दिए गए हैं। अभी करीब 700 ग्राम पंचायतों का भुगतान बाकी है, उनसे डिमांड के लिए कहा गया है। अभी तक सिर्फ 21 गांव का डिमांड प्राप्त हुआ है, भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-घनश्याम सागर, डीपीआरओ, बस्ती।