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Basti News: अब 12 से 15 एकड़ में बसेगी रामायण सिटी... नहीं मिली जमीन तो शासन ने घटाया रकबा

Sat, 25 Nov 2023 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 25 Nov 2023 12:57 AM IST
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Now Ramayana City will be situated in 12 to 15 acres
पहले 25 एकड़ में रामायण सिटी बसाने की थी योजना
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शासन को रिपोर्ट भेजने के बाद रकबा घटाने की मिली अनुमति
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अब 12 से 15 एकड़ में रामायण सिटी बसेगी। पहले इसे 25 एकड़ भूभाग में बसाए जाने की योजना थी। छह माह से अधिक का समय बीतने के बाद बीडीए को शहर के आसपास यह भूभाग उपलब्ध नहीं हो सका। इस आशय की रिपोर्ट शासन को भेजी गई तो रकबा घटाकर करीब आधा कर दिया गया। इसके बाद बीडीए एक बार फिर रामायण सिटी के लिए भूमि की तलाश में जुट गया है।
बस्ती विकास प्राधिकरण की ओर से नई कॉलोनी के रूप में रामायण सिटी बसाने की योजना एक साल से चल रही है। इसके लिए शासन ने 25 एकड़ जमीन निर्धारित किया था। पहले राजस्व विभाग की मदद से सरकारी जमीन की तलाश की गई, मगर इतना बड़ा भू-भाग नहीं मिल सका। इसके बाद बीडीए ने जमीन खरीदने की योजना बनाई। शहर से लेकर प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले गांवों में जमीन की तलाश की गई। कुछ जगहों पर बड़े काश्तकारेां को सहमत भी किया गया। मगर, दस एकड़ से ज्यादा जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई।
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तीसरा प्रयास किसानों का समूह तैयार कर जमीन खरीदने का हुआ। इस पर भी बात नहीं बनी। कुछ अपनी जमीन बीडीए को बेचने को तैयार हुए तो अगल-बगल के किसानों ने अपनी जमीन बेचने से इन्कार कर दिया। इस वजह से यह महत्वाकांक्षी परियोजना अधर में लटकी रही। जब यह समस्या शासन के संज्ञान में आई तो हाल में ही रामायण सिटी का रकबा घटा दिया गया है। शासन के नए निर्देश के मुताबिक 12 से 15 एकड़ भूभाग में ही रामायण सिटी बसाया जाएगा।
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प्रभु श्रीराम की स्मृतियों को संजोने वाला रामायण सिटी होगा। श्री राम चरित मानस के पात्रों के नाम से अलग-अलग ब्लॉक और चौराहे बनेंगे। प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, माता सीता, महाराज दशरथ, माता कौशल्या, श्री हनुमान की विभिन्न मुद्राओं की प्रतिमाएं भी स्थापित होंगी। मल्टी स्टोरी कांपलेक्स, पेट्रोल पंप, प्रवेश और निकासी द्वार, भव्य गेट, आधुनिक पार्क, जलाशय और मोटर बोट की व्यवस्था, पार्किंग, हरियाली आदि सुविधाओं से यह सुसज्जित होगा। आवासी क्षेत्र के साथ कामर्शियल भवन भी बनाए जाएंगे।
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बड़े काश्तकार न होने से आ रही दिक्कत
रामायण सिटी बसाने के लिए जमीन की उपलब्धता न होना बड़ी बाधा है। प्राधिकरण के 151 वर्ग किमी दायरे में बड़े काश्तकार खोजने पर भी नहीं मिल रहे हैं। जिनके पास मानक के अनुरूप रकबा है तो वह प्राधिकरण क्षेत्र की जमीन बेचने को तैयार नहीं है। एक मुश्त जमीन के लिए कम जोत के किसानों का समूह भी तैयार नहीं हो पा रहा है। ऐसे में 25 एकड़ की जगह 12 से 15 एकड़ जमीन भी जुटाना बीडीए के लिए चुनौतीपूर्ण है।
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बीडीए की तरफ से जमीनों का मूल्य भी निर्धारित नहीं
बीडीए की ओर से रामायण सिटी के लिए खरीदी जा रही जमीनों का मूल्य भी निर्धारित नहीं किया गया है, ताकि किसानों को प्रलोभन मिल सकें। बगैर मूल्य निर्धारण के ही जमीन की तलाश की जा रही है। ऐसे में किसान किनारा कस ले रहे हैं। सर्किल रेट से अधिक मूल्य मिलने पर ही किसान सरकारी योजना के लिए जमीन देने पर तैयार होते हैं। मगर, ऐसी याेजना न होने से बीडीए फ्लाप हो जा रहा है।
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अधिग्रहण का भी प्रावधान नहीं
रामायण सिटी के लिए बीडीए के पास जमीन के अधिग्रहण का भी प्रावधान नहीं है। जबकि पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई जैसी कार्यदायी एजेंसियों को नई सड़क बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण का अधिकार होता है। जमीनों का चिह्नांकन के बाद सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा काश्तकारों को दिया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत किसानों को अपनी जमीन अनिवार्य रूप से देनी होती है। मगर, बीडीए के पास ऐसी कोई योजना नहीं है।
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मेडिकल कॉलेज के पास खोजी गई थी जमीन
शुरू में बीडीए ने रामपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के पास जमीन की तलाश की थी। मगर, दस एकड़ भूमि ही मिल पाई थी। रकबा कम होने से यह भूमि चयनित नहीं हो पाई। इसके बाद शहर के चारों तरफ कहीं नहीं जमीन मिली। रामायण सिटी बसाने के लिए नदी एवं बड़े जलाशयों के किनारे का भू-भाग नहीं चयनित करना है। निचली सतह की जमीन पर यह सिटी नहीं बसाई जाएगी। मुख्य सड़कों के आसपास समतल जमीन खरीदने की योजना बनाई गई है ताकि आवागमन की सुदृढ़ व्यवस्था बन सकें।

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कोट
शासन ने रामायण सिटी के लिए रकबा 25 एकड़ से घटाकर 12 से 15 एकड़ कर दिया है। जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। किसानों से सामंजस्य बनाकर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इच्छुक किसानों को जमीन की वाजिब कीमत दी जाएगी।
संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए
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