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14 बीडीओ को कारण बताओ नोटिस दिया
अमर उजाला ब्यूरो/बस्ती
Updated Mon, 11 Jan 2016 11:46 PM IST
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कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा के रूप में कार्य करने वाले बीडीओ अपने कार्यों को सही तरीके से अंजाम देने में विफल है। इसके चलते मनरेगा योजना को गति नहीं मिल पा रही है। इसे लेकर सीडीओ सोबरन सिंह ने मनरेगा के कार्यो में रुचि न लेने वाले सभी 14 बीडीओ को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
बीडीओ की कार्य शैली को लेकर नाराजगी जताते हुए सीडीओ ने कहा कि बीडीओ की लापरवाही के चलते जब राज्य स्तर पर मनरेगा के कार्यों की समीक्षा होती है तो जिले की प्रगति पर असंतोष जताया जाता है। बताया कि 10 अप्रैल 2015 और आठ जनवरी 2016 के बीच सभी बीडीओ को मनरेगा कार्यों में प्रगति लाने के लिए 15 पत्र लिखे गए, बावजूद बीडीओ कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। बताया कि इस मामले में सभी बीडीओ को अंतिम नोटिस दिया गया, उसके बाद कठोर कार्रवाई करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
जिन मामलों को लेकर सीडीओ की ओर से सभी बीडीओ को कारण बताओ नाटिस जारी किया गया, उनमें रोजगार सृजन के लक्ष्य को पूरा न करना, मनरेगा मजदूरों का भुगतान न करना, जारी मस्टररोल की फीडिंग न करना और मनरेगा श्रमिकों का आधार कार्ड फीडिंग न कराना शामिल है। सबसे खराब स्थित फीडिंग न होने से मजदूरों का भुगतान न होना है। इसके चलते 12468 मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। मनरेगा के जिन कार्यों की प्रगति बताई गई, उसमें वर्ष 2012-13 के दो कार्य, वर्ष 2013-14 के तीन कार्य वर्ष 2014-15 के 20 और वर्ष 215-16 के 570 कार्य चलना बताया गया है।
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बीडीओ की कार्य शैली को लेकर नाराजगी जताते हुए सीडीओ ने कहा कि बीडीओ की लापरवाही के चलते जब राज्य स्तर पर मनरेगा के कार्यों की समीक्षा होती है तो जिले की प्रगति पर असंतोष जताया जाता है। बताया कि 10 अप्रैल 2015 और आठ जनवरी 2016 के बीच सभी बीडीओ को मनरेगा कार्यों में प्रगति लाने के लिए 15 पत्र लिखे गए, बावजूद बीडीओ कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। बताया कि इस मामले में सभी बीडीओ को अंतिम नोटिस दिया गया, उसके बाद कठोर कार्रवाई करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
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जिन मामलों को लेकर सीडीओ की ओर से सभी बीडीओ को कारण बताओ नाटिस जारी किया गया, उनमें रोजगार सृजन के लक्ष्य को पूरा न करना, मनरेगा मजदूरों का भुगतान न करना, जारी मस्टररोल की फीडिंग न करना और मनरेगा श्रमिकों का आधार कार्ड फीडिंग न कराना शामिल है। सबसे खराब स्थित फीडिंग न होने से मजदूरों का भुगतान न होना है। इसके चलते 12468 मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। मनरेगा के जिन कार्यों की प्रगति बताई गई, उसमें वर्ष 2012-13 के दो कार्य, वर्ष 2013-14 के तीन कार्य वर्ष 2014-15 के 20 और वर्ष 215-16 के 570 कार्य चलना बताया गया है।
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